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क्या आप घर में लगने वाले सूतक के बारे में जानते हैं ? नहीं तो जाने।

भारतीय हिंदू धर्म में जन्म और मरण और ग्रहण के समय सूतक को माना जाता है, एवं पुराने अनुभवों के अनुसार घर के बुजुर्ग जैसा कहते हैं, वैसा ही सभी करने लगते हैं। लेकिन बहुत कम लोग ही जान पाते हैं, कि सूतक और पातक क्या होते हैं और उनका जीवन पर क्या असर पडता है, सूतक का सम्बन्ध जन्म के कारण हुई अशुद्धि से है, जन्म के अवसर पर जो नाल काटा जाता है और जन्म होने की प्रक्रिया में अन्य प्रकार की जो हिंसा होती है, उसमे लगने वाले दोष या पाप के प्रायश्चित स्वरुप सूतक माना जाता है। पातक का सम्बन्ध मरण के निम्मित से हुई अशुद्धि से है। मरण के अवसर पर दाह-संस्कार में इत्यादि में जो हिंसा होती है, उसमे लगने वाले दोष या पाप के प्रायश्चित स्वरुप पातक माना जाता है। इस वीडियो को जरूर देखे   जब परिवार या कुटुंब में भी किसी का जन्म या मृत्यु होती है तब उसके पारिवारिक सदस्यों को 'सूतक' (पृथकता) का अनुपालन करना आवश्यक होता है। शास्त्रों में 'सूतक' (पृथकता) के अनुपालन का निर्देश हैं। किंतु अक्सर 'सूतक' की अवधि को लेकर लोगों के मन में दुविधा रहती है कि 'सूतक' की अवधि कितनी हो अर्थात् &