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अप्रैल 16, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मारवाड़ी लोकोक्तियां 12

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  आप मिलै सो दूध बराबर, मांग मिलै सो पाणी। शब्दार्थ:- जो स्वयं बिना मांगे मिले वह दूध के समान होता है और जो मांगने से मिले वह पानी के समान होता है।  भावार्थ :- जो श्रम से अथवा सम्मान से अर्जित किया जाता है वो सुखद एवं कीर्ति बढ़ने वाला होता है और जो मांग कर,हट्ट करके लिया जाये निस्तेज और कमतर होता है।  कनै कोडी कोनी, नाम किरोड़ीमल।  शब्दार्थ:- स्वयं के पास में कौड़ी नहीं है लेकिन ऐसे व्यक्ति का नाम करोड़ीमल है।  भावार्थ :- नाम या ख्याति के अनुरूप किसी के पास धन वैभव ना हो अथवा किसी जगह /वस्तु में नाम के अनुसार गुण न हो।  आम फळे नीचो तुळै,अेरंड अकासां जाय।  शब्दार्थ:-आम फलता है तो नीचे झुकता है, ऐरंड आकाश की ओर जाता है।  भावार्थ :-धीर-गंभीर व्यक्तित्व वाले आदमी संपत्ति या प्रभुता पाकर नम्र हो जाते हैं जबकि छिछले और उच्छृंकल व्यक्तित्व वाले आदमी इतराने लगते हैं।  नागा रो लाय में कांई बळै ?  शब्दार्थ:-अगर कहीं आग लग जाये तो उदण्ड/स्वछन्द व्यक्ति का (यहाँ ऐसा  अर्थ की जिस का हानि-लाभ में कुछ भी हिस्सा न हो ) उस आग में क्या जल जायेगा ?  भावार्थ :- ऐसे व्यक्ति की किसी निहित कार्य में क्या हान

राजस्थानी लोकोक्तियां 11

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नाई री जान में सैंग ठाकर।  शब्दार्थ:- नाई की बारात में आये हुए सब लोग ठाकुर जाति के(उच्च कुल /जाति के) हैं।  भावार्थ :- निर्बल या कम सक्षम व्यक्ति के हितार्थ काम में कोई भी सहयोग करने को राजी नहीं है।  मिन्नी र खेल हुवे , उंदरा रो घर भांगे। शब्दार्थ:- बिल्ली के खेल-खेल में चूहे का बिल टूट जाता है।  भावार्थ :- समर्थ और सक्षम व्यक्ति का ऐसा व्यहवहार जिसमें उसको तो आनंद मिले परन्तु निर्बल व्यक्ति का बहुत अधिक नुक्सान हो जाये।  दाई सुं पेट थोड़ो'ई छानों रह।  शब्दार्थ:- दाई से पेट नहीं छुपाया जा सकता है।  भावार्थ :- अनुभवी व्यक्ति से किसी बात का भेद छुपाया नहीं जा सकता है।  लाडू री कोर में कुण खारो,कुण मीठो ? शब्दार्थ:-लड्डू की ग्रास में कौनसा भाग खारा और कौनसा भाग मीठा ?  भावार्थ :- बगैर पक्षपात के सभी के साथ समान व्यहवार करना, सबको एक समान मानना। ⬅️पीछे और पढ़ें 🇮🇳 आगे और पढ़ें➡️