अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद याद आए तो क्या करें? और उनकी फोटो लगाए या नहीं।

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क्या कर्मों का फल मिलता हैं?
 
कई बार हम यह सोच लेते हैं कि यह संसार क्या है ? मगर हमें समझ नहीं आता कि इस संसार में हमारा मकसद क्या है ?
हमारा यहां क्या मतलब है ? यह प्रश्न भहुत लोग करते हैं और अंदर ही अंदर सोचते भी है। मगर गुरु बिन कोन समझाय वाली बात आ जाती हैं।
इन प्रश्नों के उत्तर मेरे दृष्टि कोण से यह है कि हमारे कर्मो के हिसाब से ही हमें इस संसार में आना पड़ता हैं। और भूतकाल में जो हुआ वह वर्तमान या आगे कभी भी मिलेगा आपके कर्म के हिसाब से और वर्तमान में जो करोगे उसका फल भी आगे आयगा।
हमने जैसा कर्म किया वैसा ही उसका फल भविष्य में मिलेगा कोनसे जन्म मे या कब मिलेगा यह प्रकृति और हमारे कर्म के हिसाब से चलेगा।
इसमें हमें परमात्मा भी नहीं बचा सकते क्योंकि उन्हें भी कर्म के अनुसार चलना पड़ता हैं। जिसके हमारे शास्त्र गवाह है जैसे कृष्ण जन्म भी कर्म के आधार पर हुआ है और राम जन्म भी किसी न किसी कर्म के आधार पर हुआ है।
अब इस संसार चक्कर में पड़कर मनुष्य यह नहीं समझ पाता है कि मुझे यहां क्या करना है, इस संसार में क्यों आया हूं (इस मृत्युलोक में क्यों आया हूं), मेरा यहां कर्तव्य क्या है, मुझे यहां कौन से कर्म करने चाहिए ? इनके बारे में कभी सोच विचार नहीं करता है वह कहीं और ही कर्मों में अपना समय व्यर्थ गंवा देता है और फिर इस मृत्युलोक में किसी न किसी रूप में जन्म लेता है फिर कर्म भोगता है इस तरह से उसका क्रम चलता रहता है, जब तक वह यह नहीं समझ पाता कि में इस संसार में क्यों आया हूं मेरा असली कर्म क्या है, तब तक उसका मृत्यु चक्र चलते रहेगा।
जैसे कोई भी जानवर अपना पेट भरने के लिए दूसरे जानवर को खा लेते हैं तो जिस जानवर को उसने खाया वह फिर किसी जन्म में उसको खाएगा।  वह उस जन्म में छोटा होगा और पिछले जन्म में जो छोटा था वह बड़ा होकर के जिसने उसे खाया उसने उसको खाएगा 
यानी आज आप दे रहे हो कल आप ले रहे हो, आज आप ले रहे हो कल आप दे रहे हो यह कर्म चलते ही रहेगा इन कर्मों का फल ना तो प्रकृति बदल सकती है ना ही परमात्मा बदल सकते हैं जैसा आप करोगे वैसा आप को भोगना ही पड़ेगा चाहे कुछ भी कर लो यह एक सत्य है इसे नहीं बदला जाता।
इसलिए हमें हमेशा मानवता अपनानी चाहिए, कमजोर लोगों का साथ देना चाहिए और हमेशा इंसानियत के रास्ते पर चलना चाहिए ग्रस्त धर्म निभाते हुए अपने कर्मों को सही दिशा देते हुए हमारी ग्रहस्त को आगे बढ़ाना चाहिए हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा देनी चाहिए।

पिंड दान करना जरूरी है? 

जैसे कर्म सत्य है उसी तरह है मृत्यु लोक में मृत्यु भी एक सत्य है जिसे हर व्यक्ति को न चाहते हुए स्वीकार करना पड़ता है, इससे कितना भी दूर भागने की कोशिश करोगे मगर जिस दिन वह समय आएगा उस दिन हमें इस शरीर को त्यागना ही पड़ता है, इसलिए हमें हमारे घर में मरने वाले बुजुर्ग के क्रिया कर्म के पूरे कर्म विधि विधान से करने चाहिए उनको पिंडदान देना बहुत ही जरूरी हो जाता है क्योंकि पिंड दान देने से उन्हें शक्ति प्रदान होती है कैसे होती है इसे आप अगर समझना चाहते हैं तो जैसे हम यहां नंबर डायल करते हैं और हमारी आवाज हजारों किलोमीटर दूर पहुंच जाती है उस से वहां कार्य बन जाते हैं, ठीक उसी तरह हम यहां पिंड देते हैं और वहां उनको शक्ति प्रदान हो जाती है या किसी रूप में मिल जाता हैं।
इसलिए हमें पिंड दान देना बहुत जरूरी है।

परिवार में मरने वाले की फोटो लगानी चाहिए या नहीं ?

 अगर आपके परिवार में कोई मर जाता है उनकी फोटो को भी आप अपने घर में नहीं लगाए तो अच्छा है, उनको बार-बार में याद करके दुख प्रकट भी ना करें, उनके कार्य पूरे करें कि वह हमारे घर की तरक्की के लिए क्या सोचते थे गांव की तरक्की के लिए क्या सोचते थे या और कोई उनकी अंदर की भावनाएं क्या थी।
 जब आपको याद आए तो यह सोचना कि उनके क्या कार्य है यह नहीं की आप दुख प्रकट करते रहे, उनके बचे हुए जो काम थे उनको पूरा करें ताकि उनकी आत्मा को संतुष्टि मिल सके और उनकी तिथि आए तब उनके नाम से ब्राह्मण, गाय को खाना खिलाए उनके नाम के पिंड दान करें, वह जिस भी योनि में है उनको वहां सुविधाएं उत्पन्न होगी।

हमारा आर्टिकल पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

इस आर्टिकल में लिखी हुई बातें शास्त्र और शोच पर आधारित हैं इसकी पुष्टि हमारी साइट नहीं करती सिर्फ आपतक जानकारी पहुंचने के लिए इस आर्टिकल को लिखा गया है।



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