हनुमान जी की पूजा करते समय रखें ध्यान। हनुमान जयंती कहूं ? या हनुमान जन्मोत्सव ?

हनुमान जन्मोत्सव चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। हनुमान, जिन्हें वानर भगवान के रूप में भी जाना जाता है, इस दिन उनका जन्म हुआ था। हनुमान जी के जन्म दिवस को हनुमान जयंतीह नहीं, जन्मोत्सव के रूप में मनाना चाहिए।
भक्तगण अपनी स्थानीय मान्यताओं एवं कैलेण्डर के आधार पर वर्ष में भिन्न-भिन्न समय पर हनुमान जन्मोत्सव का त्यौहार मनाते हैं। उत्तर भारतीय राज्यों में चैत्र पूर्णिमा की हनुमान जयन्ती सर्वाधिक लोकप्रिय है।
हनुमान जयन्ती शनिवार, अप्रैल 16, 2022 को
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 16, 2022 को 02:25 AM बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त - अप्रैल 17, 2022 को 12:24 AM बजे
  • हनुमान जन्मोत्सव को जयंती ना कहें।

जयंती और जन्‍मोत्‍सव शब्‍द के इस बड़े मूलभूत अंतर को देखते हुए भगवान हनुमान के जन्‍म के पर्व के लिए जन्‍मोत्‍सव शब्‍द का ही इस्‍तेमाल करें, साथ ही अन्‍य लोगों को भी सही शब्‍द कहने के लिए ही प्रेरित करें, इसके अलावा अपने शुभकामना संदेशों में भी हनुमान जन्‍मोत्‍सव का ही इस्‍तेमाल करें।
  •  हनुमान जन्मोत्सव क्यों कहें ?
 अपने माता पिता, भाई बहन, मित्र और परिचितों का हम जन्मदिन मनाते हैं, जब कोई महान वि​भूति धरती पर अपने कर्म करने के बाद परमधाम को प्रस्थान कर जाती है, तो उसके जन्म की तिथि को जयंती के तौर पर मनाया जाता है, जैसे विवेकानंद जयंती, गुरुनानक जयंती आदि, लेकिन जब कोई देव धरती पर अवतार लेते हैं, तो उनके जीवित रहते हुए उनके जन्म तिथि के उत्सव को जन्मोत्सव के तौर पर मनाया जाता है। वहीं देव अपना कार्य पूर्ण करके धरती से अपने धाम को प्रस्थान भी कर जाएं, तो भी उनके जन्मोत्सव को जयंती नहीं कहा जाता जैसे श्रीकृष्ण और राम जी के धरती पर सशरीर विद्यमान न होने के बावजूद उनके जन्मोत्सव को जन्माष्टमी और राम नवमी के तौर पर मनाया जाता है, लेकिन कृष्ण जयंती और राम जयंती नहीं कहा जाता, अब बात करें हनुमान जयंती की, तो हनुमान जी रुद्रावतार हैं और अजर-अमर हैं. वे आज भी धरती पर सशरीर विद्यमान हैं, ऐसे में उनकी जन्म तिथि का उत्सव जयंती के तौर पर नहीं, बल्कि जन्मोत्सव के तौर पर मनाया जाना चाहिए
  • खंडित मूर्ति।
 हनुमान जी की पूजा में टूटी हुई या खंडित मूर्ति का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अगर घर में हनुमान जी की कोई फटी तस्वीर है तो उसे तुरंत हटा कर विसर्जन कर दे।
  • काले रंग के वस्त्र।
 काले या सफेद रंग के कपड़े पहनकर कभी हनुमान जी की पूजा नहीं करनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से अशुभ फलों की प्राप्ति होती है। बजरंगबली की पूजा करते समय पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
  • चरणामृत।
हनुमान जी की पूजा करते समय चरणामृत का प्रयोग नहीं करना चाहिए। चरणामृत का प्रयोग करने से अशुभ परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
  •  स्त्रियों का स्पर्श।
हनुमान जी बाल ब्रह्यचारी हैं। हनुमान जी की पूजा करते समय ब्रह्यचर्य व्रत का सख्ती से पालन करना चाहिए। इसलिए पूजा के दौरान महिलाओं को उनका स्पर्श नहीं करना चाहिए।
  • दिन में ना सोएं।
हनुमान जन्मोत्सव पर व्रत रखने वाले भक्तों को दिन में नहीं सोना चाहिए। इसके अलावा दान में मिली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • सूतक काल।
 सूतक काल में हनुमान जी की पूजा नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि सूतक काल में पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति नहीं होती है।

  • हनुमान जी के शक्तिशाली मंत्र
मनोजवं मारुततुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

ॐ महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते ।
हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये ।।

श्री हनुमानञ्जनसूनुर्वायुपुत्रो महाबलः ।
रामेष्टः फाल्गुनसखः पिङ्गाक्षोऽमितविक्रमः ।।

उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशनः ।
लक्ष्मणप्राणदाताश्च दशग्रीवस्य दर्पहा ॥
ॐ हनुमान
ॐ अंजनी सुत
ॐ वायु पुत्र
ॐ महाबल
ॐ रामेष्ट
ॐ फाल्गुण सखा
ॐ पिंगाक्ष
ॐ अमित विक्रम
ॐ उदधिक्रमण
ॐ सीता शोक विनाशन
ॐ लक्ष्मण प्राण दाता
ॐ दशग्रीव दर्पहा

इस लेख में लिखीत किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ आप तक सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसका उपयोग करने से पहले किसी जानकार की सलाह जरूर लें।  आपका दिन मंगलमय हो।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Close Menu