राजस्थानी लोकोक्तियां 6



बकरी रे मूंढा में मतीरो कुण खटण दे।

शब्दार्थ :-बकरी के मुहँ में तरबूज कौन रहने देता है ?

भावार्थ :- कमजोर / असहाय व्यक्ति को प्रभुत्वशाली और सक्षम लोग लाभ नहीं उठाने देते हैं।

पागड़ी गयी आगड़ी, सिर सलामत चायीजै। 

शब्दार्थ :- पगड़ी रहे न रहे सिर की सलामती ज्यादा जरुरी है। 

भावार्थ :- स्वार्थ की सिद्धि होती हो तो लोक-लाज की परवाह या मर्यादा की चिंता नहीं। 

करमहीन किसनियो, जान कठै सूं जाय । करमां लिखी खीचड़ी, घी कठै सूं खाय ।। 

शब्दार्थ :- भाग्यहीन किसन नामक व्यक्ति किसी विवाह समारोह में शामिल नहीं हो सकता है। उसके भाग्य में तो खिचड़ी खाना लिखा है वो घी कहाँ खा पायेगा। 

भावार्थ :- भाग्य में जितना फल प्राप्त होना तय है,किसी को उससे अधिक प्राप्त नहीं होता है।

घर तो घोस्यां का बळसी, पण सुख ऊंदरा भी कोनी पावै। 

शब्दार्थ :- अगर घोसीयों के घर जलेंगे तो उनकी हानि तो अवश्य होगी परन्तु वहां रहने वाले चूहे भी सुखी नहीं रहेंगे। ( घोसी = एक मुस्लिम जाति,जो की पशु पालन और दूध का व्यवसाय करते हैं.)

भावार्थ :-किसी व्यक्ति या संस्थान को अगर हानि होती है तो उन पर निर्भर अन्य लोगों को भी मुसीबतों को सहन करना पड़ता है। 

मान मनाया खीर न खाया, अैंठा पातल चाटण आया।

शब्दार्थ :- सन्मान के साथ मनाया तब खीर भी नहीं खायी परन्तु अब जूठे पतल चाटने को आ पहुंचे। 

भावार्थ :- सन्मान के साथ जब मान-मनौवल की तब तो घमंड/अहम के कारण उच्च स्तर का कार्य भी नहीं करने को तैयार हुए पर जब समय बीत गया तब स्तरहीन कार्य भी करने तैयार हो गए। 

कागलां री दुरासीस सूं ऊंट कौनी मरै।

शब्दार्थ :-कौवे के श्राप देने मात्र से ऊँट नहीं मर सकता है।

भावार्थ :- निर्बल या असक्षम व्यक्ति के चिंतन से सक्षम व्यक्ति का बुरा नहीं हो सकता है।

पाणी पीणो छाणके, करणो मनरो जाणके।

शब्दार्थ :- पानी हमेशा छान कर पीना चाहिए और कोई भी काम हो मन मुताबिक तब ही करना चाहिये। 

भावार्थ :- किसी भी काम अच्छी तरह से जान समझ कर और अपने मन मुताबिक हो तब ही करना चाहिए,सूानो सबकी करो मन की।

राणाजी केहवे वठैई रेवाड़ी।

शब्दार्थ :- महाराणा जहां कहे वहीँ उनकी राजधानी हो सकती है। 

भावार्थ :-समर्थ एवं समृद्ध व्यक्ति की उचित/अनुचित हर बात को हर जगह प्रधान्य मिलता है।

धणो हेत टूटण ने,मोठी आँख फूटण ने।

शब्दार्थ :- जरुरत से ज्यादा प्रेम का टूटन निश्चित है और अधिक बड़ी आँख का फूटना भी।

भावार्थ :- अति हर चीज़ की बुरी होती है,फिर चाहे वो किसी अच्छी बात या चीज़ की ही क्यों ना हो। 

आंधी पीसे, कुत्ता खाय, पापी रो धन परले जाय।

 शब्दार्थ :- अंधी औरत अनाज पीसती है, लेकिन कुत्ता खा लेता हैं,पापी के धन का नाश होता है। 

भावार्थ :-पाप कर्म से और अनुचित कार्य से अर्जित धन का विनाश हो जाता है।

बाप बता, नहीं तो श्राद्ध कर।

शब्दार्थ :-या तो तुम्हारे पिताजी को दिखाओ या फिर उनका श्राद्ध कर डालो। 

भावार्थ :-अपनी बात का सुबूत दिखाओ या फिर उस बात की समाप्त कर दो जिस पर विवाद है।

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