राजस्थानी लोकोक्तियां 4

कथनी सूं करणी दोरी।

शब्दार्थ :- कहना आसान है जबकि काम करना दुस्कर होता है। 

भावार्थ :- किसी काम की बात को कहना आसान है,क्योंकि बात को कहने में किसी प्रकार का श्रम नहीं लगता है,जबकि काम को करना अपेक्षाकृत दुस्कर होता है,क्योंकि किसी कार्य करने के लिए कार्य योजना,श्रम एवं धन लगता है।

चतर री च्यार घड़ी, मूरख रो जमारो।

शब्दार्थ :- चतुर व्यक्ति के लिए चार घड़ी (थोड़ा सा समय ) ही काफी है जबकि मूर्ख का पूरा जीवन भी कम पड़ जाता है। 

भावार्थ :- चतुर थोड़े समय ही में जिस काम को कर लेता है,मुर्ख व्यक्ति उसको उम्र भर नहीं कर सकाता।

थूक सूं गांठयोड़ा,किताना दिन संधै?

शब्दार्थ :- थूक से चिपकाये हुए कितने दिन तक जुड़े हुए रह सकते हैं ?

भावार्थ :- तात्कालिक जल्दी से किया हुआ कार्य अधिक समय के लिए टिकाऊ नहीं हो सकता है।

धीरां रा गांव बसै,उतावळां रा देवळयां हुवै।

शब्दार्थ :-धैर्यशाली लोगों के नाम से गांव बस जाते हैं जबकि उतावली करने वालों के सिर्फ स्मारक बनाते हैं। 

शीघ्रता से युद्ध में उतरने वाले के केवल स्मारक ही रहते हैं और धैय्र्य वाला 

और युद्ध चातुय्र्य वाले पुरुष गांव बसा सकते है।

भावार्थ :- धैर्य औए चातुर्यपूर्वक कार्य करने वालों को सफलता मिलती है,जबकि केवल जोश से,बिना कार्य योजना से काम करने वालों को असफलता का सामना करना पड़ता है। 

साँच कहवे थी मावडी, झूठ कहवे था लोग। खारी लागी मावडी, मीठा लाग्या लोग॥

शब्दार्थ :- माँ सच बोल रही थी जबकि लोग झूठ बोल रहे थे। लोग प्रिय लग रहे थे जबकि माँ अप्रिय लग रही थी।  

भावार्थ :- माँ अपने बच्चों की भलाई के लिए सत्य बोलती है परन्तु वो सच मनवांछित नहीं होता इस कारन से कड़ुआ लगता है,जबकि पराये लोग जो अच्छा लगे वैसा ही बोलते हैं,फिर चाहे वो झूठ ही हो।

आया था हर भजन करणे,ओटण लाग्या कपास।

शब्दार्थ :- भगवान का भजन करने को आये थे,परन्तु कपास ओटने लगे।

भावार्थ :- जो सद्कार्य करना आरम्भ किया था उसे तो भूल गए लेकिन उसे छोड़कर कुछ दूसरा काम ही करने लगे।।

बांबी कुट्यां सांप थोड़ो ही मरै।

शब्दार्थ :-केवल बांबी को पीटने से सांप नहीं मरता है। 

भावार्थ :- किसी कठिनाई को मात्र बाहरी उपचार से समाप्त नहीं किया जा सकता है।

माया सूं माया मिलै कर–कर लांबा हाथ।

शब्दार्थ :- धन संपन्न व्यक्ति का उसी प्रकार के वैभवशाली व्यक्ति से मिलन अधिक अंतरंगता से होता है।

भावार्थ :- साधन संपन्न लोगों का,मेल- जोल समान स्तर क़े लोगों से अधिक नजदीकी से होता है।

⬅️पीछे पढ़ें🇮🇳आगे और पढ़ें➡️


Previous
Next Post »