राजस्थानी लोकोक्तियां 3

 

           न खुदा ही मिला न विसाले सनम।

खाट पड़े ले लीजिये , पीछै देवै न खील 

आं तीन्यां का एक गुण , बेस्यां बैद उकील।

अर्थ - वैश्या अपने ग्राहक से और वैद्य अपने रोगी से खाट पर पड़े हुए ही जो लेले सो ठीक है, पीछे मिलने की उम्मीद न करे। …इसी प्रकार वकील अपने मुवक्किल से जितना पहले हथिया ले वही उसका है।

जीवते की दो रोटी , मरोड्ये की सो रोटी।

अर्थ - जीते हुए की सिर्फ दो रोटी और मरे हुए की सौ रोटियाँ लगती है। 

खाट पड़े ले लीजिये , पीछै देवै न खील 

आं तीन्यां का एक गुण , बेस्यां बैद वकील।

अर्थ - वैश्या अपने ग्राहक से और वैद्य अपने रोगी से खाट पर पड़े हुए ही जो लेले सो ठीक है, पीछे मिलने की उम्मीद न करे। …इसी प्रकार वकील अपने मुवक्किल से जितना पहले हथिया ले वही उसका है।

कै मोड्यो बाँधे पाग्ड़ी कै रहै उघाड़ी टाट। 

बाबाजी बांधे तो सिर पर पगड़ी ही बांधे नहीं तो नंगे सिर ही रहे। 

बाबाजी बांधे तो सिर पर पगड़ी ही बांधे नहीं तो नंगे सिर ही रहे।            कुम्हार घधे   चढले , 'क कोनी चढू , पण फेर आपै ई चढले।

जो मनुष्य बार बार कहने पर भी किसी काम को न करे , लेकिन फिर झख मार कर अपने आप करले।

दांतले खसम को रोवते को बेरो पड़े ना हँसते को।

अर्थ - दंतुले [जिसके दांत बाहर दिखते हो] पति का कुछ पता नहीं चलता कि वह रो रहा है या हँस रहा है।

संगत बड़ा की कीजिये , बढत बढत बढ जाए 

बकरी हाथी पर चढी , चुग चुग कॊंपळ खाए।

अर्थ - संगति हमेशा बड़ो की करनी चाहिए  बकरी ने हाथी से संगति की तो हाथी ने उसे अपनी पीठ पर बैठा लिया और अब वह चुन चुन कर वृक्षों की हरी कोपले खा रही है।

परनारी पैनी छुरी , तीन ठोर से खाय 

धन छीजे जोबन हडे , पत पञ्चां में जाय।

अर्थ - परनारी से प्रेम करना पैनी छुरी के समान है, वह धन और यौवन का हरण करती है और पंचो में प्रतिष्ठा गवां देती है।

दूर जंवाई फूल बरोबर , गाँव जंवाई आधो ,

घर जंवाई गधे बरोबर , चाये जिंया लादो।

अर्थ - दूर रहने वाला दामाद का अधिक सम्मान रहता है, गाँव वाले का आधा और घर जंवाई की क़द्र तो गधे के बराबर रह जाती है।

भलांई खीर बिगड्गी पण, राबड़ी से न्हाऊं कौनी।

शब्दार्थ:- खीर यदि बिगड़ भी जाए तो राबड़ी से बुरी नहीं। 

भावार्थ :- कोई अच्छा/उच्च स्तर का काम न हो सका हो या अच्छी वस्तु न मिल सके,तो भी स्तरहीन या निम्न गुणवत्ता वाला काम/वस्तु से समझौता स्वीकार्य नहीं है।

रांड भांड न छेड़िए , पण्घट पर दासी। 

भूखो सिंह न छेड़िए , सुत्यो सन्यासी।।

अर्थ - विधवा स्त्री , भांड , पनघट की दासी , भूखे सिंह एवं सोये हुए सन्यासी से कभी छेड़ छाड़ नहीं करनी चाहिए । ज्यांका मर ग्या बादशा रुळता फिरे वज़ीर।

शब्दार्थ :- जिनके बादशाह या प्रमुख की मृत्यु हो गयी,उनके अनुयायी /कनिष्ठ लोग मारे-मारे फिरते हैं।

भावार्थ :-  जब किसी प्रभावशाली व्यक्ति का किन्ही लोगों पर वरद्हस्त हो,और उस प्रभावशाली व्यक्ति की मृत्यु हो जाये या वो सत्ता पर न रहे तो उसके अनुयायी/कनिष्ठ लोगों का प्रभाव या रुतबा भी नष्ट हो जाता है।

आज ही मोडियो मूंड मुडाया अर आज ही ओळा पड़गया

अर्थ - आज ही बाबाजी ने सिर मुंडवाया और आज ही ओले पड़े।

आंधे की गफ्फी , बोळे को बटको।

राम छुटावे तो छूटे , नहीं सिर ही पटको   अर्थ - अंधे के हाथों और बहरे के दाँतों की पकड़ सहज ही नहीं छूटती।         ⬅️पीछे पढ़ें🇮🇳आगे और पढ़ें➡️


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