राजस्थानी लोकोक्तियां 14

घर रा छोरा घट्टी चाटे, पाडौसी ने आटो।

अर्थ :-  दिखावे के लिए आपना नुकसान करते हुए, भी दूसरों का लाभ करना .मांग-टांग मटको कियो,खोस लियो,फीको पड्यो।

शब्दार्थ :- मांग कर कुछ पहना (पहन कर इतराये = मट्टका किया) पर देने वाले वापस छीन लिया।

भावार्थ :- किसी से उधार लेकर काम जमाया,परन्तु उपयोग लेने के पहले ही उसने वापस ले लिया और लेने वाले को नीचा देखना पड़ा।                 
   अठे गुड़ गीलो कोनी          अर्थ:- हमें मूर्ख मत समझना।        अणी चूकी धार मारी            अर्थ:- सावधानी हटते ही दुर्घटना हो जाती है।
बान्दरो हुतो, बिच्छू काट ग्यो।

अर्थ :- अगुणी होते हुए भी , शेखी बघारने वाले को , अपनी चलाने के लिए कुछ और बहाना मिल जाना।
                            आक में ईख, फोग में जीरो       अर्थ:- बुरे कुल में सज्जन व्यक्ति का जन्म।                         अंधाधुंध की साहबी, घटाटोप को राज   अर्थ:- विवेकहीन शासकों के शासन में राज्य में अंधकार छा जाता है
सारी रात पीसीयो, ढकणि में ओसारियो।

शब्दार्थ :- पूरी रात पिसाई की (आटा बनाया) इतनी ही पिसाई हुई जिसे ढक्कन में संधा जा सके।

अर्थ :- बहुत ज्यादा मेहनत की , परन्तु प्रतिफल बहुत ही नगण्य मिला,क्योकि मेहनत की दिशा ठीक नहीं थी। 

तीन तेरी, घर बिखेरी क तो बावली सासरे जावै कोन्नी,जावै तो पाछी आवे कोंनी।

शब्दार्थ  :- पागल लड़की या तो सुसराल जाने को आनाकानी करती है, और अगर चली जाये तो वापस आने को आनाकानी कराती है।

भावार्थ :- कोई कार्य का या तो न किया जाना और अगर किया जाये तो फिर अत्यधिक कर लेना .घर रा तो घट्टी पीसे ,पावणों ने पूरी भावे।

आम के अणी नहीं, वैश्या के धणी नहीं अर्थ:- जिसका कोई पता ठिकाना नहीं हो।

असी रातां का असां ही तड़का       अर्थ:- बुरे कामों का नतीजा भी बुरा ही होता है।

ओस चाट्यां कसो पेट भरै         अर्थ:-  निरर्थक प्रयास फलदायी नहीं होता।

ओसर चूकी डूमणी, गावै आल पाताल अर्थ:- लक्ष्य से भटका हुआ व्यक्ति सार्थक कार्य नहीं कर सकता।

अंटी में आणौ                 अर्थ:- किसी के फंदे या जाल में फँसना।

अकल भांग खाणी              अर्थ:- मूर्खता का काम करना।

आँख चूकणी                   अर्थ:- लापरवाह होना या न देखना।

घर रा तो घट्टी पीसे, पावणोंने पूरी भावे।

शब्दार्थ :- घरवाले तो घट्टी (चक्की ) चला कर आटा तैयार करे और मेहमानों को पूरी-पकवान खाने की इच्छा करे। 

भावार्थ :- सामने वाले की मज़बूरी को न समज़ते हुए,अपने स्वार्थ को पूरा करवाने पर अड़ जाना।
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