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घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए करें यज्ञ (हवन)।

 हवन करना शास्त्रों में बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। भारतीय परम्पराओ में हवन अथवा यज्ञ को बहुत महत्व बताया गया है। दशांश हवन प्रत्येक मंत्रो को सिद्ध करने के बाद किया जाता है। जिसके अंतर्गत मन्त्र जप का दसवा हिस्सा आहुतियों के माद्यम से सिद्ध किया जाता है। मान लीजिये हमने 125000 जप किये है तो हमें कुल के दसवां भाग 12500 जप का हवन करना होता है। इसको समझने के लिए हम तालिका का प्रयोग करेंगे जप संख्या कर्म विधान 1 125000 कुल मंत्र जप 2 125000/10= 12500 हवन अहुतिया 3 12500/10 = 1250 तर्पण 4. 1250/10 = 125 मार्जन 5 125/10 = 12 ब्रम्ह या कन्या भोज  उपरोक्त दी गई तालिका के माद्यम से हम समझ सकते है कि सपूर्ण दशांश हवन कैसे किया जाये। यदि किसी कारणवश तर्पण ,मार्जन या कन्या भोज में असमर्थ है तो आप उससे दुगना जप करके भी सिद्ध मान सकते है। लेकिन कुछ मतानुसार हवन कर्म करने से देवताओ को शक्ति मिलती है अर्थात मंत्र हवन से अधिक लाभ मिलता है।      हवन से पहेले हमें सामग्री की आवश्यकता पड़ेगी। सर्वप्रथम सामग्री पर विचार कर लेते है : कुण्ड  कुण्ड अगर हम जमीन पर बना रहे है तो अति उत्तम माना जाता है।