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मार्च 13, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

नींबू सत (साइट्रिक एसिड) क्या है ? जाने इसके फायदे और नुकसान

  किसी भी तरह का प्रोडक्ट खरीदने के लिए आप सर्च बार में लिखें और Go बटन पर क्लिक करें। आपके सामने आपके प्रोडक्ट होंगे।  खट्टे फलों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला साइट्रिक एसिड आर्टिफिशयल या मैन्यूफैक्चर्ड साइट्रिक एसिड से अलग होता है। मैन्यूफैक्चर होने वाले साइट्रिक एसिड को नींबू सत, टाटरी या नींबू का फूल भी कहा जाता है जो सफेद रंग का और बेहद दरदरा (चीनी से भी बारीक) कण वाला होता है। खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों को खट्टा स्वाद देने के लिए इसे पानी में मिलाकर डाला जाता है।  आप सोच रहे होंगे कि आखिर नैचरल और मैन्यूफैक्चर्ड साइट्रिक एसिड में अंतर क्या है और इसका इस्तेमाल करना आपकी सेहत के लिए अच्छा है या बुरा। तो इस आर्टिकल में हम आपको बता रहे हैं कि साइट्रिक एसिड क्या है, इसका उपयोग कहां और कैसे होता है और यह सेहत के लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह। साइट्रिक एसिड या नींबू का फूल अलग-अलग तरह के सलाद, चटनी जैसी चीज़ों में मिलाया जाता है। यह सफेद रंग का पावडर एक नैचुरल टार्ट युक्त पदार्थ है जिसका स्वाद खट्टा होता है।इसकी कोई सुगंध या स्वाद नहीं होता लेकिन इससे आपके खाने में स्वाद आ जा

दूल्हा दुल्हन के पांव में रक्षासूत्र (कांकड़ डोलडा) क्यों बांधा जाता है ? और इसका मतलब क्या है ?

  हिंदू धर्म में प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में 16 संस्कार आवश्यक माने गए हैं। ये संस्कार जन्म से लेकर मरण तक आयु के हर पड़ाव में निश्चित क्रम में संपन्न किए जाते हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कार है- विवाह संस्कार। विवाह को जीवन के सर्वाधिक महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक माना जाता है। इसकी वजह यह है कि विवाह दो व्यक्तियों का मिलन होता है और उनके पूरे जीवन को प्रभावित और परिवर्तित कर देता है। इसके साथ ही यह दो परिवारों का भी मिलन होता है और कम-अधिक रूप में परिवार के हर सदस्य के जीवन को प्रभावित करता है। वैसे तो विवाह के समय वर-वधु को अनेक प्रकार के रीति रिवाज निभाने पड़ते हैं, लेकिन कई परिवारों में विवाह का पहला कार्य वर- वधु के पैरों में एक रक्षासूत्र बांधने के साथ प्रारंभ होता है। हिंदू परिवारों में विवाह प्रारंभ होते ही वर- वधु से अनेक रस्में कराई जाती हैं। इन्हीं में से एक रस्म है वर- वधु दोनों के ही पैरों में रक्षासूत्र बांधने की। कई स्थानों में इसे विवाह की पहली ही रस्म माना जाता है। इसे वर- वधु की रक्षा का सूत्र (कांकड़ डोलडा) कहा जाता है।   इससे दूल्हा- दुल्हन बुरी

सहजन के फायदे और नुकसान। सहजन का उपयोग कैसे करें ?

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  किसी भी तरह का प्रोडक्ट खरीदने के लिए आप सर्च बार में लिखें और Go बटन पर क्लिक करें। आपके सामने आपके प्रोडक्ट होंगे।  सहजन या ड्रमास्टिक ((Drumstick) वनस्पतिक नाम मोरिंगा ओलिफेरा (Moringa oleifera) के बारे में हम सभी जानते हैं पर इसमें पाये जाने वाले पोषक तत्वों एवं औषधीय गुणों के बारे में कम ही लोग जानते होंगे। इसे सीजना, सुरजना, शोभाजन, मरूगई, मरूनागाई, इण्डियन हार्सरैडिश आदि नामों से भी जाना जाता है। सहजनन भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और उप–हिमालयी क्षेत्रों का मूल निवासी है। पौष्टिकता और औषधीय गुणों के कारण अफ्रीका के उपोष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में इसकी खेती भी की जाती है। सहजन पूरे भारत में सुगमता से पाया जाने वाला पेड़ है। सहजन के पत्ते, फूल, फलियां, बीज व छाल सभी का किसी न किसी रूप में प्रयोग होता है। सहजन के पत्ते एवं फलियां शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ शरीर में उपस्थित एवं विषैले तत्वों को निकालने का काम करते हैं। भारत में सहजन का उपयोग दक्षिण भारत में अधिकता से सांभर एवं सब्जी के रूप में किया जाता है क्योंकि दक्षिण भारत में साल भर फली देने वाला सहजन के प

फिटकरी के फायदें।

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 सालों से हम सब के घरों में फिटकरी का इस्तेमाल होता आ रहा है। रसायन विज्ञान में इसे पोटैशियम एल्युमिनियम सल्फेट के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में भी फिटकरी के बहुत से औषधीय गुण बताए गए हैं। माना जाता है कि स्किन से जुड़ी समस्याओं समेत हेल्थ प्राब्लम को फिटकरी दूर करती है।   फिटकरी का इस्तेमाल करे आफ्टर शेव लोशन के रूप में। शेव करने के बाद इसे आफ्टर शेव लोशन के रूप में उपयोग करें। इसे सदियों से शेविंग उपचार के रूप में उपयोग किया जाता है, अल्म हमारी त्वचा की टोन में सुधार करता है और इसे नरम बनाता है। इसे शेविंग के कारण कट्स के मामले में खून बहने को रोकने के लिए त्वरित उपाय के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। उपयोग करने के लिए, शेव करने के बाद कुछ देर के लिए फिटकरी को रगड़ें और कुछ मिनटों के बाद ठंडे पानी से धो ले। पानी स्वच्छ करना हो या आफ्टर शेव लोशन के लिए इस्तेमाल करना हो, फिटकरी के ये उपयोग आप में से कई लोगों ने देखे और सुने होंगे। वहीं, शायद ही आपको मालूम हो की यह पारदर्शी पत्थर जैसी दिखने वाली फिटकरी स्वास्थ्य संबंधी कई मामलों में भी कारगर है। लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही

हल्दी से फेसपैक बनारही हैं तो यह जरू जानलें।

  त्वचा के लिए सोयाबीन के लाभ:- Soybean ke fayde for Skin in Hindi सोयाबीन में कई शरीर के लिए फायदेमंद तत्व जैसे की सैपोनिन्स (saponins), सीटोस्टेरॉल (sitosterol) और फेनोलिक एसिड (phenolic acid) होते हैं जो शरीर को कई प्रकार के कैंसर जैसे हृदय कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर आदि से बचाने में मदद करते हैं। इसके अलावा सोयाबीन के बीज को खाने से त्वचा का रंग साफ होता है। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए इसका हाइड्रेटेड रहना जरूरी होता है। सोयाबीन त्वचा के लिए एक मॉइस्चराइज़र का काम करती है और यह सूखी त्वचा से छुटकारा पाने के लिए भी उपयोगी है। यदि आपकी त्वचा तेलीय है, तो आप अपनी त्वचा से अतिरिक्त तेल को हटाने के लिए भी सोयाबीन का उपयोग कर सकती हैं।  शारीरिक विकास, कब्ज और कई प्रकार की बीमारियां भी दूर होती है। त्वचा के लिए हल्दी:-Benefhits of turmrik in hindi:           यदि आपको मुंहासे हैं, तो हल्दी का सेवन करने के साथ इसे मुंहासों पर भी लगाएं, इससे मुंहासों के कारण जो सूजन आई है, वो भी कम हो जाएगी और मुंहासे भी कम होंगे।  हल्दी को चन्दन और नींबू के रस में मिलाकर फ़ेस पैक बनाएं और