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मार्च 7, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जीरा (cuminum)

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 जीरा भोजन में दैनिक उपयोग में आने वाला एक रुचिकर और स्वादिष्ट मसाला है। जीरे का बहुत उपयोग होता है। जीरा भारत में सर्वत्र उत्पन्न होता है जीरे के लिए सेंद्रीय पदार्थ वाली, गहरी, भुरभुरी और अच्छी तरह है रिसनेवाली जमीन अनुकूल पड़ती है। उत्तरी गुजरात में जीरे की बुवाई अधिक मात्रा में होती है। जुजरात (उंझा) जीरे के व्यापार का मुख्य केंद्र है यहां जीरे का भारी व्यापार होता है ठंडी के मौसम में जीरे की बुवाई होती है। उसके पौधे एक डेढ़ फुट के होते हैं वे सुगंध युक्त होते हैं। त्वचा और स्वास्थ्य संबंधी 1000 प्रोडक्ट  सफेद जीरा, शाही जीरा या काला जीरा और कलौंजी जीरा तीन प्रकार का होता है तीनों प्रकार गुण में लगभग समान है सफेद जीरे का दाल, साग में भंगार (छोंक) मैं और मसाले के रूप में उपयोग होता है शाही जीरा का दवा में उपयोग होता है। ओथमी जीरा और शंखजीरा यह दो वस्तुएं जीरे से एकदम भिन्न है। ऑथमी घोड़जीरा अथवा इसबगोल कहते हैं। इसबगोल में से सत्व निकलता है, यह धातु पोस्टिक मानी जाती है। एवं कब्ज के रोगी को दूध में पिलाया जाता है। शंख जीरा वनस्पति नहीं है। जीरा शीतल है। यदि शरीर में गर्मी बढ़ गई हो

धनिया, (Coriander) बीज के फायदें और नुकसान।

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 धनिया बीज सब्जी के मसालों की महत्वपूर्ण वस्तु है रसोई में इसका रोज उपयोग होता है धनिया साग में सुगंध लाता है वर्षा ऋतु में और बीज तैयार करने के लिए ठंडी की ऋतु में इसकी बुआई होती है गहरी काली जमीन में धनिया का अच्छा उत्पाद होता है इसके पौधे एक डेढ़ फुट ऊंचे होते हैं पत्ते कटे हुए दंतीदार होते हैं, इसके फूल सफेद होते हैं घर के आंगन में गमले में धनिया को बोने से कुछ ही दिनों में वह उठ जाता है, इस प्रकार उगाने में ताजा हरा धनिया उपलब्ध हो सकता है दाल साग में डालने के लिए सभी देश में इस प्रकार हरा धनिया उगाया जा सकता है। धनिया बीज के गुण  हरा धनिया रुचिवर्धक, पित्त की गर्मी का सामक और पाचक होने से, दाल साग में बारीक काट कर डाला जाता है। दाल-साग पक जाने पर उनको चूल्हे से नीचे उतारने के बाद ही हरा धनिया डालना चाहिए। इसके पहले डाल देने से उसकी सुगंध उड़ जाती है भोजन स्वादिष्ट और सुगंधित बनता है सूखा धनिया डालने के बजाय हरा धनिया डालने से अधिक स्वादिष्ट होती हैं। किसी भी शुभ कार्य में शगुन के रूप में गुड़, धनिया बांटने का रिवाज है। देव मंदिरों में प्रसाद के रूप में पंजीरी बांटी जाती है उसमें