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मार्च 4, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सोयाबीन के फायदे और सोयाबीन के नुकसान

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 सोयाबीन एक तरह का दलहन है, जिसका उपयोग खाने और तेल निकालने के लिए किया जाता है। यह पोषक तत्वों का खजाना है, जिसके सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है। सोयाबीन को पेड़-पौधों से मिलने वाले प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत माना गया है। इसलिए, शाकाहारी लोगों को इसे अपने  आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। सोयाबीन को कई तरीकों से उपयोग में लाया जाता है जैसे इसके बीज की सब्जी बनाकर, सोयाबीन हलवा बनाकर, मिस्सी रोटी बनाकर, इसके तेल का उपयोग करके, इसके छिलके से बनी बरी का उपयोग करके, इसके अतिरिक्त सोयाबीन का  दूध भी स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। यह शरीर को एनीमिया (लाल रक्त कोशिकाओं की कमी) और ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना) नामक बीमारियों से भी दूर रखता है।  इसमें प्रोटीन और आइसोफ्लेवोंस (एक तरह का बायोएक्टिव कंपाउंड) पाए जाते हैं, जो हड्डियों को कमजोर होने से रोकते हैं। इससे जल्दी फ्रैक्चर होने का खतरा नहीं होता सोयाबीन के बीज क्रीम रंग के होते हैं। इनके सेवन से शारीरिक और मानसिक स्थिति को सुधार करने में सहायता मिलती है।  इसकी खेती सबसे पहले चीन में की गई थी, लेकिन आज पूरे एशिय

कुल्थि के फायदें। Benefits of Horse Gram in Hindi

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कुलथी या कुलत्थ का नाम सभी ने सुना होगा लेकिन इसके औषधीय फायदों के बारे में अनजान होंगे। आम तौर पर कुलथी का इस्तेमाल घरेलू नुस्खे के रूप में पथरी के इलाज के लिए किया जाता है। इसके अलावा कुलथी के और भी औषधीकारक गुण होते हैं जो दूसरे बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। चलिये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। कुलथी क्या है? (What is horse gram in Hindi?) कुलथी प्रकृति से कड़वा, मधुर, तीखा, कफवात को दूर करने वाली, पित्तकारक,, रक्तपित्तकारक, पित्त को बढ़ाने वाली, खून बढ़ाने वाले तथा अम्लपित्तकारक होती है। इसका प्रयोग सांस संबंधी समस्या, खांसी, हिक्का, पथरी, दाह, पीनस, मोटापा, बुखार, कृमि, पेट फूलना, दिल की बीमारी, सिरदर्द, वस्तिशूल यानि मूत्राशय में दर्द, मूत्राघात, अश्मरी, अर्श, गुल्म, विषप्रभाव, विबन्ध या कब्ज, उदररोग या पेट संबंधी समस्या, अरुचि तथा प्रतिश्याय की चिकित्सा में किया जाता है। कुलथी का जूस वातानुलोमक होता है। वात संबंधी रोग में कुलथी का प्रयोग फायदेमंद होता है। कुलथी मूत्रल, सूजन को कम करने वाली, बलकारक होती है। अन्य भाषाओं में कुलथी के नाम (Names of Kulthi in Different Lan

हींग के फायदे और नुकसान

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हींग (Asafoetida)  के बारे में तो आप जानते ही होंगे। हींग एक मसाला है । हींग  का उपयोग मसाले के रूप में हर घर की रसोई में होता है। दाल के छोंके में हींग से एक शानदार फ्लेवर बनाया जाता है जो दाल का स्वाद तो बढ़ाता ही है ,साथ ही दाल को सुपाच्य भी बनाता है। दाल खाने के बाद पेट में बनने वाली गैस हींग के प्रभाव से शांत होती है। यह प्रभाव लहसुन भी देता है। जो लोग लहसुन नहीं खाते उन्हें लहसुन के फायदे हींग से मिल सकते है। हींग का प्रयोग ना सिर्फ भोजन को स्वादिष्ट बनाता है बल्कि इससे कई रोगों में भी लाभ मिलता है। इसके अलावा भी हींग का उपयोग केवल रोगों को ठीक करने के लिए भी किया जाता है। हींग क्या है? (What is Hing?) हींग की कई प्रजातियाँ होती हैं। हींग का पौधा (Heeng Plant/Tree) 1.5-2.4 मीटर ऊँचा, सुंगधित और कई वर्षों तक हराभरा रहने वाला होता है। इसका तना कोमल होता है और इसमें ढेर सारी डालियों होती हैं। इसकी जड़ गोंद तथा गन्धयुक्त होती है। इसके गोंद को मार्च से अगस्त के महीने में निकाला जाता है। इसके तने और जड़ में चीरा लगाकर राल या गोंद प्राप्त किया जाता है, जिसे हींग कहते है। शुद्ध हींग (Asa