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helthi chestnut सिंघाड़े के फायदे व नुकसान।

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परिचय सिंघाड़ा क्या है? भारत के कई राज्यों में मुख्य रूप से सिंघाड़ा (Singhara) की एक अलग पहचान पाई जा सकती है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है, सिंहाड़ा, सिंघाणा, लिंग नट, डेविल पॉड, बैट नट और भैंस नट भी कहा जाता है। इसे वॉटर चेस्टनट (Water chestnut) और वाटर कालट्रॉप (Water Caltrop) भी कहते हैं। सिंघाड़ा का वानास्पतिक नाम ट्रापा नटान्स (Trapa natans) है। यह ओनाग्रेसी (Onagraceae) प्रजाति से संबंधित होता है। इसकी खेती तालाबों में की जाती है। इसके आटे का इस्तेमाल लोग उपवास में खाने के लिए भी करते हैं। इसका पौधा एक लता होती है जो पानी में पसरने वाली होती है। इसका फल तिकोने आकार का होता है। जिसके सिर पर सींगों की तरह दो कांटे होते हैं। भारत के अलावा, चीन में भी मुख्य रूप से इसका इस्तेमाल खाने में किया जाता है। इसके फल के ऊपर एक मोटी परत का छिलका होता है, जिसे हटाकर इसे खाया जा सकता है। इसके गूदे को सुखाकर और फिर उसे पीसकर उससे बनाए गए आटे का इस्तेमाल विभिन्न तरह के पकवान बनाने में किया जा सकता है। इसके आटे को गिरी का आटा भी कहा जाता है। इसकी खेती के लिए कीचड़ युक्