क्या आप अप्सरा साधना कर रहे हैं? तो यह जानकारी जरूर ले।

पिछले कुछ दिनों से यूट्यूब या अन्य वेबसाइट सोशल मीडिया पर अप्सरा साधना के बारे में अनेकों सही जानकारियां व मिथ्या जानकारियां उपलब्ध आपको कराई जा रही हैं। पिछले कुछ दिनों से मैं देख रहा हूं यूट्यूब पर इतने बकवास वीडियो आ रहे हैं अप्सरा साधना के ऊपर कि हमारे हिंदू धर्म को बदनाम किया जा रहा है, वह भी चंद रुपयों के लालच में उनको बस रुपए कमाने से मतलब है।
 उन्हें आप की साधना से कोई मतलब नहीं है, इसतरह के वीडियो आते हैं उनसे थोड़ा सा सतर्क रहें। हमारा मकसद हमेशा यही रहता है कि हमारे बहन, भाई, बंधु कहीं भी ठगी के शिकार ना हो इसलिए हमें वेबसाइट या कहीं पर भी कुछ गलत जानकारियां नजर आती हैं उनके बारे में हम हमारी यूट्यूब के चैनल के थ्रू या हमारी वेबसाइट के थ्रू हम लोगों को जानकारियां देते रहते हैं। इसलिए आपसे मैं आग्रह करता हूं कि आप हमारे चैनल को और वेबसाइट को सब्सक्राइब जरूर करके रखें ताकि कोई भी जानकारी से वंचित न रहे, कहीं भी गलत रास्ते पर जा रहे हो तो उसका समाधान और वहां से हटने के बारे में हम जानकारियां उपलब्ध कराते हैं। से आप बच सके 

  पिछले दिनों फेसबुक पर भी फ्रोडगीरी चल रही थी, उसके बारे में भी मैंने वीडियो डाला था कि उन से कैसे बचा जा सकता है।
 
पहली बात तो मैं आपको यहां उसके बारे में यह भी बता देता हूं कि यूट्यूब पर कभी भी अस्लिल वाली तस्वीरों का वीडियो या अश्लील चित्र का वीडियो यूट्यूब असेप्ट नहीं करेगा एक बार करेगा उसको तुरंत ब्लॉक कर देगा क्योंकि यह यूट्यूब की पॉलिसी में नहीं है, उसको ब्लॉक कर दिया जाएगा। फेसबुक पर भी अगर कोई कर रहा है तो हमारी भारत सरकार ने उनको बोला कि अगर आपको हमारे देश में आपका एप चलाना है तो उसमें आप एक अधिकारी रखिए जो फ्रॉड करने वाले लोगों को दूर रख सके तो आप यह तो भूल जाइए कि वह आपके अश्लीलता के चित्र या वीडियो फेसबुक या अन्य किसी भी सोशल मीडिया पर शेयर करेंगे। आपको उनसे बिल्कुल भी डरना नहीं है बात करनी है उनको यही कहना है तेरे को जो करना है कर ले मैं मेरा काम कर रहा हूं और उनका नंबर ब्लॉक कर दे। हमने पिछले पोस्ट में बताया था, उसे पडकर ऑनलाइन शिकायत कर सकते हो या आप कुछ नहीं कर सकते तो 108 पर कॉल करके आप रिपोर्ट करवा सकते हो।

अब बात आती है अप्सरा साधना की कि आपको करनी चाहिए या नहीं करनी चाहिए तो यूट्यूब पर इनकी बहुत सारी जानकारियां अच्छी भी भरी हुई है, और खराब भी भरी हुई है। मैंने एक वीडियो ऐसा भी देखा कि उसमें बताया जाता है कि अप्सराएं आप इस तरह से साधना करो और आपके साथ सेक्स करेंगी, यह कहना मिथ्या है, क्योंकि सूक्ष्म शरीर उनका है हां यह मानते हैं, अप्सरा होती हैं, और यह भी मानते है कि हवन द्वारा हम उन्हे ताकत (जो तत्व नहीं है ) देते हैं, मगर ईसका मतलब यह नहीं है कि आप उनके साथ में गलत करो या वह आपसे गलत करें। यह तो हो ही नहीं सकता दुनिया में ऐसा कोई नहीं है। जो भगवान के तेज से बनी हुई चीज को छूसके बहुत ज्ञानी हुए हैं, बड़े-बड़े आए भी और चले भी गए।
 आप ऐसा करोगे तो आपकी जिंदगी नर्क भी हो सकती है आप पागल भी हो सकते हो इसलिए मैं आप से यही अनुरोध करूंगा कि आप सात्विक साधना ही करें। हां साधना में हरसिद्धि मिलती है, और वरदान भी मिलते हैं और इससे घर में सुख शांति भी आती है। अगर आप अच्छे से साधना करोगे पैसों की कमी भी दूर होगी मगर सही ढंग से करोगे तब अन्यथा आप फंस सकते हो।
साधना करने से पहले नियमों का पालन करें।

साधना करने के लिए सबसे पहले अपने गुरु की आज्ञा ले गुरु अच्छा होना चाहिए।
 उसके बाद ध्यान कैसे करना है उसके बारे में आपको अभ्यास करना चाहिए।
आपको अपनी ऊर्जा शक्ति को एकत्रित करके ध्यान करना चाहिए।
 सबसे पहला काम आपका मन होता है मन अगर वश में नहीं है तो आपकी साधना विफल हो जाती है क्योंकि मन एक जगह कभी भी नहीं टिकता पहले अपने मन को एकत्रित कीजिए उसके बाद उसको स्थाई रूप से एक जगह टीकाइए जिस देवता की आप साधना करते हो उसके ध्यान में उसके बाद जो आपको मंत्र मिलता है उस मंत्र का जाप शुरू कीजिए और ध्यान एक ही जगह पर रहना चाहिए कहीं और नहीं जाना चाहिए। 
किसी भी परस्त्री से सम्पर्क नहीं रखे।
तामसिक भोजन ग्रहण न करें जैसे मांस, अंडा, मछली, लहसुन, प्याज आदी का सेवन जब तक साधना चल रही हो नहीं करें।
आपको साफ सफाई का बहुत ही ध्यान रखना है किसी भी तरह का गंदा नहीं रखना है।
यिद उसे एक बार भी प्रेमिका की तरह प्रेम पुजा कि तो आने मे कभी देरी नही करती है।
साधना के समय वो एक देवी मात्र ही है और आप साधक है। इनसे सदैव आदर से बात करनी चािहए। समस्त अप्सराएँ वाकसिद्ध होती है।
किसी भी साधना को सीधे ही करने नही बैठना चािहए। उससे पहले आपको अपना कुछ अभ्यास
करना चािहए। मंत्रो का उचारण कैसे करना है यह भी जान लेना चािहए और बार बार बोलकर
अभ्यास कर लेना चािहए।
ऐसा करने पर अप्सरा जरुर सिद्धं होती है। बाकी जो देवी कालिका की इच्छा क्योकी होता वही है
जो देवी जगत जननी चाहती है। साधना से किसी को नुकसान पहुँचाने पर साधना शक्ति स्वयम
ही समाप्त होने लगती है। इसिलए अपनी साधना की रक्षा करनी चािहए। किसी को अपनी शक्ति
का प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं है। यहाँ कोई किसी के काम नहीं आता है लेकिन फिर भी कभी
कभार किसी ना किसी बहुत ही जरुरत मन्दो की सहायता करी जा सकती है। वैसे यह
साधना साधक का ही ज्यादा भला करने वाली हैं।

 अब आप साधना के लिए अगर सक्षम है साधना शुरू कर रहे हैं तो आपको यह भी पक्का करना है कि मेरे सामने अचानक कोई आया तो मैं डरु नहीं अगर आप में यह सामर्थय है तो आप साधना के लिए तैयार हो अन्यथा आप साधना करें ही नहीं।
प्रकृति का नियम है की जल्दी कोई चीज नहीं मिलती उसके लिए बहुत कठिन कार्य करने पड़ते हैं आप जिस देवता की साधना कर रहे हैं या तो वह आपकी परीक्षा लेगा या उसकी जगह कोई और भी ले सकता है।
 उसके बचने के लिए आपको गुरु चाहिए अगर वहां से बचा लिया तो वह देवता आपकी परीक्षा भी ले सकता है किसी भी रूप में आपके सामने आ सकता है। यह सारी अलग-अलग देवताओं की अलग-अलग पहचान है जो अच्छा गुरु होता है उसके पास ईन बातों का ज्ञान होता है उनसे पहले ज्ञान प्राप्त करें सारी विधि की जानकारियां एकत्रित करें उसके बाद ही आप साधना में बैठे।

अप्सराएं केसी होती है? उन्हे क्या पसंद है?
 माना जाता है कि अप्सराएं गुलाब, चमेली, रजनीगंधा, हरसिंगार और रातरानी की गंध पसंद करती है। वे बहुत सुंदर होती हैं, इस पृथ्वी पर इतनी सुंदर स्त्री देखने को नहीं मिलती और लगभग 16-17 वर्ष की उम्र समान दिखाई देती है। अप्सरा साधना के दौरान साधक को अपनी यौन भावनाओं पर संयम रखना होता है अन्यथा साधना नष्ट हो सकती है। संकल्प और मंत्र के साथ जब साधना संपन्न होती है तो अप्सरा प्रकट होती है तब साधक उसे गुलाब के साथ ही इत्र भेंट करता है। उसे फिर दूध से बनी मिठाई, पान आदि भेंट दिया जाता है और फिर उससे जीवन भर साथ रहने का वचन लिया जाता है। ये चमत्कारिक शक्तियों से संपन्न अप्सरा आपकी जिंदगी को सुंदर बनाने की क्षमता रखती है।

कितनी हैं अप्सराएं
शास्त्रों के अनुसार देवराज इन्द्र के स्वर्ग में 11 अप्सराएं प्रमुख सेविका थीं। ये 11 अप्सराएं हैं- कृतस्थली, पुंजिकस्थला, मेनका, रम्भा, प्रम्लोचा, अनुम्लोचा, घृताची, वर्चा, उर्वशी, पूर्वचित्ति और तिलोत्तमा। इन सभी अप्सराओं की प्रधान अप्सरा रम्भा थी।

अलग-अलग मान्यताओं में अप्सराओं की संख्या 108 से लेकर 1008 तक बताई गई है। कुछ नाम- अम्बिका, अलम्वुषा, अनावद्या, अनुचना, अरुणा, असिता, बुदबुदा, चन्द्रज्योत्सना, देवी, घृताची, गुनमुख्या, गुनुवरा, हर्षा, इन्द्रलक्ष्मी, काम्या, कर्णिका, केशिनी, क्षेमा, लता, लक्ष्मना, मनोरमा, मारिची, मिश्रास्थला, मृगाक्षी, नाभिदर्शना, पूर्वचिट्टी, पुष्पदेहा, रक्षिता, ऋतुशला, साहजन्या, समीची, सौरभेदी, शारद्वती, शुचिका, सोमी, सुवाहु, सुगंधा, सुप्रिया, सुरजा, सुरसा, सुराता, उमलोचा, रत्नमाला आदि।

अप्सरा साधना विधि

साधना जीवन मे एक बार सिद्ध करने की पुरी कोशिश करनी चाहिए क्योंकि कलियुग में जो भी कुछ चाहिए वो सब इस प्रकार की साधना से सहज ही प्राप्त किया जा सकता हैं। इन साधनाओं की अच्छी बात यह हैं कि इन साधनाओं को साधारण व्यक्ति भी कर सकता हैं मतलब उसको को पंडित तांत्रिक बनाने की कोई अवश्यकता नहीं हैं।       

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साधक स्नान कर ले अगर नही भी कर सको तो हाथ-मुहँ अच्छी तरह धौकर, धुले वस्त्र पहनकर, रात मे ठीक 10 बजे के बाद साधना शुरु करें। रोज़ दिन मे एक बार स्नान करना जरुरी है।

मंत्र जाप मे कम्बल का आसन रखे और अप्सरा और स्त्री के प्रति सम्मान आदर होना चाहिए। अप्सरा , गुरु, धार्मिक ग्रंथो और विधि मे पुर्ण विश्वास होना चाहिए, नहीं तो सफल होना मुश्किल हैं। अविश्वास का साधना मे कोई स्थान नही है। साधना का समय एक ही रखने की कोशिश करनी चाहिए।

सबसे पहले बैठे ही दिशा बंधन कर लें हाथ में काले तिल ले कर नीचे लिखा मंत्र पढ कर चारों तरफ फैला दें।

ॐअपसर्पन्तु ते भूता ये भूता भूलते स्थिरता:।
ये भूता विघ्नकर्तारस्ते नश्यन्तु शिवाज्ञया।।

एक स्टील की प्लेट मे सारी सामग्री रख ले। साधना करते समय और मंत्र जप करते समय जमीन को स्पर्श नही करते। माला को लाल या किसी अन्य रंग के कपडे से ढककर ही मंत्र जप करे या गौमुखी खरीद ले।

मंत्र जप को अगुँठा और माध्यमा से ही करे । मंत्र जपते समय माला मे जो अलग से एक दान लगा होता हैं उसको लांघना नहीं है मतलब जम्प नहीं करना हैं। जब दुसरी माला शुरु हो तो माला के आखिए दाने/मनके को पहला दाना मानकर जप करें, इसके लिए आपको माला को अंत मे पलटना होगा। इस क्रिया का बैठकर पहले से अभ्यास कर लें।

पूजा सामग्री
अप्सरा माला व गुटका यंत्र ,सिन्दुर, चावल, गुलाब पुष्प, चौकी, नैवैध, पीला आसन, धोती या कुर्ता पेजामा, इत्र, जल पात्र मे जल, चम्मच, एक स्टील की थाली, मोली/कलावा, अगरबत्ती,एक साफ कपडा बीच बीच मे हाथ पोछने के लिए, देशी घी का दीपक, (चन्दन, केशर, कुम्कुम, अष्टगन्ध यह सभी तिलक के लिए))

विधि
पूजन के लिए स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ-सुथरे आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके बैठ जाएं। पूजन सामग्री अपने पास रख लें।

बायें हाथ मे जल लेकर, उसे दाहिने हाथ से ढ़क लें। मंत्रोच्चारण के साथ जल को सिर, शरीर और पूजन सामग्री पर छिड़क लें या पुष्प से अपने को जल से छिडके।

*ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।।

(निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए शिखा/चोटी को गांठ लगाये / स्पर्श करे)

*ॐ चिद्रूपिणि महामाये! दिव्यतेजःसमन्विते। तिष्ठ देवि! शिखामध्ये तेजोवृद्धिं कुरुष्व मे॥

(अपने माथे पर कुंकुम या चन्दन का तिलक करें)

*ॐ चन्दनस्य महत्पुण्यं, पवित्रं पापनाशनम्। आपदां हरते नित्यं, लक्ष्मीस्तिष्ठति सर्वदा॥

(अपने सीधे हाथ से आसन का कोना जल/कुम्कुम थोडा डाल दे) और कहे

ॐ पृथ्वी! त्वया धृता लोका देवि! त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि! पवित्रं कुरु चासनम्॥
संकल्प
दाहिने हाथ मे जल, चावल ले।

मैं ……..अमुक……… गोत्र मे जन्मा,………………. यहाँ आपके पिता का नाम………. ……… का पुत्र ………………………..यहाँ आपका नाम…………………, निवासी…………………..आपका पता………………………. आज सभी देवी-देव्ताओं को साक्षी मानते हुए देवी (अमुक) अप्सरा की पुजा, गण्पति और गुरु जी की पुजा देवी अप्सरा के साक्षात दर्शन की अभिलाषा या प्रेमिका रुप मे प्राप्ति के लिए कर रहा हूँ जिससे अप्सरा प्रसन्न होकर दर्शन दे और मेरी आज्ञा का पालन करती रहें साथ ही साथ मुझे प्रेम, धन धान्य और सुख प्रदान करें।

जल और सामग्री को छोड़ दे।

गुरु, गणपति का पूजन करें।

ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात पर ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

ॐ श्री गुरु चरणकमलेभ्यो नमः। ॐ श्री गुरवे नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि।

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्रयंबके गौरी नारायणि नमोअस्तुते

गणेश मंत्र

ऊँ गणपत्ये नमः 5 माला 

शिव मंत्र

ऊँ नमः शिवाय 5 माला 

गुरू का मंत्र 

ऊँ ह्रीं गुरूवे नमः 5 माला जाप करें 

अब अप्सरा आवाहन ध्यान द्वारा करें और सोचे की वो आपके सामने हैं।

दोनो हाथो को मिलाकर और फैलाकर ।

अप्सरा मंत्र बोले 

“ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं श्रीं (अमुक) अप्सरा आगच्छ आगच्छ स्वाहा” 

मंत्र का 21 बार उचारण करते हुए एक एक गुलाब गुटका या यंत्र जो थाली में है चढाते जाये। अब सोचो कि अप्सरा आ चुकी हैं।

हे सुन्दरी! तुम तीनो लोकों को मोहने वाली हो। तुम्हारी देह गोरे गोरे रंग के कारण अतयंत चमकती हुई हैं। तुमनें अनेको अनोखे गहने पहने हुये और बहुत ही सुन्दर वस्त्र को पहना हुआ हैं। आप जैसी सुन्दरी कोई नहीं, अपने साधक की समस्त मनोकामना को पुरी करने मे जरा सी भी देरी नही करती। ऐसी विचित्र सुन्दरी अमुक अप्सरा (जिस अप्सरा की साधना कर रहे हो उसका नाम ले) को मेरा कोटि कोटि प्रणाम। इन गुलाबो के सभी गन्ध से तिलक करे। और स्वयँ को भी तिलक कर लें। 

मोली/कलवा चढाये

वस्त्रम् समर्पयामि ॐ (अमुक) अप्सरायै नमः

गुलाब का इत्र चढाये : गन्धम समर्पयामि ॐ (अमुक) अप्सरायै नमः

फिर चावल (बिना टुटे) : अक्षतान् समर्पयामि ॐ (अमुक) अप्सरायै नमः

पुष्प : पुष्पाणि समर्पयामि ॐ (अमुक) अप्सरायै नमः

अगरबत्ती : धूपम् आघ्रापयामि ॐ (अमुक) अप्सरायै नमः

दीपक (देशी घी का) : दीपकं दर्शयामि ॐ (अमुक) अप्सरायै नमः

मिठाई से पुजा करें।: नैवेद्यं निवेदयामि ॐ (अमुक) अप्सरायै नमः

फिर पुजा सामप्त होने पर सभी मिठाई को स्वयँ ही ग्रहण कर लें।

पहले एक मीठा पान (पान, इलायची, लोंग, गुलकन्द का) अप्सरा को अर्प्ति करे और स्वयँ खाये। इस मंत्र की स्फाटिक की माला से 51 माला जपे और ऐसा 21 दिन करना हैं।

 अप्सरा मंत्र

यहाँ देवी को मंत्र जप समर्पित कर दें। क्षमा याचना कर सकते हैं। जप के बाद मे यह माला को पुजा स्थान पर ही रख दे। मंत्र जाप के बाद आसन पर ही पाँच मिनट आराम करें। 

अंतिम दिन जब अप्सरा दर्शन दे तो फिर मिठाई इत्र आदि अर्पित करे और प्रसन्न होने पर अपने मन के अनुसार वचन लेने की कोशिश कर सकते हैं।

पुजा के अंत मे एक चम्मच जल आसन के नीचे जरुर डाल दें और आसन को प्रणाम कर ही उठें।  

॥ ॐ तत्सत ॥
होम
या तो आप रोज हवन करें अन्यथा लास्ट दिन हवन जरूर करें। हवन करने से हम जिस देवता की आराधना कर रहे हैं उसे शक्ति मिलती हैं, अगर हमारा देवता शक्तिहीन है तो हम उसे होम (यज्ञ) के द्वारा शक्ति प्रदान करते हैं, ताकि हमें वह शक्तियां प्रदान कर सके और दर्शन वर्दान दे सके।

निम्न मंत्र पढ़ते हुए तीन बार आचमन करें
 ॐ केशवाय नमः 
ॐ नारायणाय नमः 
ॐ माघवाय नमः 
फिर यह मंत्र बोलते हुए हाथ धो लें 
ॐ ऋषिकेशाय नमः 
अग्नि स्थापना 
अग्नि प्रज्वलित करके अग्नि देव को प्रणाम करें 
ॐ पावकान्गये नमः।
 इसके बाद 
ॐ गं गणपतये स्वाहा। तीन आहुतियां दें।
ॐ सूर्यादि नवग्रहेभ्यों देवेंभ्यो स्वाहा। एक आहुतियां दें।
(यहां आप अपने कुलदेवता, गुरु, इष्ट देवता आदि की 3 आहुतियां दे सकते हैं जैसे:-

ॐ गुरुवे नमः स्वाहा

ॐ श्री इष्ट दैवतायै नमः स्वाहा

ॐ श्री कुल दैवतायै नमः स्वाहा

ॐ सर्वभ्यो पित्रभ्यो नमः स्वा

ॐ ग्राम देवतभ्यो नमः स्वाहा

ॐ स्थान देवतभ्यो नमः स्वा

ॐ सर्वभ्यो लोकपालभ्योनमः स्वाहा

ॐ सर्वभ्यो दिक्पालभ्यो नमः स्वाहा

ॐ नव ग्रहाये नमः स्वा

ॐ _श्री शची पुरन्धरभ्यो नमः स्वा

ॐ श्री लक्ष्मी नारायणभ्यो नमः स्वाहा

ॐ श्री उमा महेश्वरभ्यो नमः स्वा

ॐ श्री वाणी हिरण्यगर्भभ्यो नम स्वाहा

ॐ श्री मातृपितृचरण कमलभ्यो नमः स्वा

ॐ सर्वभ्यो देवतभ्यो नमः स्वाहा

ॐ सर्वभ्यो ब्राह्मणभ्यो नमः स्वा

ॐ रिद्धि सिद्धि सहिताय श्री मन महागणपतये नमः स्वाहा)


 मूल मंत्र से दसवां भाग की आहुति देनी है जैसे पिछले पोस्ट में मैंने बताया उसे देख लीजिए।

ॐ अग्नये स्विष्टकृते स्वाहा, इदं अग्नये स्विष्टकृते न मम यह मंत्र बोलते हुए सामग्री को एकत्रित कर ले।
तिन बार में होमदे। पूर्णाहुति के लिए थोड़ी सामग्री बाकी रखें।
ॐ श्रीपतये स्वाहा
ॐ भुवनपतये स्वाहा
ॐ भूतानांपतये स्वाहा

 पूर्णाहुति
 एक व्यक्ति हाथ में नारियल कटोरी ले ले व अन्य सभी लोग नारियल कटोरी का स्पर्श कर ले बची हूई हवन सामग्री और घी की आहुति डालते रहे
 निम्न मंत्र उच्चारण करते हुए नारियल कटोरी के ऊपर घी की धारा करें।
ॐ पूर्णमद: पूर्णमीदं पूर्णात पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।।
ॐ शांति: शांति: शांति:
 तर्पण
एक पात्र में जल में गंगा जल मिलाकर गुलाब के फूल से (आहूती का दसवां भाग) जल लेकर पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोमूत्र, गाय का गोबर) की कटोरी में ॐ अमूक अप्सरा तर्पयामि नमः मंत्र बोलकर छोड़ते जाएं।

मार्जन
 1 दूध, दही, घी, गोमूत्र, सहद, कपूर, गंगाजल या पंचगव्य वाली सामग्री में बाकी सामग्री मिक्स कर काम में ले सकते हैं।
 (तर्पण का दसवां भाग) बूंद लेकर मन्त्र बोलते हूए अपने आज्ञा चक्र पर छूना है।
"ॐ अमूक अप्सरा मार्जयामि नमः"
2 एक पात्र में गंगाजल अथवा जल जिसमे पुष्प एवं सुगन्धादि का मिश्रण हो, एक हाथ में कुश घास लेकर उसे उस जल में डुबोकर मंत्र बोलते हुए “ॐ अमूक अप्सरा मार्जयामि नमः" कुश से यंत्र अथवा चित्र पर जल छिड़कें तत्पश्चात पुनः मंत्र उच्चार करते हुए पुनः जल छिड़कें।

 यह साधना गूरू के बिना नहीं करनी चाहिए अगर आपके पास गूरू नहीं है तो शिव भगवान या हनुमान जी को गुरु मानकर आप अपनी साधना संपूर्ण रूप से कर सकते हैं मुझे गुरु न समझे और ना ही मुझे गुरु बनाने की कोशिश करें, मैं सिर्फ आपको जानकारियां उपलब्ध करवाता हूं।

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