घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए करें यज्ञ (हवन)।

 हवन करना शास्त्रों में बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। भारतीय परम्पराओ में हवन अथवा यज्ञ को बहुत महत्व बताया गया है। दशांश हवन प्रत्येक मंत्रो को सिद्ध करने के बाद किया जाता है। जिसके अंतर्गत मन्त्र जप का दसवा हिस्सा आहुतियों के माद्यम से सिद्ध किया जाता है। मान लीजिये हमने 125000 जप किये है तो हमें कुल के दसवां भाग 12500 जप का हवन करना होता है। इसको समझने के लिए हम तालिका का प्रयोग करेंगे

जप संख्या कर्म विधान

 उपरोक्त दी गई तालिका के माद्यम से हम समझ सकते है कि सपूर्ण दशांश हवन कैसे किया जाये। यदि किसी कारणवश तर्पण ,मार्जन या कन्या भोज में असमर्थ है तो आप उससे दुगना जप करके भी सिद्ध मान सकते है। लेकिन कुछ मतानुसार हवन कर्म करने से देवताओ को शक्ति मिलती है अर्थात मंत्र हवन से अधिक लाभ मिलता है।

     हवन से पहेले हमें सामग्री की आवश्यकता पड़ेगी। सर्वप्रथम सामग्री पर विचार कर लेते है :

कुण्ड

 कुण्ड अगर हम जमीन पर बना रहे है तो अति उत्तम माना जाता है। अगर किसी कारण से जमीन पर नहीं बनाया जा सके तो आप किसी भी पात्र का चयन कर सकते है। 12500 आहुतियों के लिए लगभग 2X2 कि लम्बाई चोड़ाई होना चाहिए तथा गहराइ 1.6 इंच लगभग होना चाहिए।\

. आसन

 कुश का आसन हो तो बहुत ही अच्छा है अन्यथा आप कोई भी ऊनि आसन का प्रयोग कर सकते है।

जलपात्र

 आपको ताम्बे का लोटा तथा एक बड़ा पात्र जिसमे 1-2 लीटर पानी आ जाये तर्पण ,मार्जन के लिए आवश्यकता पड़ेगी।

हवन लकड़ी/समिधा

अधिकांशतः आम की लकड़ी का प्रयोग किया जाता है क्योंकि यह आसानी से उपलब्द हो जाती है। शास्त्रों में अन्य लकड़ियों को भी विवरण मिलता है। गृह शांति के लिए गृह अनुसार भी लकड़ी प्रयोग में लाई जाती है। सूर्य: मदार, चन्द्र: पलाश, मंगल : खैर, बुध: चिड़चिड, बृहस्पति: पीपल, शुक्र: गूलर, शनि: शमी, राहु: दूर्वा केतु: कुशा की लकड़ी उपयोगी है।

नारियल गोला/बाटकी

पूर्ण आहुति के लिए नारियल की बाटकी की आवश्यकता पड़ेगी।

हविष्य या आहुति सामग्री

सर्वप्रथम हमें घी लेकर आ जाये। अलग अलग प्रकार के हवन में अलग अलग सामग्री उपयोग में लाई जाती है। सामान्यतः पांच तरह की सामग्री मिलाकर पंचांग धुप बना सकते है : 100 ग्राम तिल ,80 ग्राम मिश्री ,50 ग्राम जों , 25 ग्राम चावल, 25 ग्राम नारियल बुरा। आप मार्केट से भी सामग्री ला सकते है। लक्ष्मी जी के दशांश हवन के लिए आप सिर्फ कमलगट्टे और घी से भी आहुतियाँ दे सकते है।

 सामान्य पंचोपचार पूजन सामग्री। नवग्रह लकड़ी, कपूर,शक्कर,फल ,मेवा आदि।

हवन विधि

सबसे पहले पवित्रीकरण

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वा गतोअपी वा

य: स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यांतर: शुचि: |

इसके बाद पंचपात्र से जल लेकर निम्न मंत्र बोलते हुए जल पिए ।

ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा |

ॐ अमृतापिधानीमसि स्वाहा |

ॐ सत्यं यश: श्रीर्मयि श्री:श्रयतां स्वाहा |

अब निम्न मंत्र बोलकर हाथ धो ले

 ॐ नारायणाय नमः। 

       अब शिखा पर हाथ रखकर मस्तिष्क में स्तिथ चिदरूपिणी महामाया दिव्य तेजस शक्ति का ध्यान करें जिससे साधना में प्रवृत्त होने हेतु आवश्यक उर्जा प्राप्त हों सके—

चिदरूपिणि महामाये दिव्यतेज: समन्वितः |

तिष्ठ देवि ! शिखामध्ये तेजोवृद्धिं कुरुष्व मे | |

अब अपने आसन का पूजन करें जल, कुंकुम, अक्षत से।

ॐ ह्रीं क्लीं आधारशक्तयै कमलासनाय नमः |

ॐ पृथ्वी ! त्वया धृतालोका देवि ! त्वं विष्णुना धृता

त्वं च धारय माँ देवि ! पवित्रं कुरु चासनम |

ॐ आधारशक्तये नमः, ॐ कूर्मासनाय नमः, ॐ अनंतासनाय नमः |

अब दिग्बन्ध करें यानि दसों दिशाओं का बंधन करना है,

जिससे कि आपका मन्त्र सही देव तक पहुँच सके,

अतः इसके लिए मंत्र बोलते हुए चावल या जल अपने चारों ओर छिडकना है और बांई एड़ी से भूमि पर तीन बार आघात करना है।

ॐअपसर्पन्तु ते भूता ये भूता भूलते स्थिरता:।

ये भूता विघ्नकर्तारस्ते नश्यन्तु शिवाज्ञया।।

अब भूमि शुद्धि करना है जिसमें अपना दायाँ हाथ भूमि पर रखकर मन्त्र बोलना है।

ॐ भूरसि भूमिरस्यदितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्यधर्त्रीं |

पृथ्वी यच्छ पृथ्वीं दृ (गुं) ह पृथ्वीं मा ही (गूं) सी:

दीप पूजन

दीपक जला लें |

दीपो ज्योति: परं ब्रम्ह दीपो ज्योति: जनार्दन: |

दीपो हरतु में पापं दीपज्योति: नमोऽस्तु ते ||

कलश पूजन

हाथ में अक्षत-पुष्प लेकर कलश में ‘ॐ’ वं वरुणाय नम:’ कहते हुए वरुण देवता का तथा निम्न श्लोक पढ़ते हुए तीर्थों का आवाहन करेंगे।

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति |

नर्मदे सिंधु कावेरी जलेऽस्मिन सन्निधिं कुरु ||

(अक्षत –पुष्प कलश के सामने चढ़ा दें | )

कलश को तिलक करें | पुष्प, बिल्वपत्र व दूर्वा चढायें | धुप व दीप दिखायें | प्रसाद चढायें |

अब ललाट पर चन्दन, कुंकुम या भस्म का तिलक धारण करे।

कान्तिं लक्ष्मीं धृतिं सौख्यं सौभाग्यमतुलमं मम

ददातु चन्दनं नित्यं सततं धारयाम्याहम ||

संकल्प

मैं ……..अमुक……… गोत्र मे जन्मा,………………. यहाँ आपके पिता का नाम………. ……… का पुत्र………………………..यहाँ आपका नाम…………………, निवासी…………………..आपका पता………………………. आज सभी देवी-देव्ताओं को साक्षी मानते हुए गणपति ,गुरु जी की पूजा ,……….. का दशांश हवन कर रहा हूँ , स्वीकार करना और साधना में सफलता दिलाना।।

जल पृथ्वी पर छोड़ दे।

   तत्पश्चात गुरुपूजन करें।

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरा

गुरु ही साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः

अब आवाहन करे।

ॐ स्वरुपनिरूपण हेतवे श्री गुरवे नमः,

 ॐ स्वच्छप्रकाश-विमर्श-हेतवे श्रीपरमगुरवे नमः |

 ॐ स्वात्माराम् पञ्जरविलीन तेजसे पार्मेष्ठी गुरुवे नमः |

अब गुरुदेव का पंचोपचार पूजन संपन्न करें।

अब गणेश पूजन करें 

हाथ में जल अक्षत कुंकुम फूल लेकर

(गणेश विग्रह या जो भी है गनेश के प्रतीक रूप में) सामने प्रार्थना करें।

ॐ गणानां त्वां गणपति (गूं) हवामहे

 प्रियाणां त्वां प्रियपति (गूं) हवामहे

 निधिनाम त्वां निधिपति (गूं) हवामहे वसो मम |

आहमजानि गर्भधमा त्वामजासी गर्भधम |

ॐ गं गणपतये नमः ध्यानं समर्पयामी |

आवाहन

हेरम्ब! त्वमेह्येही अम्बिकात्रियम्बकत्मज |

सिद्धि बुद्धिपते त्र्यक्ष लक्ष्यलाभपितु: पितु:

ॐ गं गणपतये नमः आवाहयामि स्थापयामि नमः पूजयामि नमः |

गणपतिजी के विग्रह के अभाव में एक गोल सुपारी में कलावा

लपेटकर पात्र मे रखकर उनका पूजन भी कर सकते है।

अब क्षमा प्रार्थना करें।

विनायक वरं देहि महात्मन मोदकप्रिय |

निर्विघ्न कुरु मे देव सर्व कार्येशु सर्वदा ||

विशेषअर्ध्य

एक पात्र में जल चन्दन, अक्षत कुंकुम दूर्वा आदि लेकर अर्ध्य समर्पित करें।

निर्विघ्नंमस्तु निर्विघ्नंस्तू निर्विघ्नंमस्तु | ॐ तत् सद् ब्रह्मार्पणमस्तु |

अनेन कृतेन पूजनेन सिद्धिबुद्धिसहित: श्री गणाधिपति: प्रियान्तां ||

अब माँ का पूजन करें।

माँ आदि शक्ति के भी अनेक ध्यान हैं जो प्रचलित है:

सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके |

शरण्ये त्रयाम्बिके गौरी नारायणी नमोस्तुते ||

अब भैरव पूजन करें।

ॐ यो भूतानामधिपतिर्यास्मिन लोका अधिश्रिता: |

यऽईशे महाते महांस्तेन गृह्णामी त्वामहम ||

ॐ तीक्ष्णदंष्ट्र महाकाय कल्पांतदहनोपम् |

भैरवाय नमस्तुभ्यंनुज्ञां दातुर्महसि ||

ॐ भं भैरवाय नमः |

अग्नि स्थापन : अग्नि प्रज्वलित करके अग्निदेव को प्रणाम करें।

ॐ पावकान्गयें नम: |

अब घी से अहुतिया देते हुए एक बूंद जल में छोड़ते जायेंगे:

ॐ ब्रम्हणे स्वाह । इदं ब्रम्हणे नमम ।।

ॐ प्रजापतये स्वाह। इदं प्रजापतये नमम।।

ॐ इन्द्राये स्वाह । इदं इन्द्राये नमम ।।

ॐ अग्नेय स्वाह । इदं अग्नेय नमम।।

ॐ अनुमतये स्वाह । इदं अनुमतये नमम।।

ॐ कश्पाये स्वाह। इदं कश्पाये नमम।

ॐ विश्वेभ्यो देवोभ्यो स्वाह। इदं विश्वेभ्यो देवोभ्यो नमम।

ॐ सर्वोभ्यो देवोभ्यो स्वाह । इदं सर्वोभ्यो देवोभ्यो नमम।

ॐ अश्वनीकुमाराभ्याम स्वाह । इदं अश्वनीकुमाराभ्याम नमम।

अब हम हंस मुद्रा से 3-3 आहुति निम्न मंत्र की देंगे।

ॐ रिद्धि सिद्धि सहिताय श्रीमन महा गणाधिपतये नमः स्वाहा

ॐ गुरुवे नमः स्वाहा

ॐ श्री इष्ट दैवतायै नमः स्वाहा

ॐ श्री कुल दैवतायै नमः स्वाहा

ॐ सर्वभ्यो पित्रभ्यो नमः स्वा

ॐ ग्राम देवतभ्यो नमः स्वाहा

ॐ स्थान देवतभ्यो नमः स्वा

ॐ सर्वभ्यो लोकपालभ्योनमः स्वाहा

ॐ सर्वभ्यो दिक्पालभ्यो नमः स्वाहा

ॐ नव ग्रहाये नमः स्वा

ॐ _श्री शची पुरन्धरभ्यो नमः स्वा

ॐ श्री लक्ष्मी नारायणभ्यो नमः स्वाहा

ॐ श्री उमा महेश्वरभ्यो नमः स्वा

ॐ श्री वाणी हिरण्यगर्भभ्यो नम स्वाहा

ॐ श्री मातृपितृचरण कमलभ्यो नमः स्वा

ॐ सर्वभ्यो देवतभ्यो नमः स्वाहा

ॐ सर्वभ्यो ब्राह्मणभ्यो नमः स्वा

ॐ रिद्धि सिद्धि सहिताय श्री मन महागणपतये नमः स्वाहा

अब हम मूल मंत्र की संकल्पित संख्या में आहुतिय दाहिने हाथ से देंगे तथा बाए हाथ से माला जप करेंगे: मंत्र की पीछे स्वाह लगाना है जैसे : “ह्रीं “ मंत्र का जप किया है तो “ ह्रीं स्वाह

स्विष्टकृत होम

जाने-अनजाने में हवन करते समय जो भी गलती हो गयी हो, उसके प्रायश्चित के रूप में गुड़ व घृत की आहुति दें |

ॐ अग्नये स्विष्टकृते स्वाहा, इदं अग्नये स्विष्टकृते न मम |

बची हुई हवन सामग्री को निम्न मंत्र बोलते हुए तीन बार में होम दें | 

(१) ॐ श्रीपतये स्वाहा |

(२) ॐ भुवनपतये स्वाहा |

(३) ॐ भूतानां पतये स्वाहा |

पूर्णाहुति होम

हाथ में नारियल का गोला ले अग्नि में रख दे, निम्न मंत्र उच्चारण करते हुए नारियल के ऊपर घी की धार लगाये |

ॐ पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात पूर्णमुदच्यते | पूर्णस्य पूर्णमादाय पुर्न्मेवावशिष्यते ||

ॐ शांति: शांति: शांति: | 

 तर्पण

अब हम तर्पण करेंगे जिसके अंतर्गत कुल हवन का दसवां भाग होगा, जल पात्र ले जिसमे 1-2 लीटर पानी हो । उस पात्र में जल भरकर थोड़ा गंगाजल मिला लें और तत्पश्चात थोड़ा शहद-घी-गुड-केशर-गौदुग्ध -पुष्पादि मिलाकर दाहिने हाथ की अंजलि में जल भरकर पुनः उसी पात्र में छोड़ दें और बाएं हाथ से माला जप का प्रयोग करें।

मंत्र में हम स्वाह के स्थान पर तर्पयामि उछारण करेंगे। जैसे “ह्रीं तर्पयामि” का उच्चारण करते हुए जल को दायें हाथ की अंजुली में भरकर पुनः उसी पात्र में गिरा दें और बाएं हाथ से माला पर मन्त्र जपते और दायें हाथ से जल भरते-गिराते रहेगे।

मार्जन

तर्पण कर्म पूरा होने के बाद हमें तर्पण जप का दसवा हिस्सा मार्जन करना होता है जिसमे हमें एक पात्र में गंगाजल अथवा जल जिसमे पुष्प एवं सुगन्धादि का मिश्रण हो, एक हाथ में कुश घास लेकर उसे उस जल में डुबोकर बाएं हाथ में माला लेकर मंत्र बोलते हुए “ह्रीं मार्जयामि” कुश से जल यंत्र अथवा इष्ट के चित्र पर जल छिड़कें तत्पश्चात पुनः मंत्र उच्चार करते हुए पुनः जल छिड़कें।

सभी कार्य होने के बाद अपने आसन के निचे 3 बार शक्राय नमः बोलकर 3 बार जल छोड़ना है और उस जल से तिलक लगाये। अब कुण्ड के इशान कोण से भष्म का तिलक लगाये।

भस्मधारणम

 यज्ञकुंड से स्त्रुवा (जिससे घी की आहुति दी जा रही थी ) में भस्म लेकर पहले बापूजी को तिलक करें, फिर सभी लोग स्वयं को तिलक करें |

प्रदिक्षणा

हवनकुंड की 5 परिक्रमा करें | 

यानि कानि च पापानि जन्मान्तर कृतानि च |

तानि सर्वाणि नश्चन्तु प्रदक्षिण: पदे पदे ||

दुर्जन : सज्जनों भूयात सज्जन: शंतिमाप्नुयात |

शांतो मुच्येत बंधभ्यो मुक्त: चान्यान विमोचयेत ||

क्षमा प्रार्थना

पूजन, जप, हवन आदि में जो गलतियाँ हो गयी हों , उनके लिए हाथ जोड़कर सभी लोग क्षमा प्रार्थना करें |

ॐ आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम |

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर ||

ॐ मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर |

यत्पूजितं माया देवं परिपूर्ण तदस्तु में ||

विसर्जनम

थोड़े-से अक्षत लेकर देव स्थापन और हवन कुंड में निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करते हुए चढायें – 

ॐ गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ स्वस्थाने परमेश्वर |

यत्र ब्रम्हादयो देवा: तत्र गच्छ हुताशन ||

अब हमें 12 कन्या या ब्राम्हणों को भोजन करवाना चाहिए. अगर सामर्थ्य न हो तो हम मिठाई भी बाँट सकते है।

हवन कार्य सपूर्ण होता है। आप सभी किसी भी मंत्र को सिद्ध करने के लिए इस विधि का उपयोग कर सकते है, बहुत ही सरल हवन विधि है आप इसके माध्यम से नित्य हवन भी कर सकते है. आशा करते है आपको हमारी यह विधि पसंद आएगी। धन्यवाद आपका दिन मंगलमय हो।

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