वर्तमान की सोच आगे का भविष्य। जानिए कैसे ?

हम हमारी जिंदगी का सफर करते-करते अनजाने में बहुत सारी गलतियां करते रहते हैं। आज मैं उन्हीं गलतियों का थोड़ा सा आपको संकेत दूंगा, आप थोड़ा सा अपने सफर पर ध्यान देंगे तो कुछ कठिनाइयों से बच सकते हैं। थोड़ा सा आप सोचेंगे तो आपको यह भी समझ में आएगा कि यह संसार और यह शरीर यह दोनों हमारे नहीं है, यहां पर किसी भी चीज पर हमारा हक है, हमेशा के लिए स्थिर नहीं है; इसलिए किसी भी चीज पर आत्मिक मोहर करना उसको आत्मा से अपनी मानना यह सिर्फ एक सोच और मन को शांत करने वाली बात है। बाकी यहां पर ना तो किसी का हुआ है ना कभी किसी का होगा हा जबतक हमारे शरीर में प्राण है जब तक हमें सुविधाए चाहिए जिसको पाने के लिए अच्छे कर्म करना अति आवश्यक हैं। आप आज के समय में अपने ही गांव में देखिए 100 साल पहले जो लोग सोचते थे कि यह मेरा है, यह जमीन मेरी है या आप उनकी कहानियों को सुनते होंगे, अन्य तरह के किस्से सुनते होंगे या और कहीं से भी आप देखते होंगे मगर आज वह लोग इस धरती पर नहीं है उनके शरीर का अस्तित्व यहां से खत्म हो चुका है। मैं इस छोटी सी बात को समझाना चाह रहा था आपके समझ में आ गई होगी। ठीक इसी तरह से एक गलती और करते रहते हैं; हमारी जिंदगी में जो हमारे मस्तिष्क से जुड़ी होती है जिसको विजुअलाइजेशन भी बोला जाता हैं (मन से सोच कर माइंड से वह काम करने कि ठान लेना) बस इसी पर विचार विमर्श और यह भी हमारा एक कर्म ही है।

बगैर सोचे समझे किसी भी तरह का विजुअलाइजेशन करना ठीक नहीं हम अनजाने में बहुत सारा विजुअलाइजेशन कर देते हैं। जिससे किसी को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है, जैसे खेत में घास नाज को दबाते हुए ऊपर उठती है उस घास को हम हटा देते हैं तो अनाज को ठीक से पोषण मिलने लगता है: ठीक उसी प्रकार अगर हम हमारे विजुअलाइजेशन को कुछ समझे गलत है या सही तो हम सहजता से काम में ले सकते है। अगर आप विजुअलाइजेशन के बारे में जानना चाहते है तो यहां क्लिक कर जानकारी प्राप्त करें।

आपको विजुअलाइजेशन करते हुए आपके काम पर आलोचना करने वाले बहुत सारे लोग मिल जाते होंगे: यह आपने भी नोट किया होगा, जैसे में एक वेबसाइट का मालिक हूं अब इसके बारे में अच्छी सोच रखने वाले भी है, और बुरी शोच रखने वाले भी है दोनों रहेंगे और जो आलोचना या कर्म करते हैं, उनके बारे में भगवान कृष्ण गीता में अर्जुन से क्या कहते हैं ? आइए जानते हैं

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् ।

मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्या: पार्थ सर्वश: ।११।

काङ्क्षन्त: कर्मणां सिध्दिं यजन्त इह देवता: ।

क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा ।१२।

चातुर्वर्ण्यँ मया सृष्टं गुणकर्मविभागश: ।

तस्य कर्तारमपि मां विद्धयकर्तारमव्ययम् ।१३।

न मां कर्माणि लिम्पन्ति न में कर्मफले स्पृहा ।

इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते ।१४।चतुर्थोऽध्याय:

भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं हे अर्जुन ! जो मेरे को जैसे भजता है, मैं भी उनको वैसे ही भजता हूं, इस रहस्य को जानकर ही बुद्धिमान मनुष्यगण सब प्रकार से मेरे मार्गके अनुसार बर्तते हैं।११। जो मेरेको तत्वसे नहीं जानते हैं, वे पुरुष इस मनुष्यलोकमें अपने कर्मोंके फल को चाहते हुए देवताओंको पूजते हैं और उनके कर्मोंसे उत्पन्न हुई सिद्धि भी शीघ्र ही होती है, परंतु उनको मेरी प्राप्ति नहीं होती इसलिए तू मेरे को ही सब प्रकार से भज।१२। गुण और कर्मोंके विभाग से ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और शूद्र मेरे द्वारा रचे गए हैं, उनके कर्ताको भी मुझ अविनाशी परमेश्वरको तू अकर्ता ही जान ।१३। क्योंकि कर्मों के फलमें मेरी स्पृहा नहीं है, इसलिए मेरेको कर्म लिपायमान नहीं करते, इस प्रकार जो मेरे को तत्व से जानता है, वह भी कर्मोंसे नहीं बॅंधता है।१४। चौथा अध्याय

नैव किञ्चित्करोमीति युक्तो मन्येत तत्त्ववित् । 

पश्यञ्श्रृण्वन्स्पृशञ्जिघ्रन्नश्नन्गच्छन्स्वपञ्श्वसन् ।८। पञ्चमोऽध्याय:

प्रलपन्विसृजन्गृह्ण़त्रुन्मिषन्निमिषन्नपि ।

इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेषु वर्तन्त इति धारयन््।९। पञ्चमोऽध्याय:

हे अर्जुन तत्व को जानने वाला सांख्ययोगी तो देखता हुआ, सुनता हुआ, स्पर्श करता हुआ, सूंघता हुआ, भोजन करता हुआ, गमन करता हुआ, सोता हुआ, श्वास लेता हुआ, बोलता हुआ, त्यागता हुआ, ग्रहण करता हुआ तथा आंखों को खोलता और मीचता हुआ भी सब इंद्रियां अपने-अपने अर्थोंमें बर्त रही हैैं, इस प्रकार समझता हुआ नि:संदेह ऐसे माने कि मैं कुछ भी नहीं करता हूॅ। ८-९। पाॅचवाॅ अध्याय

उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत््। 

आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मन: ।५। षष्ठोऽध्याय:

यह योगारूढ़ता कल्याणमें हेतु कही है:- इसलिए मनुष्य को चाहिए कि अपने द्वारा अपना संसार-समुंद्र से उद्धार करें और अपने आत्माको अधोगतिमें न पहुंचाए क्योंकि यह जीवात्मा आप ही तो अपना मित्र हैं और आप ही अपना शत्रु है अर्थात् और कोई दूसरा शत्रु या मित्र नहीं है ।५। छठा अध्याय

ज्ञानं ज्ञेयं परिज्ञाता त्रिविधा कर्मचोदना।

कर्मन कर्म कर्तेति त्रिविध: कर्मसङ्ग्रह:।१८।

शमो दमस्तप: शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च।

ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम्।४२।

शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम्।

दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम्।४३।

कृषिगौरक्ष्यवाणिज्यं वैश्यकर्म स्वभावजम्।

परिचर्यात्मकं कर्म शूद्रस्यापि स्वभावजम्।४४।अथाष्टादशोऽध्याय:

ज्ञाता*, ज्ञान ऻ और ज्ञेय  यह तीनों तो कर्मके प्रेरक हैं अर्थात् इन तीनों के संयोगसे तो कर्ममें प्रवृत्त होने की इच्छा उत्पन्न होती है और कर्ताऽ करण $ और क्रिया यह तीनों कर्म के संग्रह हैं अर्थात् इन तीनों के संयोगसे कर्म बनता है।१८। 

अंतः करणका निग्रह, इंद्रियोंका दमन, बाहर-भीतरकी शुद्धि*, धर्मके लिए कष्ट सहन करना और क्षमाभाव एवं मन, इंद्रियाॅं और शरीरकी सरलता, आस्तिक बुद्धि शास्त्रविषयक ज्ञान और परमात्मतत्त्वका अनुभव भी, ये तो ब्राह्मण के स्वाभाविक कर्म हैं।४२। शूरवीरता, तेज, धैर्य, चतुरता और युद्धमें भी न भागनेका स्वभाव एवं दान और स्वाभिमान ॶर्थात् नि:स्वार्थभावसे सबका हित सोचकर शास्त्राज्ञानुसार शासनद्वारा प्रेमके सहित पुत्रतुल्य प्रजाको पालन करनेका भाव- ये सब क्षत्रियके स्वाभाविक कर्म हैं।४३। खेती, गोपालन और क्रय-विक्रयरूप सत्य व्यवहार*, ये वैश्यके स्वाभाविक कर्म है और सब वर्णों की सेवा करना-यह शूद्रका भी स्वाभाविक कर्म है।४४। अठारहवाॅं अध्याय

"पूर्वकृत शुभाशुभ कर्मोंके संस्कारों का नाम देव है।"

 सत्संग और शास्त्र के अभ्यास से तथा भगवदर्थ कर्म और उपासना के करने से मनुष्य की बुद्धि शुद्ध होती है, इसलिए जो सतशास्त्र साधनों से रहित है उसकी बुद्धि अशुद्ध है ऐसा समझना चाहिए।

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जैसे अग्नि, वायु और जल द्वारा प्रारब्धवस किसी प्राणी की हिंसा होती देखने में आवे तो भी वह वास्तव में हिंसा नहीं है: वैसे ही जिस पुरुषका देह में अभिमान नहीं है और स्वार्थ रहित केवल संसार के हित के लिए ही जिसकी संपूर्ण क्रियाएं होती है, उस पुरुष के शरीर और इंद्रियोंद्वारा यदि किसी प्राणी की हिंसा होती हूई लोगदृष्टिमें देखी जाए तो भी वह वास्तव में हिंसा नहीं है; क्योंकि आसक्ति, स्वार्थ और अहंकारके न होनेसे किसी प्राणीकी हिंसा हो ही नहीं सकती तथा बिना कर्तृत्वाभिमानसे किया हुआ कर्म वास्तवमें अकर्म ही है, इसलिए वह पुरुष पापसे नहीं बंधता है।

इसलिए मैंने पिछले पोस्ट में भी लिखा था कि हमेशा अपने कर्मों को अच्छा रखो क्योंकि कर्म से ही आपको आपका आगे भविष्य बनेगा भूतकाल में आपने क्या किया उसका भविष्य में आपको थोड़ा एहसास होगा और भविष्य में आप जो वर्तमान में करोगे वह आपको भविष्य में मिलने वाला है; जैसे हम खेती करते हैं उनकी बुवाई करते हैं और फल के लिए हम उस फसल को निकालते हैं तो हमें अनाज मिलता है तो हमें भूतकाल में हमने उस फसल को सोचा वर्तमान में हमने सोचा कि हमें अनाज मिलेगा तो आपको भविष्य मैं अनाज मिला क्योंकि आप कर्म कर रहे थे ठीक इसी तरह किसी भी पेड़ को सोचोगे और वर्तमान में आपकी सोच उसके फल पर रहेगी तो वह पेड़ फल देगा अगर आपकी सोच में कुछ गलत है तो वह पेड़ फल देगा नहीं देगा यह भविष्य बताएगा। इसलिए हम कर्म अच्छे करने के लिए आपसे आग्रह करते रहते हैं।

 आज के टाइम में कोरोना काल चल रहा है इसी पर में एक उदाहरण आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूं जो इस प्रकार है:- आप पिछले साल 2020 का पंचांग उठा कर देखिए उसमें भविष्य में लिखा है मार्च से जून-जुलाई तक व्यापार में कठिनाइयां अयंगी उसके बाद आगे लिखा है अक्टूबर मार्च में में भी लिखा है; जो हुआ तो यह आप सोचिए 2020 मार्च में लॉकडाउन लगा था और सभी दुकाने और धंधे ठप हो गए थे तो यह हम 2020 की लिखी हुई पंचांग को झूठा कैसे साबित कर सकते हैं यह कैसे होता है इसका एक दृष्टिकोण में आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं जो इस प्रकार है।

हमारा दृष्टिकोण

अब आप कौन सा कर्म कर रहे हैं:-

 इंसान जैसा कर्म करेगा वैसा ही फल उसको मिलेगा तो यहां हम एक तरह से मेहमान हैं; परमात्मा ने हमें मनुष्य शरीर दिया उसका हम गलत उपयोग करेंगे तो हमें ही भुगतना पड़ेगा, हमें परमात्मा ने हर तरह से आजादी दी सब कुछ दिया उसका हम गलत इस्तेमाल करेंगे तो क्या होगा आपको बुद्धि दी है और इस संसार में मनुष्य का राज चलता है।

हम उसको अगर गलत तरीके से इस्तेमाल करेंगे तो हमारे जो ऊपर ग्रह रहते हैं। *ध्यान से समझिए हमारे जो ग्रह रहते हैं वहां हमारी ऊर्जा पहुंचती है कर्मों की (हमारे कर्मों की ऊर्जा) उन ग्रहों तक पहुंचती है और ग्रह ऊर्जा को ग्रहण करते हुए उस उर्जा को उसके हिसाब से वापिस हमारे पास कन्वर्ट कर देते हैं। अगर अच्छे कर्मों की ऊर्जा हमारे ग्रहों के पास जाती है तो मनुष्य जाति के लिए अच्छी ऊर्जा का संचार हमारे ग्रह कर देते हैं अगर हमारे ग्रहों के पास बुरे कर्मों का या बुरी आदतों की ऊर्जा जाती है। तो ग्रहों से उसी तरह से ऊर्जा कन्वर्ट हो करके हमारे यहां दुष्कर्म की ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। जो मनुष्य शरीर मैं किसी भी तरह का रोग उत्पन्न करते हैं या मनुष्य जाति में किसी वायरस का या किसी तरह के रोगों का शंचर होने लगता हैं। मनुष्य के बाद आते हैं पशु-पक्षी वह भी हमारी चपेट में आ सकते हैं। यह सारे मनुष्य के कर्मों का ही फल होता है। आप एक बार अच्छे से सोच के एकांत में ध्यान लगा कर इस बात पर गौर करें तो आपको पता चलेगा सारा कर्मों का खेल ही है।

 इसलिए आपसे हम हाथ जोड़कर निवेदन करते हैं कि हमेशा अच्छे कर्म कीजिए ताकि हमारी मनुष्य जाति बचे और हम सुखी रहे अपने अपने धर्मों में लगा हुआ मनुष्य कभी दुखी नहीं होता उसी तरह अपने अपने कर्मों में लगा हुआ मनुष्य कभी दुखी नहीं होता अब आप पर निर्भर करता है, कि आपके परमात्मा का आपके लिए क्या संकेत है ? कौन से कर्मों का संकेत आपको परमात्मा दे रहा है, उसको आप सही ढंग से करते रहे तो आपका परिवार सुखी रहेगा, आप और हम सभी सुखी रहेंगे अन्यथा मनुष्य जाति में कभी कोरोनावायरस, कभी हंतावायरस आदि आते रहेंगे और मनुष्य जाति को खतरा उतरेगा और एक दिन ऐसा आएगा कि मनुष्य जाति संकट में आ सकती है।

यह होता क्यों है ?

 इस पर भी मैं आपको थोड़ी सी जानकारी दे दूं यह होता इसलिए है। क्योंकि हम आज के जमाने में हर एक चीज को बिजनेस में ले लेते हैं और यह सोचते हैं अभी कौन सा समय चल रहा है पैसे कमाने के लिए, पैसे कमाने के लिए क्या कर सकता हूं आप उसी पर कर्म करना शुरु कर दोगे। यह नहीं देखते कि यह सही है या गलत, इसका हम पर प्रभाव क्या होगा।

अपने आप को मजबूत बनाए।

 यह एक मनुष्य नहीं करता है, यह बहुत सारे लोग एक साथ करते हैं और एक साथ उर्जा जाती है ग्रहों के पास और कन्वर्ट होकर बहुत सारे लोगों को वह दिक्कत पहुंचा देती है। जिन जिन ने एक साथ गलत कर्मों की तरफ पैसा कमाने के लालच में गलत कर्म कर डाले। यह होता इसलिए है।

पैसे कमाने के लिए बहुत से साधन है अच्छे से भी पैसा कमाया जा सकता है यह नहीं है कि हम सारे लोगों के साथ पैसे के लालच में अंधे होकर पैसे कमाने में लग जाए।

किसी को दबाकर, किसी को सता कर, किसी को फंसा कर, किसी को लूट कर, किसी को गुमराह कर आदि कारणों से कमाया हुआ पैसा गलत कर्मों में आता है।

तो दोस्तो आपको कर्म के बारे में जानकारी दी आप इस आर्टिकल के बरें में क्या सोचते है हमें कोमेंट बॉक्स में लिखकर बताए या इसमें और लिखना है तो कृपा कर हमें बताए। धन्यवाद आपका दिन शुभ हो।

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