धूप बत्ती और धूप बनाने की विधि।

 सनातन धर्म में धूप-दीप का व‍िशेष महत्‍व है। मान्‍यता है क‍ि अगर व‍िध‍ि-व‍िधान से न‍ियम‍ित रूप से धूप-दीप द‍िखाया जाए। या फ‍िर धूप के टोटके क‍िए जाएं तो घर-पर‍िवार की सारी टेंशन और नेगेट‍िव‍िटीज चुटक‍ियों में ही दूर हो जाती है। मैं आपको शुद्ध जड़ी बूटियों से बनी धुप बत्ती और धूप बनाने का तरीका बताता हूँ । आशा हे आप इसका प्रयोग अवस्य करेंगे ।

धूप बत्ती बनाने की विधि।

गाय का गोबर 100 ग्राम

लकड़ी कोयला 125 ग्राम

नागरमोथा 125 ग्राम

लाल चन्दन 125 ग्राम

जटामासी 125 ग्राम

कपूर कांचली 100 ग्राम

राल 250 ग्राम

घी 200 ग्राम

चावल की धोवन 200 ग्राम

चन्दन तेल या केवड़ा तेल 20 ml

इन सभी को मिलाकर आटे की तरह गूथ ले और मनचाहे आकर की धूपबत्ती बना ले।

गोमय और जड़ी बूटियों से बनी इस पूजा धुप के उपयोग से कई लाभ होते है।

यह पर्यावरण को शुद्ध कर प्रदूषणमुक्त करता है।

इसके धुंए से वातावरण में फैले रोगाणु नष्ट होते है।

धूप बनाने की विधि।(Dhup banane ki vidhi)

1 कपूर और लॉन्ग कि धूनी।

रोज़ाना सुबह और शाम घर में कर्पूर और लौंग जरूर जलाएं। आरती या प्रार्थना के बाद कर्पूर जलाकर उसकी आरती लेनी चाहिए। इससे घर के वास्तुदोष ख़त्म होते हैं। साथ ही पैसों की कमी नहीं होती।

2 गुग्गल की धूनी।

हफ्ते में 1 बार किसी भी दिन घर में कंडे (सूखे गोबर या कोयले) जलाकर गुग्गल की धूनी देने से गृहकलह शांत होता है। गुग्गल सुगंधित होने के साथ ही दिमाग के रोगों के लिए भी लाभदायक है।

3 पीली सरसों की धूनी

पीली सरसों, गुग्गल, लोबान, गौघृत को मिलाकर सूर्यास्त के समय उपले (कंडे) जलाकर उस पर ये सारी सामग्री डाल दें। नकारात्मकता दूर हो जाएगी।

4 षोडशांग धूप।

अगर, तगर, कुष्ठ, शैलज, शर्करा, नागर, चंदन, इलायची, तज, नखनखी, मुशीर, जटामांसी, कर्पूर, ताली, सदलन और गुग्गल, ये सोलह तरह के धूप माने गए हैं। इनकी धूनी से आकस्मिक दुर्घटना नहीं होती है।

5 लोबान धूनी । (Loban dhup)

लोबान को सुलगते हुए कंडे या अंगारे पर रख कर जलाया जाता है, लेकिन लोबान को जलाने के नियम होते हैं इसको जलाने से पारलौकिक शक्तियां आकर्षित होती है। इसलिए बिना विशेषज्ञ से पूछे इसे न जलाएं।

6 दशांग धूप। (Dashang Dhoop)

चंदन, कुष्ठ, नखल, राल, गुड़, शर्करा, नखगंध, जटामांसी, लघु और क्षौद्र सभी को समान मात्रा में मिलाकर जलाने से उत्तम धूप बनती है। इसे दशांग धूप कहते हैं। इससे घर में शांति रहती है।

7 गायत्री केसर। (Gayatri Kesar)

घर पर यदि किसी ने कुछ तंत्र कर रखा है तो जावित्री, गायत्री केसर लाकर उसे कूटकर मिला लें। इसके बाद उसमें उचित मात्रा में गुग्गल मिला लें। अब इस मिश्रण की धुप रोज़ाना शाम को दें। ऐसा 21 दिन तक करें।

धूप देने के नियम।

1.रोज धूप नहीं दे पाएं तो तेरस, चौदस, अमावस्या और तेरस, चौदस तथा पूर्णिमा को सुबह-शाम धूप अवश्य देना चाहिए। मान्यता है कि सुबह दी जाने वाली धूप देवगणों के लिए और शाम को दी जाने वाली धूप पितरों के लिए लगती है। हालांकि शाम की धूप भी देवगणों के लिए दी जा सकती है।

2.धूप देने के पूर्व घर की सफाई कर दें। पवित्र होकर-रहकर ही धूप दें। धूप ईशान कोण में ही दें। घर के सभी कमरों में धूप की सुगंध फैल जाना चाहिए। धूप देने और धूप का असर रहे तब तक किसी भी प्रकार का संगीत नहीं बजाना चाहिए। हो सके तो कम से कम बात करना चाहिए।

धूप देने के लाभ।

धूप देने से मन, शरीर और घर में शांति की स्थापना होती है। रोग और शोक मिट जाते हैं। गृहकलह और आकस्मिक घटना-दुर्घटना नहीं होती। घर के भीतर व्याप्त सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलकर घर का वास्तुदोष मिट जाता है। ग्रह-नक्षत्रों से होने वाले छिटपुट बुरे असर भी धूप देने से दूर हो जाते हैं। धूप देने से देवता और पितृ प्रसंन्न होते हैं जिनकी सहायता से जीवन के हर तरह के कष्‍ट मिट जाते हैं।

हमारा लेख पढ़ने के लिए धन्यवाद हमने इस लेख में आपको धूप बाटी और धूप बनाने की विधि बताई है। अगर आपके पास कोई और तरीका है तो हमें जरूर बताएं ताकि हम और इस लेख में जोड़ सकें आपका दिन शुभ हो।

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