कुल्थि के फायदें। Benefits of Horse Gram in Hindi

कुलथी या कुलत्थ का नाम सभी ने सुना होगा लेकिन इसके औषधीय फायदों के बारे में अनजान होंगे। आम तौर पर कुलथी का इस्तेमाल घरेलू नुस्खे के रूप में पथरी के इलाज के लिए किया जाता है। इसके अलावा कुलथी के और भी औषधीकारक गुण होते हैं जो दूसरे बीमारियों से लड़ने में मदद करता है। चलिये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

कुलथी क्या है? (What is horse gram in Hindi?)

कुलथी प्रकृति से कड़वा, मधुर, तीखा, कफवात को दूर करने वाली, पित्तकारक,, रक्तपित्तकारक, पित्त को बढ़ाने वाली, खून बढ़ाने वाले तथा अम्लपित्तकारक होती है।

इसका प्रयोग सांस संबंधी समस्या, खांसी, हिक्का, पथरी, दाह, पीनस, मोटापा, बुखार, कृमि, पेट फूलना, दिल की बीमारी, सिरदर्द, वस्तिशूल यानि मूत्राशय में दर्द, मूत्राघात, अश्मरी, अर्श, गुल्म, विषप्रभाव, विबन्ध या कब्ज, उदररोग या पेट संबंधी समस्या, अरुचि तथा प्रतिश्याय की चिकित्सा में किया जाता है।

कुलथी का जूस वातानुलोमक होता है। वात संबंधी रोग में कुलथी का प्रयोग फायदेमंद होता है। कुलथी मूत्रल, सूजन को कम करने वाली, बलकारक होती है।

अन्य भाषाओं में कुलथी के नाम (Names of Kulthi in Different Languages)

कुलथी का वानास्पतिक नाम Dolichos uniflorus Lamk. (डोलिकोस् यूनीफ्लोरस) Syn-Macrotyloma uniflorum (Lam.) Verdc. होता है। इसका कुल Fabaceae (फैबेसी) होता है और इसको अंग्रेजी में Horse-Gram (हॉर्स ग्राम) कहते हैं। चलिये अब जानते हैं कि कुलत्थ और किन-किन नामों से जाना जाता है।

Sanskrit-कुलत्थिका, कुलत्थ;

Hindi-कुरथी, कुलथी;

Urdu-कुलत्थी (Kulathi);

Kannada-हुरली (Hurali), जुरली (Jurli);

Gujrati-कुलाथी (Kulathi), कुलीत (Kulit);

Tamil-कोल्लु (Kollu);

Telegu-उलुवा (Uluva), वुलावल्ली (Wulavalli);

Bengali-कुर्तीकलाई (Kurtikalai);

Nepali-गहत (Gahat);

Punjabi-कुलत्थ (Kulath), कलत (Kalat);

Marathi-कुलित्थ (Kulith), कुलथी (Kulthi);

Malayalam-कुल्लु (Kullu), मुथेरा (Muthera);

English-मद्रास ग्राम (Madras Gram);

Arbi-हब्बुलिलत (Habbulilat);

Persian-किल्लत (Qillat), माशाहिन्दी (Mashahindi), संगे शिकन (Sange shikan), हब्बुल कुलथ (Habbul Qulth)।

कुलथी के औषधीय गुण 

कुलथी प्रकृति से कड़वा, कषाय, मधुर, तीखा, कफवात को कम करने वाला, पित्तकारक, संग्राही या कब्ज, विदाही यानि जलन का एहसास, अतिरिक्त पसीना को रोकने वाली, रक्तपित्तकारक, पित्त और रक्त को बढ़ाने वाला और अम्लपित्तकारक होती है।

इसके अलावा कुलथी का प्रयोग सांस संबंधी समस्या, खांसी, हिक्का, अश्मरी या पथरी, दाह, पीनस (Rhinitis), मेद रोग या मोटापा, ज्वर, कृमि, आनाह या पेट फूलना, हृदय रोग, सिर दर्द, वस्तिशूल, मूत्राघात, अश्मरी, अर्श, गुल्म,तूनी रोग (Neuralgic pain), विषप्रभाव, विबन्ध या कब्ज, शोफ या अल्सर, उदररोग या पेट संबंधी रोग, अरुचि तथा प्रतिश्याय या साइनस की चिकित्सा में किया जाता है।

कुलथी का जूस वातानुलोमक होता है तथा गुल्म तूनी (Neuralgic pain) व प्रतूनी (Renal pain)आदि वातविकारों को ठीक करने में मदद करता है।

कुलथी स्तम्भक (Styptic), मूत्रल, हृदय के कार्य को सही तरीके से करने में मददगार, सूजन को कम करने वाली, बलकारक तथा प्रत्यूर्जतारोधी यानि एलर्जी के इलाज में मदद करती है।

दालों का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि यह अन्य फूड्स की तुलना में हमारे शरीर को अधिक पोषण प्रदान करती हैं, और कई तरह से हमारे स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाती हैं। वैसे तो हमारे आसपास कई तरह की दालें मौजूद हैं, लेकिन आज हम जिस दाल के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, उसके बारे में बहुत कम लोग जानते है। ये दाल है कुल्‍थी की दाल, जिसे मांसाहार से भी ज्‍यादा पौष्टिक कहा जाता है। इस पर किए गए अध्ययनों ने इसके कई औषधीय गुणों को उजागर किया है। यह न सिर्फ आपके शरीर को पर्याप्त पोषण प्रदान करती है, बल्कि कई गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के जोखिम को भी कम कर सकती हैं।

हम यहां आपको कुल्‍थी की दाल या हॉर्स ग्राम के पोषण मूल्य और स्वास्थ्य लाभों के बारे में बता रहे हैं। लेकिन इससे पहले कि हम आगे बढ़ें, यह जान लेते हैं कि कुलथी या कुल्‍थी की दाल होती क्या है?

क्‍या है कुल्‍थी की दाल?

कुल्‍थी एक प्रकार की दाल है, जिसे अंग्रेजी में हार्स ग्राम के नाम से जाना जाता है। इसे दक्षिण भारत की महत्वपूर्ण फसल माना गया है। इसका रंग गहरा भूरा होता है और देखने में मसूर की दाल की तरह लगती है। दक्षिण भारत के कुछ प्रमुख व्यंजनों जैसे रसम आदि बनाने के लिए इसे प्रयोग में लाया जाता है। इस दाल का वैज्ञानिक नाम मैक्रोटिलोमा यूनिफ्लोरम (Macrotyloma uniflorum) है। 

कुल्‍थी दाल का पोषण तत्व

आयुर्वेद के अनुसार कुल्‍थी दाल में कई औषधीय गुण होते हैं। अन्य दालों की तरह कुल्‍थी की दाल पोषक तत्वों का एक पावर हाउस है। इसमें लगभग वह सभी जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जिसकी हमारे शरीर को आवश्यकता होती है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, फोस्फोरस, मैग्नीशियम, मैंगनीज, जिंक, कॉपर, विटामिन- ए, बी, सी, आयरन, नियासिन, रीबोफ्लेविन, थायमिन जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं। यह न केवले हमारे शरीर को पर्याप्त पोषण प्रदान करती है, बल्कि कई गंभीर रोगों से बचाव करने में भी मददगार है। आइए जानें इस कुल्थी दाल के स्‍वास्‍थ्‍य लाभों के बारे में

कूल्थी दाल के फायदें।

 • ‍कुल्थी दाल वजन कम करने में बेहद मददगार साबित हो सकती है। इसमें मौजूद फिनोल प्राकृतिक रूप से वसा को जलाते हैं। इसके अलावा, यह दाल कैलोरी में कम और कार्बोहाइड्रेट में उच्च है, जो कि इसे एक उच्च तृप्ति वाला भोजन बनाता है। जिससे आप अधिक समय तक पूर्ण महसूस करते हैं, यह किसी व्यक्ति को लगातार खाने और अधिक खाने से रोकने में मददगार है।

 • अधिकांश महिलाएं अनियमित मासिक धर्म की समस्या से पीड़ित हैं। लेकिन यह समस्या बेहद खतरनाक साबित हो सकती है, क्योंकि यह समस्या कई अन्य विकारों का कारण बन सकती है। साथ ही इसके चलते महिलाओं में बांझपन की समस्या भी हो सकती है।

ऐसे में कुल्‍थी दाल का सेवन आपके लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है। इसमें उपस्थित पौष्टिक तत्व शरीर को प्रोटीन व आयरन देते है। आयरन मिलने से खून की कमी दूर होती है और एनीमिया जैसी समस्या नहीं होती है। लेकिन सही मात्रा में इस का उपयोग करे।

आयुर्वेद ऐसे मामलों में हर दिन एक चम्मच कुल्‍थी दाल के पाउडर का सेवन करने की सलाह देता है। साथ ही इसका लाभ पाने के लिए प्रतिदिन कुल्‍थी दाल का पानी, सूप या स्प्राउट्स का भी सेवन किया जा सकता है।

कुछ अध्ययनों से संकेत मिलता है कि कुल्‍थी दाल का सेवन करने से हृदय स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है और हृदय रोग के कई जोखिम कारकों को कम किया जा सकता है।

• त्वचा के लिए कुलथी के लाभ बहुत हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस दाल को पीसकर प्रयोग में लाने से चकत्तों और फोड़ों से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके अलावा, कुलथी दाल में फ्लेवोनॉयड पाया जाता है, जो त्वचा को सूर्य की हानिकारक पैराबैंगनी किरणों से बचाने का काम कर सकता है 

• उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले चूहों में पांच सप्ताह के अध्ययन के अनुसार, कुल्‍थी दाल कुल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल (खराब) कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करती है। जिनका उच्च स्तर हृदय रोग के बढ़ते जोखिम से जुड़ा होता है।

अन्य जानवरों के अध्ययन से पता चलता है कि कुल्‍थी दाल और इसके घटक सूजन के कई मार्करों को कम कर सकते हैं, जो हृदय रोग जैसी पुरानी स्थितियों में योगदान कर सकते हैं।

सिर्फ इतना ही नहीं, मानव अनुसंधान ने भी कुल्‍थी दाल के सेवन में वृद्धि को हृदय रोगों के जोखिम को कम करने के साथ जोड़ा है।

• डायबिटीज एक जीवनशैली जनित रोग है। यह एक समस्या है जो आपका जीवन भर पीछा नहीं छोड़ती। इसे केवल अपनी जीवनशैली में बदलाव करके ही नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन यहां कुल्‍थी दाल का सेवन करना डायबिटीज के रोगियों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है।

यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि कुल्‍थी टाइप 2 डायबिटीज पर भी सकारात्मक प्रभाव छोड़ सकती है।

• जिन लोगों को किडनी में पथरी की समस्या है, उनके लिए कुल्‍थी दाल का सेवन करना बहुत कारगर साबित हो सकता है। पथरी के लिए कुल्‍थी का इस्तेमाल लंबे समय से किया जा रहा है। कुल्‍थी दाल एंटीऑक्सीडेंट और शरीर से गंदगी बाहर निकाले वाले गुणों में समृद्ध होती है। जो किडनी से पथरी को बाहर निकालने में मदद कर सकती है। सिर्फ इतना ही नहीं कुल्‍थी दाल एक कारगर मूत्रवर्धक के रूप में काम करती है, जिससे पेशाब के रास्ते किडनी स्टोन को निकालने में मदद मिलती है।

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कुल्‍थी दाल का उपयोग

 कुल्‍थी की दाल के फायदों और इसमें मौजूद पोषक तत्वों को जानने के बाद इसका सेवन किस प्रकार किया जाए, यह जानना भी जरूरी है। इस बारे में हम यहां विस्तार से बता रहे हैं।

√इसे आम दाल की तरह बनाकर खा सकते हैं। इसके लिए आवश्यकतानुसार कुल्‍थी को रातभर पानी में भिगोकर रख दें और फिर अगले दिन बनाएं।

√दक्षिण भारत में इसका इस्तेमाल रसम नामक खास व्यंजन बनाने के लिए किया जाता है।

√कुल्‍थी को अंकुरित रूप में भी खा सकते हैं।

√इसके अलावा, कुल्‍थी की रोटियां बनाकर भी खा सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले कुलथी दाल को आटे की तरह पीसा जाता है। उसके बाद इसकी रोटियां बनाई जाती हैं।

√कुल्‍थी की दाल का इस्तेमाल कर लड्डू भी बनाए जा सकते हैं।

कुल्‍थी दाल के नुकसान

 में फाइबर की मात्रा पाई जाती है और फाइबर की अधिक मात्रा पेट में गैस, सूजन व पेट में ऐंठन का कारण बन सकती है।

कुल्‍थी को कैल्शियम का भी अहम स्रोत माना गया है। शरीर में कैल्शियम की मात्र जरूरत से ज्यादा होने पर पेट में सूजन व गैस के साथ कब्ज की समस्या हो सकती है ।

अब तो आप शरीर के लिए कुल्‍थी दाल खाने के फायदे जान गए होंगे। शरीर के लिए कुल्‍थी के लाभ पाने के लिए आपको इसे अपने दैनिक आहार में जरूर शामिल करना चाहिए। खासकर, किडनी स्टोन के लिए कुल्‍थी दाल का इस्तेमाल किया जा सकता है। बेशक, इसके नुकसान कम देखे गए हैं, लेकिन इसका सेवन करने के दौरान कुछ दुष्प्रभाव नजर आते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।


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