जीरा (cuminum)

 जीरा भोजन में दैनिक उपयोग में आने वाला एक रुचिकर और स्वादिष्ट मसाला है। जीरे का बहुत उपयोग होता है। जीरा भारत में सर्वत्र उत्पन्न होता है जीरे के लिए सेंद्रीय पदार्थ वाली, गहरी, भुरभुरी और अच्छी तरह है रिसनेवाली जमीन अनुकूल पड़ती है। उत्तरी गुजरात में जीरे की बुवाई अधिक मात्रा में होती है। जुजरात (उंझा) जीरे के व्यापार का मुख्य केंद्र है यहां जीरे का भारी व्यापार होता है ठंडी के मौसम में जीरे की बुवाई होती है। उसके पौधे एक डेढ़ फुट के होते हैं वे सुगंध युक्त होते हैं। त्वचा और स्वास्थ्य संबंधी 1000 प्रोडक्ट

 सफेद जीरा, शाही जीरा या काला जीरा और कलौंजी जीरा तीन प्रकार का होता है तीनों प्रकार गुण में लगभग समान है सफेद जीरे का दाल, साग में भंगार (छोंक) मैं और मसाले के रूप में उपयोग होता है शाही जीरा का दवा में उपयोग होता है। ओथमी जीरा और शंखजीरा यह दो वस्तुएं जीरे से एकदम भिन्न है। ऑथमी घोड़जीरा अथवा इसबगोल कहते हैं। इसबगोल में से सत्व निकलता है, यह धातु पोस्टिक मानी जाती है। एवं कब्ज के रोगी को दूध में पिलाया जाता है। शंख जीरा वनस्पति नहीं है। जीरा शीतल है। यदि शरीर में गर्मी बढ़ गई हो तो ईसका सेवन करने से गर्मी का समन होता है।

 तीनों प्रकार का जीरा रुक्ष, तीखा, किंचित गर्म, अग्नि को प्रदीप्त करने वाला, हल्का, मलावरोधक, पित्तकारक, बुद्धि वर्धक, बलप्रद, रुचि उत्पन्न करने वाला, कफ को मिटाने वाला और नेत्र के लिए हितकारी है यह वायु पेट का अफरा, उल्टी, अतिसार-दस्त, और रक्तविकार को मिटाता है। यह वातहर, भूख लगाने वाला, रुचि कारक और ठंडा है।

अनेक भाषा में जीरा का नाम।

सफेद जीरा का वानस्पतिक नाम क्युमिनम् साइमिनम् (Cuminum cyminum Linn, Syn-Cuminum odorum Salisb) है, लेकिन इसे अन्य नामों से भी जाना जाता है, जो ये हैं।

Hindi- जीरा, सादाजीरा, साधारण जीरा, सफेद जीरा

Urdu- जीराह (Jirah)

English- कॉमन कारावे (Common caraway), क्युमिन (Cumin), जीरा, अजाजी, जरण, दीर्घजीरा

Bengali- सादाजीरे (Sadajire), जीरे (Jire)

Marathi- जीर्रे (Jirre), पांढ़रे जीरे (Pandhre jire)

Gujarati- जींरु (Jeenru), शाकनु जींरु (Shankanu jeenru)

Kannada- जीरिगे (Jirige), विलिय जिरिगे (Viliyajirige), विलिय जीरगे (Viliya jirige)

Telugu (jeera in telugu)- जिलकारा (Jilkara), जील करर (Jilkarar)

Tamil (jeera in tamil)- शीरागम (Shiragam), शीरुगम (Sheerugam)

Malayalamm- जीराकाम (Jirakam)

Nepali- जीरा (Jira)

Persian- जीरये सफेद (Jiraye safed)

इसी तरह काला जीरा (black jeera) का वानस्पतिक नाम ,Carum carvi Linn. (कैरम कारवी) Syn-Carum aromaticum Salisb है और इसे इन नामों से भी जाना जाता है।

Hindi- काला जीरा (black jeera), स्या जीरा, स्याह जीरा,

Urdu- जीराह (Jirah)

English- Black caraway seed (ब्लैक कारावे सीड)

Sanskrit- कृष्णजीरा, जरणा, भेदिनी, बहुगन्धा

Kannada- जिरिगे (Jirige)

Kashmir- गुन्यान (Gunyan)

Gujarati- जीराउत्मी (Jirautmi), जीरू (Jiru), शाहजीरू (Shahjiru)

Tamil- शिरागम (Shiragam), शिरूगम (Seerugam)

Telugu- जिलाकाररा (Jilakarra), जीराा (Jiraka)

Bengali- जीरा (jeera)

Punjabi- जीरासीयाह (Jirasiyah)

Marathi- जीरोगिरे (Jiregire), जीरे (Jire)

Nepali- जीरा (Jira)

Arabic- कमुना (Kamuna), कामुत (Kamuth)

Persian- जीरा (Zira)

जीरा के फायदें।

  जीरा जठर यकृत और आंतों को बलवान बनाता है। आंतों के भीतरी जंतुओं का नाश करता है, दुर्गंध को दूर करता है और मल को बांधता है, पेट में वायु का जमाव, उदरशूल, मलावरोध, अफरा, मल में दुर्गंध आदि शिकायतें इससे दूर होती है। पाचन क्रिया की विकृति के कारण मलशुद्धि न हो रही हो और गर्भाशय की शिथिलता-निर्बलता के कारण रज-शुद्धि न होती हो तो जीरे के सेवन से शुद्धि होती है। जीरा प्रसूति के लिए श्रेष्ठ औषधिरूप है।

 धनिया और जीरा दोनों बराबर-बराबर लेकर कूटकर बनाया हुआ मसाला रसोई को रूचिप्रद और स्वादिष्ट बनाता है। राई और मिर्च जैसे उग्र गर्म मसालों के साथ ठंडे धनिया-जीरे का उपयोग हितकारी है।

सोंठ और जीरे को पानी के साथ पीसकर लगाने से मकड़ी का विष उतरता है।

जीरे को पीसकर लुगदी बनाकर बांधने से मस्से से गिरता खून बंद हो जाता है, जलन मिटती है और बाहर निकले हुए अत्यंत पीड़ादायक मस्से अंदर चले जाते हैं। 

सेंका हुआ जीरा, काली मिर्च और सेंधा नमक मट्ठा या छाछ में मिलाकर भोजन के बाद पीने से अतिसार और ग्रहणी में फायदा होता है।

अंदरूनी बुखार के कारण हॉट पर होने वाली फुंसियां जीरा पानी में पीसकर लगाने से मिटती है।

जीरा और सेंधा नमक बराबर-बराबर लेकर नींबू के रस में सात दिन तक भिगोकर रखिए फिर उसे सुखाकर उसका चूर्ण बनाइए यह चूर्ण सुबह-शाम लेने से अफारा मिटता है एवं पाचन शक्ति बलवान बनती है।

जीरे को रोजाना पाउडर बनाकर लेने से गर्मी कम होती है और रतोंधापन मिटता है।

जीरे के सेवन से हिचकी अफारा और शरीर में हो रहे शूल (दर्द) से राहत मिलती है जीरा, हींग और सेंधा नमक की फंकी तथा घी के साथ अथवा केवल घी के साथ लेने से शुल मिटता है।

जीरा के सेवन से स्त्रियों का दूध बढ़ता है। जीरा और शर्करा का चूर्ण एक छोटी चम्मच चावल के मांड में पीने से स्त्रियों के श्वेत प्रदर रक्त वात रोग मिटते हैं स्त्रियों के प्रदर रोग में जीरा अत्यंत गुणकारी है।

जीरे का एक चम्मच चूर्ण पुराने गुड में घोटक 10 ग्राम भर की गोलिया बनाइए इन गोलियों का सेवन करने से पसीना निकलकर बुखार उतर जाता है।

एसिडिटी से परेशान हैं, तो जीरा, और धनिया के 120 ग्राम पेस्ट को 750 ग्राम घी में पकाएं। इसे रोज 10-15 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे एसिडिटी के साथ-साथ पुरानी कफ की समस्या , पित्त की बीमारी, तथा भूख की कमी ठीक होती है।

किसी व्यक्ति को कुत्ता काट ले, तो उसे बहुत परेशान होना पड़ता है। कुत्ते के काटने पर उसके दांतों की विष से व्यक्ति को रेबिज होने की संभावना रहती है। ऐसे में 4 ग्राम जीरा, और 4 ग्राम काली मिर्च को घोंटकर, छान लें। इसे सुबह और शाम पिलाने से कुत्ते के विष में लाभ मिलता है।

बिच्छू के काटने पर जीरे, और नमक को पीसकर घी, और शहद में मिला लें। इसे थोड़ा-सा गर्म कर लें। इसे बिच्छू के डंक वाले स्थान पर लगाएं। बिच्छू का विष उतर जाता है।

जीरा में घी, एवं सेंधा नमक मिला कर पीस लें। इसे बहुत महीन पेस्ट बना कर, थोड़ा गर्म कर लें। इसे बिच्छू के काटने वाले स्थान पर लेप करें। इससे दर्द में आराम मिलता है।

गाय के दूध में जीरा पका कर सूखने के बाद चूर्ण बनाकर यह चूर्ण सक्कर के साथ लेने से शक्ति प्राप्त होती है।

जीरे का नुकसान।

जीरे के अधिक इस्तेमाल से लीवर खराब होने की आंशका बढ़ जाती है. लोगों को अकसर खट्टी डकार की समस्या हो जाती है. खाने के अलावा ज्यादा जीरा के खाने से भी खट्टी डकार आने लगती है. इसलिए जीरे का इस्तेमाल न ज्यादा न बहुत कम उतना ही करना चाहिए जिससे आपकी सेहत पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े।

जीरे से गर्भवती महिला पर भी काफी प्रभाव पड़ता है. अगर गर्भवती महिला ज्यादा जीरे का सेवन करे तो गर्भपात और समय से पहले डिलीवरी हो सकती है. इसलिए गर्भवती महिलाओं को जीरे का कम ही सेवन करना चाहिए। अगर आप जीरे का प्रयोग कर रहे हैं तो अपने चिकित्सक की सलाह जरूर लें।

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