धनिया, (Coriander)

 धनिया बीज सब्जी के मसालों की महत्वपूर्ण वस्तु है रसोई में इसका रोज उपयोग होता है धनिया साग में सुगंध लाता है वर्षा ऋतु में और बीज तैयार करने के लिए ठंडी की ऋतु में इसकी बुआई होती है गहरी काली जमीन में धनिया का अच्छा उत्पाद होता है इसके पौधे एक डेढ़ फुट ऊंचे होते हैं पत्ते कटे हुए दंतीदार होते हैं, इसके फूल सफेद होते हैं घर के आंगन में गमले में धनिया को बोने से कुछ ही दिनों में वह उठ जाता है, इस प्रकार उगाने में ताजा हरा धनिया उपलब्ध हो सकता है दाल साग में डालने के लिए सभी देश में इस प्रकार हरा धनिया उगाया जा सकता है।

धनिया बीज के गुण

 हरा धनिया रुचिवर्धक, पित्त की गर्मी का सामक और पाचक होने से, दाल साग में बारीक काट कर डाला जाता है। दाल-साग पक जाने पर उनको चूल्हे से नीचे उतारने के बाद ही हरा धनिया डालना चाहिए। इसके पहले डाल देने से उसकी सुगंध उड़ जाती है भोजन स्वादिष्ट और सुगंधित बनता है सूखा धनिया डालने के बजाय हरा धनिया डालने से अधिक स्वादिष्ट होती हैं। किसी भी शुभ कार्य में शगुन के रूप में गुड़, धनिया बांटने का रिवाज है। देव मंदिरों में प्रसाद के रूप में पंजीरी बांटी जाती है उसमें भी धनिए का उपयोग होता है भारत में पुराने समय से भोजन में तथा औषधि के रूप में धनिया का उपयोग होता है। इस प्रकार हमारे पूर्वजों ने धनिए की उपयोगिता को स्वीकृति दी है, हमें भी गर्मी और पित्त का शमन करने वाली इस सुलभ औषधि का सर्वदा उपयोग करना चाहिए विशेषकर पित्त प्रकृति वाले को तो धनिया और जीरे का उपयोग करना चाहिए। धनिया और जीरा संभाग में मिलाकर कूट कर मसाला तैयार किया जाता है यह मसाला पित्त शामक रुचि वर्धक और पाचक माना जाता है दाल-सब्जी मे इसका खूब उपयोग होता है धनिया में अनेक गुण होने से यह मांगलिक गिना जाता है।

धनिया का अनेक भाषा में नाम।(Dhaniya – Coriander in Different Languages)

धनिया का वानस्पतिक नाम कोरिएण्ड्रम सैटाइवम (Coriandrum sativum Linn., Syn-Coriandrum majus Gouan) है, और यह एपिएसी (Apiaceae) कुल से है।

Hindi – धनियां

Sanskrit – धान्यक, धाना, कुस्तुम्बुरु, वितुन्नक, छत्रा, धान्यक, धान्या, धानी, धानेयक, छत्रधन्य, धन्याक, धनिक, धनेयक, धनक, धान्यबीज, धेन्निका, जनप्रिय, शाकयोग्य, सुगन्धि, सूक्ष्मपत्र, वेधक, वेषण, बीजधान्य

English – coriander (dhaniya)

चाइनीज पार्सले (Chinese parsley), कोरिएन्डर (Coriander)

Konkani – कोटबोर (Kotbor)

Kannada – कोथांबरी (Kothambari), हविज (Havija)

Gujarati – धाना (Dhana), कोथमीरी (Kothmiri)

Tamil – कोटमल्लि (Kotamalli), कोतमल्ली (Kothmalli) 

Telugu – कोत्तिमिरि(Kotimiri), धनियलु (Daniyalu)

Bengali – धाने (Dhane)

Nepali – धनियां (Dhaniya)

Marathi – धानया (Dhanya), कोथिमीर (Kothimir) 

Arabic – कजबुरा (Kuzbura), कुजबरह (Kuzbarah)

Persian – काश्नीज (Kashniz)

धनिया बीज के फायदें। 

धनिया कसैला, वीर्य के लिए हितकारी, मूत्र उत्पन्न करने वाला, हल्का, कड़वा, तीखा, उश्णवीर्य, अगनी को प्रदीपद करने वाला, पाचक, ज्वार को मिटाने वाला, रुचि उत्पन्न करने वाला, मल को रोकने वाला, पाक में मधुर और तीनों दोषों को मिटाने वाला है। यह जलन, श्वास, खांसी, दुर्बलता और कृमि रोग को मिटाता है। पित्त संबंधी रोगों तथा शरीर की दूषित गर्मी में धनिया का उपयोग करना चाहिए।

  • वैज्ञानिक मत के अनुसार धनिया सुगंधयुक्त, उत्तेजक, उदरवात हर और उद्दीपन-पाचक है, अपच और जुकाम पर इसका उपयोग होता है। एलोपैथी में धनिया में से निकाले हुए तेल का उपयोग होता है यह तेल वातहर है, अतः अफरा और उदर शूल होने पर इसका उपयोग होता है। गर्मी से यह तेल उड़ जाता है। 

  • अगर आपको बार-बार प्यास लग रही है, उसके लिए धनिया पानी में भिगोकर रखें फिर उसे मसल छानकर उस पानी में शहद और चीनी डालिए यह पानी बार-बार पीने से प्याश शांत होती है। 

  • बुखार में बार-बार प्यास लगती है उस समय धनिया शक्कर और द्राक्ष को पानी में भिगोकर मसलकर छानकर यह पानी बुखार के रोगी को पिलाने से उसकी प्यास शांत होती है।

  • धनिया और सौंफ का काढा देने से शरीर के भीतर हो रहा आम जल जाता है, दाह, प्यास, मूत्र की जलन तथा बेचैनी दूर होती है एवं पसीना निकल कर आमजन्य बुखार उतर जाता है।

  • धनिया रात को पानी में भिगोकर रख दीजिए सुबह छानकर उसमें एक टी स्पून शक्कर मिलाकर पीने से पित्त के रोग मिटते हैं धनिया और शक्कर पीने से पेट में होने वाली जलन शांत हो जाती है।

  • धनिया एक टी स्पून और जीरा1 टी स्पून लेकर उन्हें दरदरा कुट लीजिए और 300 ग्राम पानी में रात में भिगोकर रख दीजिए सुबह दरदरा पीस, छानकर उसमें शक्कर डालकर चार, छ: दिन तक पीने से जठर (Englis-stomach, हिन्द-आमासय, मानवी-पाचनसंस्थान), जलन शांत होती है। हाथ पैर में जलन हो रही हो तो वह भी दूर होती है।

  • गर्भवती महिलाओं को उल्टी होने की संभावना आम बात है उसके लिए धनिया चूर्ण एक चौथाई टीस्पून, एक चम्मच शक्कर,  चावल का मांड इन सबको मिलाकर गर्भवती महिलाओं को पिलाने से उलटी होना बन्द हो जाती है।

  • धनिया, सोंठ, शक्कर, और नागरमोथा इन चारों चीजों को आधा-आधा छोटी चम्मच लेकर 300 ग्राम पानी में उबालें जब पानी एक चौथाई रह जाने पर छान लीजिए यह पानी पिलाने से गर्भवती स्त्रियों की उल्टी एवं अन्य किसी कारण से लोगों को होने वाली उल्टी बंद होती है इस प्रकार धनिया उल्टी का रामबाण इलाज है।

  • धनिया को रात में भिगोकर रखिए प्रातः उसे छान लीजिए यह पानी पीने से या हरे धनिए का रस पीने से मल के साथ गिरने वाला खून (स्रावयुक्त अर्श) बंद होता है धनिया और शर्करा का काढ़ा बनाकर पीने से मस्से से गिरने वाला खून बंद होता है।

  • धनिया पानी में भिगोकर रखिए फिर उसे मसलकर छान लीजिए इस पानी से आंखों को धोने से खूब फायदा होता है दुखती आंखें अच्छी होती हैं इस पानी से रोज आंखें धोनी चाहिए ऐसा करने से आंखों में चेचक के दाने नहीं निकलते या किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता।

धनिया चाय 

  • एक छोटी चम्मच धनिया को पानी में उबालकर उसमें दूध और चीनी डालकर चाय बनाकर प्रतिदिन प्रातः पीने से पाचन क्रिया में सुधार होता है।

  • धनिया, जीरा, काली मिर्च, पुदीना, सेंधा नमक और द्राक्ष को नींबू के रस में पीसकर बनाई हुई चटनी भोजन के साथ लेने से अरुचि दूर होकर भूख खुल जाती है।

  • धनिया, अजवाइन, लॉन्ग, काली मिर्ची, तुलसी के पत्ते, दालचीनी, शक्कर इन सारी चीजों को मिक्स कर काढ़ा तैयार करें यह काढ़ा लेने से सर्दी जुकाम लगने की संभावना नहीं होती इसे सर्दियों में रोज पीना चाहिए।

  • पेट की गैस की समस्या में धनिया डालकर पकाए हुए पानी का सेवन करना हितकर होता है।

धनिया बीज के नुकसान।

धनिया के पत्ते, और बीजों को अधिक मात्रा में सेवन करने से ये परेशानी हो सकती हैं।

  • कामशक्ति कम हो जाती है।

  • मासिक धर्म रुक सकता है।

  • दमे के रोगी को नुकसान पहुंच सकता है।

अगर आप धनिया का उपचार कर रहे हैं। तो अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले आपको हमने धनिया के बारे में बताया आपको हमारा पोस्ट कैसा लगा हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं, धन्यवाद

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