सहजन के फायदे और नुकसान। सहजन का उपयोग कैसे करें ?

  किसी भी तरह का प्रोडक्ट खरीदने के लिए आप सर्च बार में लिखें और Go बटन पर क्लिक करें। आपके सामने आपके प्रोडक्ट होंगे। सहजन या ड्रमास्टिक ((Drumstick) वनस्पतिक नाम मोरिंगा ओलिफेरा (Moringa oleifera) के बारे में हम सभी जानते हैं पर इसमें पाये जाने वाले पोषक तत्वों एवं औषधीय गुणों के बारे में कम ही लोग जानते होंगे। इसे सीजना, सुरजना, शोभाजन, मरूगई, मरूनागाई, इण्डियन हार्सरैडिश आदि नामों से भी जाना जाता है। सहजनन भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और उप–हिमालयी क्षेत्रों का मूल निवासी है। पौष्टिकता और औषधीय गुणों के कारण अफ्रीका के उपोष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में इसकी खेती भी की जाती है। सहजन पूरे भारत में सुगमता से पाया जाने वाला पेड़ है। सहजन के पत्ते, फूल, फलियां, बीज व छाल सभी का किसी न किसी रूप में प्रयोग होता है। सहजन के पत्ते एवं फलियां शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ शरीर में उपस्थित एवं विषैले तत्वों को निकालने का काम करते हैं। भारत में सहजन का उपयोग दक्षिण भारत में अधिकता से सांभर एवं सब्जी के रूप में किया जाता है क्योंकि दक्षिण भारत में साल भर फली देने वाला सहजन के पेड़ होते है।

जबकिि उत्तर भारत में यह साल में एक बार ही फली देता है। सहजन में पोषक तत्वों जैसे- प्रोटीन, ऑयरन, बीटा कैरोटीन, अमीनो एसिड, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, विटीमिन ए, सी और बी काम्प्लेक्स अधिकता होने के कारण इसे कपोषण को रोकने एवं इसके इलाज में प्रयोग किया जाता है। सहजन पेड को कटिंग या बीज द्वारा बड़ी आसानी से घर के आस-पास पार्क में बड़े गमलों में लगाया जा सकता है। सहजन पोषक तत्वों एवं स्वास्थ्यवर्धक गुणों के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी मजबूती प्रदान करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसके बीज को पाउडर के रूप में पीस कर पानी में मिलाया जाता है। पानी के साथ घुलकर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लोरीफिकेशन एजेण्ट बन जाता है। यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित करता है बल्कि पानी की सान्द्रता को भी बढ़ाता है जिससे जीव वैज्ञानिक के नजरिये से यह जल मानवीय उपयोग के लिए अधिक योग्य बन जाता है।

पत्तियां :

सहजन की पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मैंग्नीशियम, विटीमिन ए, सी और बी काम्प्लेक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो खून की कमी एवं कुपोषण दूर करने में सहायक है। इसके अलावा सहजन के बीज के आटे को बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए भी प्रयोग में लाया जा सकता है। यह एक अच्छा हेल्थ सप्लीमेण्ट है।

 

सहजन में शुगर के स्तर को बैलेंस रखने की क्षमता होती है। यह डाइबिटीज से लड़ने में मदद करता है।

उपापचय (मेटाबोलिज्म) को ठीक रखने के लिए सहजन के तत्वों का सेवन बेहतर माना गया है। यह पाचन क्रिया को सही रखने में मददगार है।

सहजन की पत्तियों का काढ़ा, गठिया, सियाटिका, पक्षाघात, वायु विकार में शीघ्र लाभ देता है।

मोच आने पर सहजन की पत्ती की लुग्दी बनाकर उसमें थोड़ा सा सरसों का तेल डालकर आंच पर पकायें और फिर मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ होता है।

सहजन के पत्तों का रस बच्चों के पेट के कीड़े निकालने एवं उलटी दस्त रोकने के काम आता है।

सहजन की पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव एवं सूजन ठीक हो जाता है।

सहजन पत्तियों के रस से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है।

सहजन विटामिन ए का बेहतरीन स्रोत है। यह आँख को स्वस्थ रखता है।

सहजन की छाल में शहद मिलाकर पीने से वात व कफ शान्त हो जाता है।

सहजन की छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द में आराम मिलता है।

जड़ :

जड़ का काढ़ा सेंधा नमक व हींग के साथ पीने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है।

सहजन की छाल का काढ़ा, हींग व सेंधा नमक डालकर पीने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है।

सहजन के ताजे फूलों का प्रयोग हर्बल टॉनिक बनाने में किया जाता है।

सहजन के फूल, हृदय रोगों व कफ रोगों में उपयोगी है।

फलियाँ :

सहजन की सब्जी खाने से पुराने गठिया, जोड़ों का दर्द, वायु संचार, वात रोगों में लाभ होता है।

 

सहजनन की सब्जी खाने से गुर्दे और मुत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है।

सहजन का प्रसंस्करण :

सहजन की पत्तियों में आयरन, रेशा, विटामिन ए एवं प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। अतः पत्ती को सुखाने के उपरान्त पाउडर बनाकर उसे फलों एवं सब्जियों में उपयोग लाया जा सकता है।

 

सहजन की पत्तियों के पाउडर को सलाद में नमक व सलाद मशाला के साथ प्रयोग करें।

सहजन की फलियों का सांभर एवं सब्जी के रूप में प्रयोग करना।

सहजन की पत्तियों को जूस के रूप में प्रयोग करना। सहजन की फूल की सब्जी। सहजन की फलियों का पाउडर।

सहजन की पत्तियों एवं फलियों के सत् को निकालकर विभिन्न फलों में मिलाकर उत्पाद बनाना।

अतः सहजन एक ऐसा महत्वपूर्ण पेड़ है जो बेजोड़ पोषक तत्वों से भरपूर है। इसमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम और प्रोटीन पाया जाता है। इसमें दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम और दुगना प्रोटीन होता है। प्राकृतिक रूप से इसमें मौजूद मैंग्नीशियम, शरीर में कैल्शियम को आसानी से पचाने में मदद करता है। इसमें पाया जाने वाला जिंक, खून की कमी पूरी करने में सहायक है। सहजन में ओलिक ऐसिड, जोकि एक प्रकार मोनो सैचुरेटेड फैट है, अधिक मात्रा में पाया जाता है जोकि शरीर के लिए अति आवश्यक है। सहजन में अधिक मात्रा में कैल्शियम होने के कारण यह हड्डियों को मजबूती प्रदान करने में सहायक है। इसमें पाया जाने वाला विटामिन सी, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। सहजन मानव जीवन के लिए प्रकृति का वरदान है। क्योंकि इसमें कुपोषण दूर करने की अद्भुत क्षमता पायी जाती है

सहजन के नुक्सान।

सहजन के फायदे तो बहुत हैं। लेकिन इसका इस्तेमाल गलत तरीके या ज्यादा मात्रा में किया जाए तो ईसके नुकसान भी हो सकते हैं। जैसे:-


प्रेग्नेंसी के दौरान सहजन का प्रयोग करने से बचना चाहिए या इसके सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह ले लेनी चाहिए। सहजन की छाल या सहजन के सेवन से गर्भपात होने की संभावना बढ़ सकती है।

सहजन के पत्ते हाई ब्लड प्रेशर में राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। लेकिन, ध्यान रहे कि जिनका ब्लड प्रेशर कम हो, वो सहजन का सेवन न करें।

हमने आपको सहजन की फली के बारे में बताया और सहजन के बारे में विस्तार से सारी बातें समझाई आपको हमारा पोस्ट कैसा लगा हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं आपका दिन शुभ हो धन्यवाद।

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