सूरजमुखी क्या है ? और इसके फायदे क्या है ?

 सूरजमुखी फूल की खास बात ये है कि यह फूल सूरज के चारो तरफ घुमते है यानि जिस-जिस ओर सूर्य घुमता है,इसलिए इसका नाम सूरजमुखी है। सूरजमुखी एक प्रमुख तिलहन है। सूरजमुखी का तेल सूरजमुखी के बीज से बनता है जिसके गुण अनगिनत हैं। सुरजमुखी का फूल देखने में तो आकर्षक होता है लेकिन इसमें कोई सुवास नहीं होता है। सूरजमुखी के बीज में विटामिन बी1, बी3, बी6, मैग्निशियम, फॉस्फोरस, प्रोटीन जैसे बहुत सारे पोषक तत्व हैं। इसलिए सूरजमुखी का प्रयोग आयुर्वेद में कई तरह के दवाईयों के लिए किया जाता है।


   

सूरजमुखी भारतवर्ष में लगभग सभी जगह पाई जाती हैं। सूरजमुखी के पौधे रोग उत्पन्न करने वाली आर्द्र तथा दुर्गन्धयुक्त वायु का शोषण करने की क्षमता रखते हैं। पृथ्वी से जो विष समान भाप उड़कर संक्रामक ज्वर के रूप से देश भर में फैलती है, उस विष रूपी भाप को सोखने की क्षमता सूरजमुखी के पौधे में है। इसके पौधे लगाने से वायु शुद्ध होती है तथा मलेरिया, संधिवात या अर्थराइटिस तथा आर्द्रता से उत्पन्न होने वाली बीमारियां नष्ट हो जाती हैं।

सूरजमुखी का वानस्पतिक नाम Helianthus annuus Linn. (हेलिऐन्थस ऐनुअस) Syn-Helianthus indicus Linn है। सूरजमुखी Asteraceae (ऐस्टरेसी) कुल का होता है। सूरजमुखी को अंग्रेजी में Sunflower (सनफ्लॉवर) कहते हैं। भारत के भिन्न-भिन्न प्रांतों में सूरजमुखी को विभिन्न नामों से जाना जाता है। जैसे-

Sanskrit-सूर्यमुखी;

Hindi-सूरजमुखी, सुर्जमुखी;

Urdu-सुरजमुखी (Surajamukkhi);

Assamese-बेलीफूल (Beliphul);

Konkani-जीरासोल (Jirasol), सूरियाकमल (Suriakamal);

Kannada-आदित्यभक्ति (Adityabhakti), सूर्यकान्थी हूवु (Suryakanthi huvu);

Gujrati-सुमुखी (Sumukhi), सूरजमुखी (Surajmukhi);

Tamil-कुरियाकांति (Curiyakanti), सूर्या कान्ति (Suryakanti);

Telegu-आदित्यभक्ति चेट्टू (Adityabhakti chettu);

Bengali-शूरियामुक्ति (Shuriamukti), सूरजमूखी (Surajmukhi);

Marathi-सूर्यफूला (Suryaphula), ब्राहमोका (Brahmoka), सूरजमुखा (Surajmuka);

Malayalam-सूर्यकान्ति (Suryakanti)।

English-मिरासोल (Mirasol), कॉमन सनफ्लावर (Common sunflower);

Arbi-अर्जीवान (Arzivana);

Persian-आफताबी (Aftabi), गुलीआफताब (Guliaftab)।

सूर्यमुखी पञ्चाङ्ग के एल्कोहल सत्त् में कैंसर-विरोधी-गुण पाय जाते है। यह पाचन में सहायक तथा विशेषत केंचुओं का नाशक और वातदोष को कम करने वाली है। सूरजमुखी की जड़ मूत्र संबंधी बीमारी में फायदेमंद होने के साथ-साथ दर्दनिवारक के रुप में भी काम करती हैं।

इसके फूल कड़वे और ठंडी तासीर के होते हैं। यह कृमिनाशक, कामोत्तेजक, सर्जन, कुष्ठ, व्रण या अल्सर, सांस संबंधी समस्या, मूत्रमार्गगत असामान्य स्राव, पाण्डु या एनीमिया, तंत्रिकाशूल या नर्व में दर्द, लीवर की बीमारी, फेफड़े में सूजन, आँख की बीमारी, किडनी की बीमारी, कृमि, बुखार, अर्श या पाइल्स में लाभप्रद होते हैं। इसके बीज मधुर, उत्तेजक, मूत्रल कफनिसारक, दुर्बलता दूर करने वाले, रतिज दुर्बलता, प्रवाहिका, कास, प्रतिश्याय तथा बिन्दुमूत्रकृच्छ्र में लाभप्रद होते हैं। इसके पत्र वामक, कफनिवारक तथा वातानुलोमक होते हैं।

सूरजमुखी के फायदे।

  • सूरजमुखी के जड़, पत्ता, फूल और बीज के इतने सारे पौष्टिक गुण हैं कि आयुर्वेद में सूरजमुखी को औषधी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। चलिये जानते हैं कि सूरजमुखी किन-किन बीमारियों के लिए औषधी के रूप में प्रयोग किया जाता है।
  • अर्श या पाइल्स में फायदेमंद सूरजमुखी।
  • मसालेदार, तीखा खाने के आदि है तो पाइल्स की बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। उसमें सूरजमुखी का घरेलू उपाय बहुत ही फायदेमंद साबित होता है।
  • 3 ग्राम सूरजमुखी बीज चूर्ण लेकर, उसमें 3 ग्राम शक्कर मिलाकर प्रतिदिन सुबह शाम खाने से अर्श में लाभ होता है मगर आहार में घी, खिचड़ी और छाछ का ही प्रयोग करना चाहिए।

अल्सर में फायदेमंद सूरजमुखी।

  • सूरजमुखी के पत्तों का काढ़ा बनाकर अल्सर के घाव को धोने से लाभ होता है।

  • बुखार के कष्ट से दिलाये राहत सूरजमुखी।
  • अगर मौसम के बदलने के वजह से या किसी संक्रमण के कारण बुखार हुआ है तो उसके लक्षणों से राहत दिलाने में सुरजमुखी बहुत मदद करती है।
  • सूरजमुखी मूल का काढ़ा बनाकर 20 मिली मात्रा में सुबह-शाम पिलाने से बुखार कम होता है।
  • इसकी जड़ को कान में बाँधने से ज्वर छूट जाता है।
  • सूरजमुखी के पत्ते और काली मिर्च को समभाग पीसकर काली मिर्च के बराबर गोलियां बना लें। इन गोलियों में से 1-1 गोली तीन दिन तक सुबह, दोपहर तथा शाम देने से शीतज्वर में लाभ होता है।
  • 20-30 मिली पत्ते के काढ़े को दिन में दो बार पिलाने से पैराटायफॉयड (मोतीझरा) ज्वर में लाभ होता है। 

अस्थमा में फायदेमंद सूरजमुखी

सुरजमुखी का औषधीय गुण अस्थमा के कष्ट से राहत दिलाने में मदद करता है। सूरजमुखी पञ्चाङ्ग चूर्ण में त्रिकटु मिलाकर सेवन करने से तथा बाद में चावल तथा घी खिलाने से सांस संबंधी रोग या अस्थमा में लाभ होता है।

कोलेस्ट्रॉल को करे कंट्रोल सूरजमुखी

  • सूरजमुखी के बीजों को अंकुरित कर खाया जा सकता है, इससे कोलेस्ट्राल की मात्रा नियंत्रित रहती है।

सूरजमुखी का उपयोगी भाग

  • आयुर्वेद में सूरजमुखी के जड़, पत्ता, फूल एवं बीज का प्रयोग औषधि के लिए किया जाता है।

सूरजमुखी का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए।

  • चिकित्सक के परामर्श के अनुसार सूरजमुखी का रस 10-20 मिली या 5-10 मिली तेल का सेवन कर सकते हैं।

सूरजमुखी के नुक्सान

  •  बाज़ार में मिलने वाले नमकीन सूरजमुखी के बीज खाने से शरीर में ज़रूरत से ज्यादा नमक का सेवन हो सकता है।
  • कुछ लोगों को सूरजमुखी परिवार के पौधों से एलर्जी होती है इसलिए वे इसका इस्तेमाल सावधानी से करें।
  • इसके पुराने बीजों का सेवन पेट में जलन, गैस, दस्त का कारण बन सकता है। 
  • बहुत अधिक मात्रा में इसका सेवन नुकसान कर सकता है। यह वज़न और कोलेस्ट्रोल के स्तर को बढ़ा सकता है।
  • अगर आप इनका अधिक मात्रा में सेवन करते हैं तो शरीर में ज़रूरत से अधिक सेलेनियम, फॉस्फोरस आदि लाभ की बजाए नुकसान अधिक करता है।
  • इसके बीजों में फाइबर होता है इसलिए अधिक मात्रा में सेवन गैस, पेट में दर्द कर सकता है।

अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए सूरजमुखी का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।धन्यवाद


Previous
Next Post »