कौन सी तुलसी सर्वश्रेष्ठ है ? आइए जानते हैं।





भारतीय संस्कृति में तुलसी को पूजनीय माना जाता है, धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ तुलसी औषधीय गुणों से भी भरपूर है आयुर्वेद में तो तुलसी को उसके औषधीय गुणों के कारण विशेष महत्व दिया गया है। तुलसी ऐसी औषधि है जो ज्यादातर बीमारियों में काम आती है। इसका उपयोग सर्दी-जुकाम खांसी, दंत रोग और श्वास संबंधी रोग के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। आइए जानते हैं तुलसी के गुण और उनके बारे में
 तुलसी-(ऑसीमम सैक्टम) एक द्विबीजपत्री तथा शाकीय, औषधीय पौधा है। यह झाड़ी के रूप में उगता है और 1 से 3 फुट ऊंचा होता है। इसकी पत्तियां बैंगनी आभा वाली हल्के रोएँ से ढकी होती है। पत्तियां 1 से 3 इंच लंबी सुगंधित और अंडाकार या आयताकार होती है। पुष्प मंजरी अति कोमल एवं 8 इंच लंबी और बहुरंगी छटाओं वाली होती है जिस पर बैंगनी और गुलाबी आभा वाले बहुत छोटे ह्रदयाकार पुष्प चक्रो में लगते हैं। बीज चपटे पीतवर्ण के छोटे काले चिन्हों से युक्त अंडाकार होते हैं। नए पौधे मुख्यरूप से वर्षा ऋतु में उगते हैं और शीतकाल में फूलते हैं। पौधा सामान्य रूप से दो-तीन वर्षों तक हरा बना रहता है। इसके बाद इसकी वृद्धावस्था आ जाती है। पत्ते कम और छोटे हो जाते हैं और शाखाएं सुखी दिखाई देती हैं।
                   
वैज्ञानिक वर्गीकरण
 वैज्ञानिक नाम Ocimum tenuifloyum
प्रजातियां
ऑसीमम अमेरिकन (काली तुलसी) गंभीरा या मामरी।
ऑसीमम वेसिलिकम (मरुआ तुलसी) मंजरीकी या मुर्सा ऑसीमम वेसिलिकम मिनिमम
ऑसीमम ग्रेटिसिकम (राम तुलसी, वन तुलसी, अरण्य तुलसी) ऑसीमम किलिमण्डचेरिकम (कर्पूर तुलसी)
ऑसीमम सेक्टम
ऑसीमम विरिडी

इसमें ऑसीमम सेक्टम को प्रधान या पवित्र तुलसी माना गया है। इसकी भी दो प्रधान प्रजातियां हैं-श्री तुलसी जिसकी पत्तियां हरी होती हैं। तथा कृष्ण तुलसी जिसकी पत्तियां नीलाभ कुछ बैंगनी रंग लिए होती हैं। श्री तुलसी के पत्र तथा शाखाएं श्वेताभ होते हैं। जबकि कृष्ण तुलसी के पत्रादि कृष्ण रंग के होते हैं।
 गुणधर्म की दृष्टि से काली तुलसी को ही श्रेष्ठ माना गया है। परंतु अधिकांश विद्वानों का मत है कि दोनों ही गुणों में समान है। तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है और लोग इसे अपने घर के आंगन या दरवाजे पर या बाग में लगाते हैं। भारतीय संस्कृति के चीर पुरातन ग्रंथ वेदों में भी तुलसी के गुणों एवं उसकी उपयोगिता का वर्णन मिलता है। इसके अतिरिक्त एलोपैथी और यूनानी दवाओं में भी तुलसी का किसी न किसी रूप में प्रयोग किया जाता है।

 यह भी पढ़ें-तुलसी के औषधीय गुण

Previous
Next Post »