चमगादड़ों पर शोध और खर्चा।



एक ताजा शोध से पता चला है कि स्तनपायी जानवरों में तिन लाख बिस हजार से ज्यादा वायरस हो सकते हैं।
          शोधकर्ताओं का कहना है, कि इनसे विषाणु जनित रोगों, विशेष रूप से मनुष्य में फैलने वाले वायरस की खोज से भविष्य की महामारीयों को रोकने में मदद मिलेगी।
       शोधकर्ता टीम का अनुमान है कि इसमें छः अरब डाॅलर ($6000000000) की लागत आएगी, लेकिन यह लागत बड़ी महामारीयों से निपटने की लागत का एक हिस्सा मात्र है।
          यह शोध एम बायो जर्नल में प्रकाशित हुआ था।

चमगादड़ पर शोध



      इंसानों में संक्रमित करने वाले 70 पीसदी वायरस जैसे एच आई वी, इबोला और द न्यू मिडिल ईस्ट रेस्पिकेट्री सिंड्रोम (मर्स) वन्यजीवों में उत्पन्न होते हैं।
       लेकिन अभी तक वैज्ञानिकों के लिए समस्या के विस्तार का मूल्यांकन काफी कठिन बना हुआ है।
     शोधकर्ताओं ने जांच के लिए अमेरिका और बांग्लादेश में चमगादड़ की एक प्रजाति गादुर (फ्लाइंग फॅक्स) का अध्ययन किया चमगादड़ो से लिए गए एक हजार आठ सौ सन्तानवे (1897) सैंपलों का अध्ययन कर शोधकर्ता अनुमान लगाने में सफल रहे कि वे कितने अन्य रोगाणुओं को ले जाने में सक्षम हो सकते हैं।
    उन्हें शोध में 60 विभिन्न प्रकार के वायरस मिले, जिनमें से अधिकांश को पहले कभी नहीं देखा गया था।

शोध का समय और लागत
         शोधकर्ताओं ने स्तनपायी जानवरों पर इन आंकड़ों के अध्ययन के बाद निष्कर्ष निकाला कि ऐसे करीब तिन लाख बिस हजार (3,20,000) वायरस हो सकते हैं।
  उन्होंने आगे कहा कि इन सभी विषाणुओं की पहचान भविष्य के लिए खतरा बनने वाली उन बीमारियों का पता लगाने की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं।
        निश्चित तौर पर हम धरती पर मौजूद सारे जानवरों का सर्वेक्षण नहीं कर सकते, लेकिन हम अधिक खतरे वाले विषाणुओं के संभावित जानवरों के बेहतर मापन की कोशिश कर सकते हैं, उन्होंने कहा कि इस शोध में दस साल लगेंगे और लागत अरबों डॉलर होगी।

नए विषाणु की खोज
    इसी तरह की एक प्रोजेक्ट 'प्रिडिक्ट' के तहत विश्व के उन हिस्सों में दो सौ चालिस  (240) नए विषाणुओं की खोज की गई है। जहां इंसान और जानवर आस-पास रहते हैं।
   शोधकर्ताओं ने चमगादड़ों पर ध्यान इसलिए केंद्रित किया है क्योंकि वे लोगों के बीच फैलने वाले कई सारे विषाणुओं के प्रसार के मौलिक स्रोत हैं।
   
   लेकिन हमें ध्यान रखना चाहिए कि चमगादड़ों की जीवन शैली विषाणुओं के काफी अनुकूल है वे बड़े समुदाय में रहते हैं, वे सारी दुनिया में फैले हुए हैं। और वे लंबी दूरी की उड़ान भरते हैं।
 अन्य स्तनपाई जीव भी इसी तरह के वायरसों के संवाहक होते हैं अथवा नहीं यह सवाल पूछना भी काफी महत्वपूर्ण है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि शोधकर्ता इस सवाल की भी पड़ताल कर रहें है।
    संभावित विषाणुओं की संख्या काफी बड़ी है, केवल चमगादड़ की ही अलग-अलग हजारों प्रजातियां हैं और इन सभी चमगादड़ों और अन्य जानवरों से विषाणुओ के संभावित खतरे की जांच काफी चुनौतीपूर्ण होगी।



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