कोरोना वायरस का खतरनाक असर इस तरह कर देता है हमारे शरीर को खोखला।


बीते साल दिसंबर में सबसे पहले चीन में कोरोना वायरस कोविड 19 के मामले सामने आए इसके बाद यह तेजी से दुनिया भर के 140 से अधिक देशों में फैला और विश्व स्वास्थ्य संगठन को इसे महामारी घोषित करना पड़ा।
       कोरोना वायरस इंसानों में कोविड 19 नाम की एक बीमारी देता है इसके शुरुआती लक्षण बेहद मामूली होते हैं लेकिन इससे लोगों की जान भी जा सकती है।


कोरोना वायरस 2019 क्या है, यह कैसे फैलता है ? 

इससे बचने के लिए आप नियमित रूप से अपने हाथ साबुन और पानी से अच्छे से धोएं
जब कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छिकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैलते हैं इन कणों में कोरोना के विषाणु होते हैं
 संक्रमित व्यक्ति के नजदीक जाने पर यह विषाणु युक्त सांस के रास्ते आपके शरीर में प्रवेश कर सकते हैं
 अगर आप ऐसी जगह को भी छूते हैं जहां इसके कण गिरे हैं और फिर आप उसी हाथ से अपनी आंख, नाक या मुंह को छूते हैं तो यह कण आपके शरीर में पहुंचते हैं।
 ऐसे में खांसते और छींकते वक्त टिशु का इस्तेमाल करना चाहिए ।
बिना हाथ धोए अपने चेहरे को न छूना और संक्रमितव्यक्ति के संपर्क में आने से बचना इस वायरस को फैलाने से रोकने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

कोरोना सेफ्टी टिप्स

कोरोना वायरस (कोविड 19) के लक्षण




अधिकारिक तौर पर पैन्डेमिक कोरोना वायरस का नाम सोर्स सीओवी-2 हैं (sars-cov-2) इन्क्यूबेशन पीरियड संक्रमण और लक्षण दिखने के बीच का वक्त है,
           यह वह वक्त होता है जब वायरस इंसान के शरीर में जम जाता है शरीर के भीतर जमने के बाद यह वायरस इंसान के लिए सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकता है इसका पहला हमला आपके गले के आस-पास की कोशिकाओं पर होता है इसके बाद सांस की नली और फेफड़ों पर हमला करता है यहां यह एक तरह से कोरोना वायरस अपनी संख्या बढ़ाता जाता है।
       नए कोरोनावायरस बाकी कोशिकाओं पर हमला कर देता है शुरुआती दौर में आप बीमार महसूस नहीं करते हालांकि कुछ लोगों में संक्रमण के शुरुआती दौर में लक्षण दिखाई देने लगते हैं वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड भी लोगों में अलग-अलग हो सकता है ओसतन ये 5 दिन का होता है।
   
        अधिकतर लोगों में जो लक्षण दिखाई देते हैं वह मामूली होते हैं कहां जा सकता है कि संक्रमित लोगों में से 10 में से 8 में यह लक्षण बेहद मामूली होते हैं और यह लक्षण बुखार, खांसी, बदन दर्द, गले में खराश और सिर दर्द भी हो सकता है।

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आपके शरीर का इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ने की कोशिश करता है,
आपकाशरीर वायरस को एक विदेशी हमलावर की तरह देखता है और पूरे शरीर को संकेत देता है कि शरीर पर हमला हुआ है। इसके बाद तो वायरस को खत्म करने के लिए साइटोकाइन नाम का केमिकल छोड़ना शुरू करता है शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति पूरे जोर से हमले का जवाब देने में जुट जाती है और इस कारण आपको बदन दर्द और बुखार भी हो सकता है।
     कोरोना वायरस के कारण होने वाली खांसी आमतौर पर सूखी खांसी होती है जिसमें बलगम (कफ) नहीं आता लेकिन कभी-कभी यह मामला खराश तक भी सीमित हो सकता है।

कुछ लोगों में खांसी में बलगम भी आ सकता है ऐसे मामलों में बलगम में फेफड़ों की मृत कोशिकाएं भी होती हैं जो वायरस के कारण नष्ट हो जाती हैं।
इस लक्षणों में अक्सर डॉक्टर आपको आराम करने
 ज्यादा पानी पीने और पेरासिटामोल, सर्दी खांसी की दवाई लेने के लिए कहते हैं इसके लिए अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं समझा जाता।
यह स्थिति करीब 1 सप्ताह तक रहती है जिन लोगों का इम्यून सिस्टम वायरस से लड़ने में कामयाब होता है उनका स्वास्थ्य 1 सप्ताह होने के भीतर सुधरने लगता है।
लेकिन कुछ मामलों में व्यक्ति का स्वास्थ्य और बिगड़ जाता है कोविड 19 के गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं
         लेकिन हाल में कुछ अध्ययन सामने आए हैं जिनका कहना है कि इस बीमारी में नाक बहने जैसी सर्दी जुकाम के लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं


कोविड 19 के गंभीर लक्षण
अगर बीमारी बढ़ जाए तो इसके कई कारण होते हैं पहला यह कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता वायरस को खत्म करने के लिए जरूरत से अधिक काम करती है इस दौरान जो केमिकल बनते हैं वह पूरे शरीर को संकेत देते हैं जिससे शरीर में सूजन होने लगता है, कभी-कभी इस सूजन के कारण शरीर को गंभीर क्षति पहुंचती है।
              वायरस के कारण रोग प्रतिरोधक तंत्र का संतुलन बिगड़ता है और सूजन दिखनी शुरू हो जाती है, हम अब तक यह नहीं जानते कि वायरस कैसे काम करता है फेफड़ों की इसी सूजन को निमोनिया कहते हैं अगर यह वायरस आपके मुंह से होते हुए आपकी सांस की नली में प्रवेश करता है और फिर आपके फेफड़ों तक पहुंचता है तो आपके फेफड़ों को छोटे-छोटे एयरसैक बना देता है।
                      इंसान के फेफड़े शरीर में वह जगह हैं जहां से ऑक्सीजन शरीर में पहुंचना शुरू होता है जबकि कार्बनडाइ ऑक्साईड शरीर के बाहर निकलता है, लेकिन कोरोना के बनाए छोटे-छोटे एयरसैक में पानी जमने लगता है और इस कारण आप को सांस लेने में तकलीफ होती है और आप लंबी सांस नहीं ले पाते ऐसे स्टेज में मरीज को वेंटिलेट की जरूरत पड़ती है।

चीन में 56,000 संक्रमित लोगों के बारे में एकत्रित की गई जानकारी पर आधारित विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक अध्ययन बताता है कि 14 फ़ीसदी लोगों में संक्रमण के इस तरह के गंभीर लक्षण देखे गए।

बताया जाता है कि 6 फ़ीसदी लोग इस वायरस के कारण बेहद गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं

           बेहद गंभीर स्थिति
इस स्टेज में इंसान का शरीर वायरस के सामने हार जाता है और गंभीर रूप से बीमार पड़ जाता है
इस स्टेज पर फेफड़े फेल होना सेप्टिक शॉक, ऑर्गन फेल होना और मौत का जोखिम तक हो सकता है।
ईस स्तर पर रोग प्रतिरोधक शक्ति काबू से बाहर हो जाती है और शरीर को गंभीर क्षति पहुंचती है, फेफड़ों में सूजन के कारण शरीर को जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन नहीं मिल पाती
इसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है जो खून साफ करने का काम करती है वह काम करना बंद कर सकती है साथ ही आपकी अंतड़ीया भी प्रभावित हो सकती हैं।
इस स्टेज पर इलाज के लिए ईसीएमओ यानी एक्स्ट्रा कॉर्पोरल मेम्ब्रेन ऑक्सिजनेशन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
     इसमें एक तरह के कृत्रिम फेफड़ों का इस्तेमाल किया जाता है जो शरीर के भीतर का खून बाहर निकाल कर उसे ऑक्सीजनेट करके वापस शरीर में डाल देते हैं।
लेकिन पुख्ता तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि यह इलाज कारगर होगा।

मौत के मामले
  कोरोना वायरस के कारण हुई मौतों के मामलों में डॉक्टरों ने बताया है कि कैसे उनकी पूरी कोशिशो के बावजूद मरीज को बचाया नहीं जा सका

लैन्सेट मेडिकल जर्नल में छपे एक अध्ययन के अनुसार चीन के वुहान के जिनयिनतान अस्पताल में कोरोना वायरस के कारण हुई दो मौतों में मरीजों के फेफड़े स्वस्थ पाए गए थे।
हालांकि अध्ययन में यह भी कहा गया है कि यह दोनों लंबे वक्त से धूम्रपान करते थे इस कारण हो सकता है कि उनके फेफड़े कमजोर हो सकते हैं।

मरने वाले पहले व्यक्ति 61 साल के एक पुरुष थे जब वह अस्पताल पहुंचे उन्हें गंभीर निमोनिया था, उन्हें सांस लेने में गंभीर परेशानी थी उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।

दूसरे मरीज 69 साल के एक व्यक्ति थे जिन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी उन्हें ईसीएमओ मशीन से जोड़ा गया था लेकिन वह बच नहीं सके उनका ब्लड प्रेशर लगातार गिर रहा था और उन्हें निमोनिया था

फिलहाल कई देशों में इससे संक्रमित हजारों लोगों का इलाज चल रहा है और मरने वालों का आंकड़ा बढ़ भी सकता है।
6 फ़ीसदी लोग इस वायरस के कारण गंभीर रूप से बीमार हुए इनमें फेफड़े फेल होना सेप्टिक शॉक, ऑर्गन फेल होना और मौत का जोखिम था।

14 फ़ीसदी लोगों में संक्रमण के कारण गंभीर लक्षण देखे गए इनमें सांस लेने में दिक्कत और जल्दी-जल्दी सांसे लेने जैसी समस्या हुई।

80 फ़ीसदी लोगों में संक्रमण के मामूली लक्षण देखे गए जैसे बुखार और खांसी कईयों में इनके कारण निमोनिया भी देखा गया।

संक्रमण के अधिकतर मामले दर्ज नहीं होते कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बूढ़ों और पहले से ही सांस की बीमारी (अस्थमा) से परेशान लोगों, मधुमेह और हृदय रोग जैसी परेशानियों का सामना करने वालो के गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका अधिक होती है।
कोरोना वायरस का इलाज इस बात पर आधारित होता है कि मरीज के शरीर को सांस लेने में मदद की जाए और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाए ताकि व्यक्ति का शरीर खुद वायरस से लड़ने में सक्षम हो जाए।

मेरा नाम ओमप्रकाश शर्मा है हमारा पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद हमने आपको पूरी जानकारियां इकट्ठा करके दी हैं आपको अच्छी लगी हो तो इन्हें शेयर करें लाइक करें और हमारी वेबसाइट को सब्सक्राइब करें ताकि आपको सबसे पहले नोटिफिकेशन मिलती रहे।


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