इंसान और मानसिकता।




हम मन ही मन पता नहीं क्या-क्या बना लेते हैं
और क्या-क्या मिटा लेते हैं इसी को ध्यान में रखते हुए मैंने यह पोस्ट तैयार किया है इसे आप पूरा जरूर पढ़ें ताकि आपको पता चले हकीकत क्या है हमें बुरा नहीं सोचना चाहिए।

हम मानसिक रूप से पूजा करते हैं,
 मानसिक रूप से सोचते हैं, मानसिक रूप से किसी को दुख भी देने की सोच जाते हैं,
 कभी-कभी तो मानसिक रूप से किसी को मारने के लिए भी सोच लेते हैं,
 मानसिक रूप से किसी को कभी दान भी कर दिया करो।
 किसी का भला भी कर दिया करो
   ऐसे किसी को दान तो बहुत लोग करते हैं मगर करते अपने मतलब के लिए हैं।                         

 हमें अपनी सोच बदल लेनी चाहिए अपने से छोटे कमजोर लोगों की सहायता करें अगर आप समर्थ वान हैं तो किसी गरीब को घर दान जमीन दान या अन्य उसके परिवार में जरूरत है वह चीजें दान करनी चाहिए
         नोट-(समर्थवान को दान कभी नहीं करना चाहिए)           आपका अपने आप भला होगा
 कर्मफल आप सभी जानते हैं तो कर भला हो भला कर्म की कहानी तो आपको मालूम ही है     

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      अनजाने में ऐसे ही कर्म कर जाते हैं जो आगे हमारी जिंदगी में कांटों की तरह चुभते हैं ऐसे में हमें सदा सात्विक क्रम करते रहना चाहिए (सात्विक मानसिक सोच) भगवान से कभी मांगना नहीं चाहिए क्योंकि भगवान अल्लाह परमेश्वर ने हमें बनाया उन्हें सब दिया लेकिन हमारे कर्मों ने सब को दबा दिया होता है इसीलिए अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए और आगे बढ़ते रहना चाहिए
और भगवान अल्लाह ईश्वर की आराधना करते रहना चाहिए जिससे हमें ग्यान मिलता रहे।
हम पैदा होते हैं तो हमें अनेकों शक्तियां मिलती है और हम उन शक्तियों से जुड़े होते हैं।
 उदाहरण कभी-कभी आपके साथ भी हुआ होगा आपको कभी एहसास हुआ कि मैं किसी शक्ति से जुड़ा हूं और आपके शरीर में भी अच्छी हलचल और आपके परिवार में भी अच्छी सफलता और नई ऊर्जा का विकास देखने को मिला होगा। यही होती हैं शक्तियों

 लेकिन ज्यौ ही हम समझदार होते हैं हम संसार की तरफ ज्यादा आकर्षित हो जाते हैं और अनेकों चीजें पाने के चक्कर में हमारी शक्तियों को नष्ट करते जाते हैं और फिर हम भगवान से मांगना शुरू कर देते हैं यह सब अनजाने में होते जाता है।
      हकीकत क्या हैं ?
 हकीकत यही है ऐसे समझे जो बना है उसे नष्ट होना ही है हमें मालूम होते हुए हम नहीं जानते हमारे सामने बड़े बुजुर्ग मरते हैं और हमें हमारी मृत्यु दिखाई नहीं देती जैसे उनके साथ हुआ एक दिन हमारे साथ भी होना है फिर भी हमें ऐसा ख्याल नहीं आता मगर माने या न माने हकीकत यही है।

 इसीलिए आदमी को अच्छे कर्म करते रहना चाहिए और भगवान और कर्मफल को हमेशा ध्यान रखना चाहिए जिससे आपसे बुरे कर्म न हो और आप अपने लक्ष्य को पहचाने और उस लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहें ताकि आपकी सफलता आपके पास हो आपकी सफलता किसी और के हाथ में ना हो
 पशुओं की तरह जीना छोड़ दें हम इंसान हैं इंसान की तरह रहे हमारा लक्ष्य क्या है भगवान की आराधना करने से सफलता जरूर मिलेगी।
   
   मेरा नाम ओमप्रकाश शर्मा है हमारा पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद अगर आपको पोस्टअच्छा लगा हो तो इसको लाइक शेयर जरूर करें और हमारी वेबसाइट को सब्सक्राइब कर ले ताकि आपके ज्ञान में वृद्धि होती रहे और हमारी नोटिफिकेशन आपको सबसे पहले मिलती रहे धन्यवाद
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