कहीं हमसे तो नहीं हो रही गलतियां (visualization)



आपकी बात सही है। किसी को भी नकारात्मक विज्यूलाइजेशन करना अच्छा नहीं लगता। किंतु इसके बावजूद भी यह हो जाता है। अनजाने में ही सही।

 हम कब अनजाने में विज्यूअलाइजेशन करते हैं ?
                हम भी अनजाने में विज्यूलाइजेशन करते हैं। क्या आपको इसकी जानकारी है ? कब ? आइए जानते हैं कि हम अपनी कई गतिविधियों या क्रियाओं के दौरान अनजाने में ही विज्यूलाइजेशन करते रहते हैं।
 जब हम कोई वर्णन सुनते हैं-
            कही विदेश में भ्रमण कर आए मित्र जब दुबई वर्ल्ड टावर का वर्णन करते हैं आपकी आंखें अपने मित्र को देखती रहती हैं मन में दुबई का वर्ल्ड टावर का संपूर्ण चित्र उभर जाता है यही अनजाने में हुआ विज्यूलाइजेशन है ऐसे समय में ऐसा लगता है जैसे हम स्वयं  वर्ल्ड टावर में घूम रहे हो।

 जब कोई व्यक्ति स्वयं के साथ हुई किसी दुर्घटना का वर्णन करता है तो उस समय हमारे मन में भी उस सारी घटना का चित्र उभर जाता है यह अनजाने में होने वाला विज्यूलाइजेशन है। सुनने वाला व्यक्ति भी स्वयं को इस घटना के साथ काल्पनिक रूप से जोड़ लेता है।

 जब कुछ याद करते हैं-
           जब हम यह याद करते हैं कि मुश्किल भरे समय में हमें कितना कठिन संघर्ष करना पड़ा था तब हम अनजाने में ही संघर्ष का विज्यूलाइजेशन करने लगते हैं बचपन की अकड़ मौज-मस्ती की जब हम याद करते हैं अनजाने में ही सुख का विज्यूलाइजेशन होने लगता है।
जब हम कुछ बातें बनाते हैं
          किसी को समझने के लिए अथवा अन्य किसी लाभ के लिए जब हम सकारात्मक या नकारात्मक बात बनाते हैं तब हम अनजाने में हीके ज्यूलाइजेशन करते होते हैं। जो नकारात्मक हो सकता है या सकारात्मक।

 जब हम कोई विनती करते हैं
          जब हम अपनी खुद की या सार्वजनिक समस्या के बारे में किसी के समक्ष फरियाद करते हैं तब हमारे मन में अनजाने में ही विज्यूलाइजेशन होने लगता है उदाहरण- अब पहले जैसा याद नहीं रहता, गर्मी से तौबा, ट्रैफिक का तो जबरदस्त त्रास है। यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता आदि इस प्रकार का अनजाने में होने वाला विज्यूलाइजेशन अधिकतर नकारात्मक होता है।

 जब हम भविष्य की बात करते हैं-
           जब हम अपने भविष्य को लेकर अच्छी या बुरी बात करते हैं तब हमारे मन में अनजाने में ही अच्छा या बुरा विज्यूलाइजेशन होना शुरू हो जाता है। उदाहरण-''जो ऐसे ही चलता रहा तो ऐक दिन व्यवसाय बंद करने का समय भी आ सकता है'' ''यदि ये दो महीने ऐसे-वैसे कट जाएं तो बाद में मजा ही मजा है।''
     इसके बाद जब हम कुछ बोलते हैं, सुनते हैं, देखते हैं या विचार करते हैं तब कम मात्रा में ही सही विज्यूलाइजेशन तो चलता ही रहता है। प्रत्येक शब्द और विचार से एक पक्का चित्र उभरता है।
  अधिकांश लोगों की जिंदगी उनके द्वारा अनजाने में किए गए विजुलाइजेशन का परिणाम है। किंतु-जब अनजाने में विज्यूलाइजेशन हो सकता है तो जानते देखते हुए क्यों नहीं हो सकता
    ''कल्पना, ज्ञान की अपेक्षा अधिक महत्वपूर्ण है''

Previous
Next Post »