विज्यूलाइजेशन और मन, पहले मन के बारे में जाने।



विज्यूलाइजेशन हमारे मन से बहुत नजदीक से जुड़ा है। इसलिए
विज्यूलाइजेशन के विज्ञान को समझने से पहले मन को समझ ले।
             
मन क्या हैं? मन मस्तिष्क के उस क्षमता को कहते हैं जो मनुष्य को चिंतन शक्ति, स्मरण शक्ति, निर्णय शक्ति, बुद्धि भाव, इंद्रियगृह्यता, एकाग्रता, व्यवहार, परिज्ञान (अंतर्दृष्टि) इत्यादि में सक्षम बनाता है। सामान्य भाषा में मन शरीर का  वह हिस्सा  या प्रक्रिया है जो किसी ज्ञातव्य को ग्रहण करने सोचने और समझने का कार्य करता है। यह मस्तिष्क का  एक  प्रकार्य  है।  हमारा  मन हमारी  सबसे बड़ी अदृश्य शक्ति है। विज्ञान की भाषा में कहें तो ऊर्जा वैज्ञानिकों ने मन की काम करने की आवश्यकताओं के अनुरूप मन के दो प्रकार बताएं हैं। हम जब जागते हैं उस समय जो मन काम करता है उसे जागृत मन और जो मन 24 घंटे काम करता है उसे अर्धजागृत मन कहते हैं।
 जागृत मन-हम अपने सभी बौद्धिक काम जागृत मन से करते हैं। जागृत मन निर्णायक मन है। यह पसंद और नापसंद करता है, तर्क करता है, सवाल करता है। हमेशा ऊधेड़-बुन में व्यस्त रहता है।
 अर्धजागृत मन-हमारी सभी आदतों का मूल कारण हमारा अर्धजागृत मन है। अर्धजागृत मन को जो जानकारी या सूचना बार-बार दी जाए उन्हें वह वास्तविक वास्तविक रूप में स्वीकार कर लेता है। अर्धजागृत मन स्वयं को मिलने वाली जानकारी को या सूचनाओं को स्थाई रूप से संग्रहित कर लेता हैै।
 श्वास का आना-जाना खून का संचरण, पाचन क्रिया जैसी अपने शरीर की सभी स्वयंसंचालित प्रक्रियाएँ अर्धजागृत मन के निर्देश से होती है। यह मन स्थान और काल के बंधन से मुक्त होता है। आपका अर्धजागृत मन आपकी भावनाओं को प्रभावित करता है। अर्धजागृत मन अपना सृजनात्मक मन है।

अर्धजागृत मन की शक्ति-अर्धजागृत मन अपने जाग्रत मन की तुलना में कई गुना शक्तिशाली है। क्योंकि इसमें हमारे संजोग  के सृजन की क्षमता है। अभी तक के हमारे संजोग अर्धजागृत मन द्वारा ही उपलब्ध कराए गए हैं। आप प्रश्न करेंगे कि यह किस तरह हो सकता है ?
 आइए इसका जवाब जान ले
संजोगो का सृजन किस तरह होता है ? हमें चाहे अच्छे लगने वाले संजोग हो या बुरे लगने वाले अवसर हों
इनका सृजन किस तरह होता है इस प्रक्रिया को बारी-बारी से समझते हैं ।

1 हमारे आसपास हम जो कुछ देखते हैं उनके चित्र हमारे अर्धजागृत मन मे छप जाते हैं। जो कुछ सुनते हैं उन वाक्यों तथा शब्दों के चित्र भी बनते हैं और अर्धजागृत मन के ऊपर छपते जाते हैं। इस तरह अर्धजागृत मन के पास अच्छे-बुरे-चित्रों को पहुंचाने का काम जाने अनजाने हम सतत करते रहते हैं।
2 अर्धजाग्रत मन चित्र के रूप में बार-बार मिलने वाली सत्य-असत्य जानकारियों को स्वीकार कर लेता है और उन्हें वास्तविक समझने लगता है।
3 वास्तविक रूप से स्वीकार की गई यह सूचना अपना अर्धजागृत मन स्थाई रूप से संग्रह करके रखता है। छोटी से छोटी जानकारी भी हमेशा के लिए संग्रहित रखता है।
4 अब वह अपने पास जानकारी या सूचनाओं का संग्रह जिस प्रकार का होता है हमें उसी तरह प्रभावित करने लगता है। ऐसे में हमारे पास संग्रह की गई जानकारी यदि अच्छी हुई तो वह हमें अच्छे ढंग से प्रभावित करता है और यदि खराब हुई तो बुरे ढंग से प्रभावित करता है। धीरे-धीरे हमारे ऊपर यह अपना प्रभाव बढ़ाने लगता है।
□ यह अपने विचारों को प्रभावित करने लगता है।
□ यह अपनी भावनाओं को प्रभावित करने लगता है।
□ यह हमारी शारीरिक क्रियाओं को प्रभावित करने लगता है। □ यह अपने व्यवहार को प्रभावित करने लगता है।
 परिणाम स्वरुप अपने अर्धजागृत मन में जो चित्र संग्रहित हो जाते हैं इनके अनुसार हम विचार करने लगते हैं। यह विचार जैसे होते हैं वैसी ही वस्तुएं, वैसी ही घटनाएं, वैसे ही लोग हमारी जिंदगी को आकर्षित करते हैं।

''आकर्षण के सिद्धांत के अनुसार''
□ आपके अर्धजागृत मन में संग्रहित चित्रों जैसी की भावनाएं अपने मन में भी जाग्रत होने लगती हैं। यह भावनाएं जैसी होती हैं वेसी ही वस्तुएं, घटनाएं और वैसे ही व्यक्ति हमारी जिंदगी को आकर्षित करते हैं।
''आकर्षण के सिद्धांत के अनुसार''
□अपना शरीर भी अपने अर्धजागृत मन के द्वारा किए गए चित्र संग्रह के अनुसार काम करने लगता है। हम वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं जैसे हमारे मन में संग्रहित चित्र होते हैं ।जिससे सेहत अच्छी बनती है या बिगड़ती है हम जैसा व्यवहार करते हैं वैसे ही परिणाम मिलने लगते हैं।
       जैसे हमारे अर्धजागृत मन के चित्र संग्रह होते हैं हम वैसा ही पसंद करते हैं और वैसे ही निर्णय करते हैं। और यह तो आप भी जानते हैं की हम जैसे निर्णय करते हैं वैसे ही परिणाम हमें मिलते हैं।
    इस तरह हमारे संजोग आकार ले लेते हैं इन संजोगों के आकार लेने, सृजित होने की प्रक्रिया को हम एक उदाहरण समझते हैं।
हमारे ज्यादातर संजोग हमने जाने अनजाने में किए हुए विज्यूलाइजेशन का ही परिणाम है।

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             धन्यवाद
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