गौमूत्र चमत्कारी है आप जानकर हेरान हो जाओगे



                                                                 
वर्तमानसमय में स्वमूत्र-चिकित्सा का प्रचार किया जा रहा है।
धर्मकी दृष्टिसे स्वमूत्रपान पाप है, जिसकी शुद्धि प्राजापत्यव्रत करने से होती है-
            विण्मूत्रस्य च शुद्धयर्थं प्राजापत्यं समाचरेत्।
            विण्मूत्रभक्षणे  चैव   प्राजापत्यं   समाचरेत्।।
 
 वास्तवमें महिमा गोमूत्र की ही है। इसलिए आयुर्वेद में आया है-
            सर्वेष्वपि च मूत्रेषु गोमूत्रं गुणतोऽधिकम्।
            अतो  विशेषात्कथने  मूत्रं   गोमूत्रमुच्यते।।

गोमूत्रमें रोगनाशकी विलक्षण शक्ति है। गंगा का निवास होनेसे गोमूत्र महान पवित्र है, जबकि स्वमूत्र महान अपवित्र है। कोई अज्ञानसे भी स्वमूत्रपान कर ले तो वह पुनः द्विजाति संस्कारके योग्य  हो जाता है-

               अज्ञानात्तु सुरां पीत्वा रेतो विण्मूत्रमेव वा।
               पुनः संस्कारमर्हन्ति त्रयो वर्णा द्विजातयः।।
               अज्ञानात्प्राश्य विण्मूत्रं सुरासंस्पृष्टमेव च।
               पुनः संस्कारमर्हन्ति त्रयो वर्णा द्विजातयः।।

गोमूत्र का सेवन करने से कैंसर जैसे भयंकर रोग भी ठीक हो जाते हैं।


        गोमूत्र सेवन के विषय में जानने योग्य बातें

अगर आपको मस्से हो गए है तो जरूर आजमाए यह नुस्खा

1 विदेशी (जर्सी) गायका मूत्र नहीं लेना चाहिए, क्योंकि वह वास्तवमें गाय नहीं है, अपितु 'गवय' (गाय जैसा एक पशु) है।

2 गौमूत्र को तांबे या पीतल के पात्रमें नहीं रखना चाहिए।

3 गोमूत्र को कपड़े से छानकर प्रातः खाली पेट लेना चाहिए।

4 गोमूत्र लेनेके बाद 1 घंटे तक कुछ नहीं खाना चाहिए।

5 पीने के लिए ताजा और मालिश के लिए 2 से 7 दिन पुराना गोमूत्र लेना चाहिए।

6 यथासंभव छोटी बछड़ी का गोमूत्र लेना चाहिए।

7 सामान्यतया गोमूत्र की मात्रा गर्भवती स्त्री एवं बच्चे के लिए लगभग 5 ग्राम और बड़ों के लिए 10 से 30 ग्राम दिन में दो बार देनी चाहिए।

                  विविध रोगों में गोमूत्र लेने की विधि
कैंसर, रक्तचाप, टी•बी•, दमा, पीलिया, लकवा, मधुमेह, कुष्ठ, कोलेस्टेरोल-वृद्धि, दाद (एग्जिमा), ह्रदयरोग, गुर्दे के विकार, कब्ज, जोड़ोंका दर्द, जीर्ण ज्वर, खांसी, जुकाम आदि अनेक रोग गोमूत्र लेने से ठीक हो सकते हैं।
 यहां कुछ रोगोंमें गोमूत्र सेवन की विशेष विधि लिख रहे है-

गर्मीयो मे त्वचा कि देखभाल

1 दमा, जुकाम, रक्तचाप- फुलाई हुई फिटकरी का आधा चम्मच चूर्ण आधा कप गोमूत्रमें मिलाकर ले।

2 बवासीर- गोमूत्रमें 2 ग्राम कलमीशोरा मिलाकर ले।

3 कब्ज- 3 ग्राम हरड़ के चूर्ण के साथ गोमूत्र मिलाकर ले।

4 सफेद कष्ठ- बावची के बीज को गोमूत्र में अच्छी तरह पीसकर लेप करें।

5 कान के रोग- गोमुत्र को थोड़ा गर्म (गुनगुना) करके कान में डालें।

विधार्थियों को जरूर शिखनी चाहिए यह बाते


6 खुजली- गोमूत्र की मालिश करके फिर स्नान करें। गोमूत्र में नीम के पत्ते पीसकर लगाएं।

7 लिवर के रोग- गोमूत्र को गर्म करके कपड़े से लीवर पर सेक करें।

8 बच्चों का सूखा रोग- गोमूत्र में केसर मिलाकर पिलाएं।

9 पेट फूलना- गोमूत्र में आधा मासा सेंधा नमक मिलाकर लें।

10 नासूर- गोमूत्र पीयें तथा उसकी पट्टी रखें।

   नोट:- गोमूत्र हमेशा बीच में से ही ले पहला और लास्ट का नही ले क्योंकि बीच में शुद्ध  होता है इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप पहला और लास्ट का गोमूत्र नहीं ले पहला छोड़कर फिर थोड़ी देर होने के बाद आप उस मूत्र को ले और बंद होने से पहले हटा ले।
       
       मेरा नाम ओमप्रकाश शर्मा है  आपको हमारा पोस्ट अच्छा लगा हो तो लाइक शेयर जरूर करें और हमारी नोटिफिकेशन पाने के लिए हमें सब्सक्राइब जरूर कर ले।
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