आम को किस तरह से काम में ले आइए जानते हैं


संस्कृत में आम को आम्रफल कहते हैं।

अंग्रेजी में mango जो anaadiaceae वर्ग का है
आम भारत भर में होते हैं लेकिन अलग-अलग जगह के आम की कुछ विशेषताएं हैं
कलमी, आम  भी है कुल मिलाकर करीब 650 तरह के आम भारत में पाए जाते हैं उनमें

अलफोन्सो, पीटर, जहांगीर, नील, बादामी, तोतापुरी, बगनपल्ली, लंगड़ा, रासपुरी,फसली, खुदादात, चंदन, कोलंबो, हापुस,तीनसाली  इत्त्यादि।

आम में विटामिन A, B, प्रोटीन, शक्कर और अमीनो अम्ल भरपूर है। अतः आम संपूर्ण आहार है पका आम पाचन शक्ति और उत्साह को बढ़ाता है तृष्णा की तृपित होती है।


आम ज्यादा खाने से जो तकलीफ होगी

वह शहद के साथ गाय का दूध पीने से दूर होगी।
 उच्च रक्तचाप वाले पके आम खा सकते हैं

 दोपहर के भोजन में आम का रस हो तो खाने के बाद जरूर नींद आएगी।

आम कब्जियत मिटाता है आंखों में phodopsin  नामक रास पदार्थ होने से ही धुंधली प्रकाश में भी दिखाई देता है।

 विटामिन A  की कमी होने पर phodopsin  का उत्पादन बंद होता है लेकिन रोज आम खाए तो phodopsin का उत्पादन पूर्ववत होगा।

 मुत्राशय व वृक्क पत्थर पिघलाने के लिए रोज एक गिलास आम-रस, एक गिलाश गाजर का रस और एक औंस शहद मिलाकर पियें।

कच्चा आम नमक के साथ खायें तो प्यास बुझती है।

गर्मी के दिनों में पसीने के कारण सोडियम क्लोराइड और लोहे नष्ट होता है, उसकी कमी कच्चा आम खाने से पूरी होती है।
बीज कड़ा होने के पहले आम को बारीक काट कर इमली की पत्ती के साथ पीस लें और उसे पीलिया वाले रोगी को बार-बार खिलाए तो वह पीलिया मुक्त होगा।

 आम के छिलके रोज चबायें तो मसूड़े मजबूत होंगे।

आम के पीले पत्ते से दांतौन करना दांत के लिए अच्छा है।

         आम की गुठली का छिलका निकाल कर अंदर की गिरी सुखाएं और उसका चर्ण  तैयार करें।
 2-3 ग्राम चूर्ण नारियल के तेल में रगड़कर गोंद जैसा तैयार करें।
 संभोग के आधा घंटा पहले योनि में अच्छी तरह लगाएं और आधा घंटे के बाद संभोग करें तो प्रजनोत्पादन नहीं होगा। स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।

   ठीक मात्रा में आम खाते रहे तो असमय बुढ़ापे से बच सकते हैं।

     प्रमेह के रोगी के लिए पके मीठे आम निषिद्ध हैं।

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