विश्व हित के लिए

         
       
                   विश्व हित के लिए हमारी सनातन

'दुर्जन सज्जन बन जाए । सज्जन शांति लाभ करें । शांत पुरुष सब प्रकार के बंधनों से मुक्त हो जाए । मुक्त पुरुष दूसरों को भी जन्म-मृत्युके बंधनसे छुड़ानेमें समर्थ हो । प्रजाजनों का कल्याण हो । राजालोग न्यायोचित मार्गसे पृथ्वी का शासन करें । खेती तथा दूधके लिए गोओंका और ज्ञान-प्रसार के लिए ब्राह्मणों का सदा कल्याण हो । सभी लोग सुखी हो । मेघ समय पर वर्षा करें । भूमि सदा हरी-भरी रहे । हमारा यह देश ( विश्व ) क्षोभरहित हो जाए । ब्राह्मणों को किसी प्रकार का भय न रहे । सभी प्राणी सुखी हों । सब निरोग रहें । सभी अच्छे दिन देखें। जगतृमें कोई भी दुःखका भागी ना हो । सभी लोग संकटोंको-कठिनाइयोंको पार कर जायॅ। सब लोग शुभ का ही दर्शन करें। सब लोग वांछित  भोग प्राप्त करें। सब लोग सर्वत्र प्रसन्न रहें। हमारे पितरों का कल्याण हो, गोओंका कल्याण हो, जगतृ का और मनुष्यमात्र का कल्याण हो, हमारे सभी आत्मीय-जन सुखी हो और मंगलकारी ज्ञान वाले हो हम दीर्घकाल तक सूर्य भगवान के दर्शन किया करें।

     

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